शख्सियतः मालकौंस आर-पार

पाकिस्तान के दिग्गज शास्त्रीय गायक उस्ताद शफकत अली खान संगीत के अपने सालाना जलसे, आजादी के 75 वर्ष, श्याम चौरासी घराने की विरासत और लता मंगेशकर पर.

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शास्त्रीय गायक उस्ताद शफकत अली खान शास्त्रीय गायक उस्ताद शफकत अली खान

aajtak.in

  • रायपुर,
  • 13 जुलाई 2021,
  • अपडेटेड 10:35 PM IST

पाकिस्तान के दिग्गज शास्त्रीय गायक उस्ताद शफकत अली खान संगीत के अपने सालाना जलसे, आजादी के 75 वर्ष, श्याम चौरासी घराने की विरासत और लता मंगेशकर पर.

खां साहब, आप हर साल श्याम चौरासी म्युजिक सर्कल में भारतीय कलाकारों को जोड़ते आए हैं. इस बार क्या?

हम 25 साल से याद-ए-सलामत आयोजित कर रहे हैं. मकसद है संगीत को प्रमोट करना. भारतीय कलाकार 3 साल से इसमें परफॉर्म कर रहे हैं. इस वर्ष भी उस्ताद सलामत अली खां की डेथ एनिवर्सरी 11 जुलाई से पहले 8—10 जुलाई को वर्चुअल महफिलें सजेंगी. राग मालकौंस पाकिस्तान में भी वही है जो हिंदुस्तान में, और जज्बात भी वही. खेल और संगीत ही हमें जोड़ते हैं, इसे भूलना नहीं चाहिए.

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भारत में आजादी के 75वें वर्ष का जलसा  शुरू हो चुका है. क्या पाकिस्तान में भी इसके लिए कोई नजरिया है?

जिस तरह भारत में उसी तरह पाकिस्तान में भी आजादी का जलसा सेलिब्रेट करने का चलन है. बेशक 75 वर्ष पूरे होने पर तो होना ही है. जहां तक मौसिकी के हवाले से बात की जाए तो पाकिस्तान की म्युजिक इंडस्ट्री उतनी बड़ी तो नहीं, लेकिन काफी सॉलिड है. शास्त्रीय-उपशास्त्रीय को लेकर पाकिस्तान के चारों सूबों में दीवानगी है. खासकर पंजाब और सिंध में. तो कुछ न कुछ तो होना ही है.

आप घराने के समय सिरमौर हैं! अपने वालिद उस्ताद सलामत अली और उनके बड़े भाई नजाकत अली की लाजवाब विरासत कायम रखने के लिए कोई नया रास्ता देखा है आपने?

हमारा श्याम चौरासी घराना पांच सौ साल पुराना ध्रुपद का घराना है. इसकी नाल पंजाब से जुड़ी है. वालिद 10वीं पीढ़ी थे. मैं और मेरे भाई-कजिन 11वीं जेनरेशन हैं. मेरे बच्चे शुजाअत, फैजान और नादिर 12वीं पीढ़ी रौशन करने को हाजिर हैं. रुहान अली, सिम्त अली 13वीं पुश्त से हैं, वे भी सीखते हैं. जितना बन पड़ेगा घराना कायम रखेंगे. इसे खत्म न होने देंगे हम.

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भारत-पाकिस्तान के रागदारी गाने वाले फनकारों में आप विरले हैं जो मंचों पर लता (मंगेशकर) जी के गाए गीत भी उतने ही आनंद से गाते हैं!

लता जी एक दरवेश हैं. वे सूफी संत की हैसियत रखती हैं. भले वे फिल्मों में गायिका रहीं लेकिन वे बहुत बड़ी गवैया हैं. इसे उन्होंने अपने सुगम गायन में बार-बार दिखाया. वे जो सुर लगाती हैं ऐसा तो हमने कभी सुना ही नहीं. मैं उनके गीतों को गाना अपना सौभाग्य मानता हूं. हमