अरुण पुरी
अनादि काल से ही टेक्नोलॉजी हमारे जीने के तरीके में बदलाव लाती रही है. चाहे पहिए की ईजाद हो या प्लंबिंग, बिजली या ऐसी ही दूसरी सुविधाओं की, जिन्हें हम आज सामान्य मानते हैं. लेकिन अपने समय में ये सभी वाकई क्रांतिकारी बदलाव थे. टेक्नोलॉजी आदमी को रोजमर्रा की जिंदगी के कामों में ताकतवर बना देती है. कंप्यूटर के आविष्कार के बाद—चाहे वह 1945 का कमरे के आकार वाला हो या 1973 का पहला पीसी—टेक्नोलॉजी में तेजी से नाटकीय बदलाव होने लगे. टेक्नोलॉजी दरअसल तेज रफ्तार ट्रेन की तरह है, जिस पर आपको देर-सवेर चढ़ना ही है. वरना आप प्लेफॉर्म पर ही छूट जाएंगे. इंटरनेट की आमद और टेलीकॉम में क्रांति के बाद दुनिया हर मायने में पूरी तरह बदल गई है.
सेल फोन ज्यादातर लोगों की जिंदगी का जरूरी हिस्सा बन गया है. सेल फोन इस्तेमाल करने वालों के लिए दो मसले बड़े अहम हैं: रफ्तार और अटकाव. एक से मतलब है कि डेटा कितनी जल्दी डाउनलोड होता है, दूसरा है सिग्नल मिलना और रिसीव होना. देश अब 5जी वाले संसार की ड्योढ़ी पर खड़ा है. अब ये दोनों इतिहास की चीज हो जाएंगी. यही 5जी का वादा है. मसलन, इससे आप दक्षिण भारतीय ब्लॉकबस्टर, तीन घंटे की आरआरआर एक मिनट में डाउनलोड कर सकते हैं. फिलहाल देश में उपलब्ध बेहतरीन ब्रॉडबैंड सेवा से इसमें कम से कम आधा घंटा लगेगा. इसी तरह कम कनेक्टिविटी की वजह से कॉल ड्रॉप भी अतीत की बात हो जाएगी.
इसके आ जाने के बाद घर में मनोरंजन का खजाना ही नहीं आ जाने वाला, बल्कि 5जी हमारी जिंदगी के हर पहलू में क्रांति ला देगा. तीन अहम क्षेत्रों पर ही गौर करें, जिनमें 5जी से आमूल बदलाव आने वाले हैं और एक झटके में करोड़ों लोगों को लाभ पहुंचने वाला है. एक है डिजिटल शिक्षा. संभावनाओं से भरे इस क्षेत्र में हमने महामारी के दिनों में गिरते-पड़ते प्रवेश किया था. अब बिजली की गति से होने वाला डेटा ट्रांसफर हमारे युवाओं के सामने दुनिया खोल देगा. स्वास्थ्य सेवा के मामले में जांच वगैरह अब मरीज को मौके पर उपलब्ध हो सकती है, एंबुलेंस सेवाएं भी फौरन अस्पताल में डेटा ट्रांसफर कर सकती हैं. या बैंकिंग में जिओस्पेशियल इन्फॉर्मेशन सिस्टम हमारे लिए सरल, सहज और सुरक्षित 'वन-टैप पेमेंट' की व्यवस्था कर देगा, जिससे तमाम दिक्कतें दूर हो जाएंगी.
बात यहीं नहीं खत्म होती. यातायात और परिवहन में 5जी इलेक्ट्रिक वाहनों को नजदीकी चार्जिंग स्टेशन खोजने और संपर्क करने में मददगार हो सकता है और हाइवे पर चुंगी चुकाने के लिए फास्टैग वगैरह को ट्रांजिट सिस्टम से जोड़कर जाम घटा सकता है. कृषि में ड्रोन दूर से ही फसलों की सेहत की निगरानी कर सकते हैं और सही मात्रा में खाद और कीटनाशक छिड़क सकते हैं. मैन्युफैक्चरिंग और उद्योगों में 5जी ऑटोमेशन को नई ऊंचाई देगा, जिससे कार्बन फुटप्रिंट में कमी आएगी. प्रशासन और सार्वजनिक सुरक्षा के मामले में सेवाओं की डिलिवरी के अलावा जल्दी और सुरक्षित डिजिटल वेरिफिकेशन से जनजुड़ाव तेज हो सकता है.
तेज रफ्तार कनेक्टिविटी वह चमक है जो इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आइओटी) की ओर बढ़ने का रास्ता खोल सकती है, जिसको फिलहाल अगली क्रांति कहा जा रहा है. कामकाज और तमाम सेवाओं का इससे नक्शा ही बदल जाएगा. जरा सोचिए, शहर में दौड़ती कारों और केंद्रीय मॉनिटरिंग इकाई के बीच भरोसेमंद संचार नेटवर्क से रियल टाइम कनेक्शन बन जाए तो ट्रैफिक व्यवस्था का कायापलट कैसे न होगा! डेटा कंपनी स्टैटिस्टा के मुताबिक, 2023 तक इससे जुड़ी कारें दुनिया भर में '5जी आइओटी एंडपॉइंट का सबसे बड़ा आधार' होंगी. भारत में हम अभी अपनी तात्कालिक जरूरत के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन भविष्य में असीम संभावनाएं हैं.
एग्जीक्यूटिव एडिटर एम.जी. अरुण हमारी आवरण कथा में बताते हैं कि भारत में संभावित बाजार बहुत बड़ा है. अप्रैल, 2022 के अंत में मोबाइल इस्तेमाल करने वालों की तादाद 114.3 करोड़ हो गई है. उनमें से करीब 70 फीसद के पास फिलहाल 4जी नेटवर्क है. यही वह तबका है जो धीरे-धीरे 5जी की ओर बढ़ेगा. लेकिन, हवाई जहाज आने से जैसे ट्रेन खत्म नहीं हुई, दूरसंचार में भी टेक्नोलॉजी अगल-बगल बनी रहेगी. करोड़ों लोग 2जी और 3जी नेटवर्क पर बने रहेंगे, जिनकी तादाद कुछ लोग 40 करोड़ बताते हैं. कुल मिलाकर यह बड़ी आबादी है, जो मोटे अनुमान से भी अमेरिका की पूरी आबादी से मुकाबला कर सकती है. लेकिन 5जी नेटवर्क जहां सबसे पहले उपलब्ध होगी, उन शहरों में जीवन इसी तेजी से बदलने की उम्मीद है. भारत में डेटा की भारी भूख है. 2017 से 2021 के बीच खपत की सालाना चक्रवृद्धि दर 53 फीसद थी. टेक्नोलॉजी इस भूख को और तेज करेगी.
हालांकि, हर अच्छी चीज एक कीमत वसूलती है. दूरसंचार क्षेत्र को इन्फ्रास्ट्रक्चर में करीब 8 लाख करोड़ रु. निवेश की जरूरत है. फाइबरऑप्टिक नेटवर्क फिलहाल सिर्फ 30 फीसद है, उसे बढ़ाकर 70 फीसद करने की जरूरत होगी. टेलीकॉम टावर भी अभी के 7,00,000 से दोगुना करने की जरूरत है. सबसे बड़ी बाधा हैंडसेट की उपलब्धता होगी. फिलहाल 5.6 करोड़ यानी देश में कुल 80 करोड़ स्मार्टफोन में से सिर्फ 7 फीसद 5जी कंपैटेबिलिटी वाले हैंडसेट हैं. इस अनुपात को बढ़ाने के लिए शुरुआती कीमतें मौजूदा 15,000 रु. से घटाकर 10,000 रु. करनी होंगी. विशेषज्ञों के मुताबिक, 5जी का दौर चल पड़ेगा तो ज्यादा मात्रा में मांग के लिए मैन्युफैक्चरर खुद इस ओर दौड़ेंगे.
करीब 70 देशों में 5जी पहले से चालू है और 15 में आंशिक तौर पर उपयोग हो रहा है. कुल मिलाकर 150 देशों और इलाकों में करीब 493 ऑपरेटर पांचवीं पीढ़ी की दूरसंचार सेवा में निवेश कर रहे हैं और अमेरिका में कुछ दूसरे भी इसमें जुड़ सकते हैं. चीन के करीब 356 शहरों में 5जी है और 2021 तक वहां करीब 9,61,000 बेस स्टेशन बन चुके थे. अमेरिका में 296 शहरों में यह है. दक्षिण कोरिया में 85 शहरों में इसका पूरा कवरेज है, हालांकि वहां 4जी इस्तेमाल करने वालों में सिर्फ एक-चौथाई ही 5जी की ओर गए. स्पेन ने महामारी के बाद उबरने में 5जी के विस्तार को अहम पहलू बनाया. भारत को बीपीओ के मामले में टक्कर देने वाला फिलीपींस इस मामले में आगे रहा. उसने चतुराई से 5जी के लिए 2018-19 में ही हां कह दी थी और उसके 98 शहरों में इसका कवरेज है. यहां तक कि नेपाल भी इस मामले में भारत से बाजी मार सकता था. दक्षिण एशिया में 5जी का वहां पहला ट्रायल होता लेकिन ऐन वक्त पर रोड़ा अटक गया. इस बार भारत ने भी दांव लगा दिया है. इससे जल्दी क्या हो सकता था!
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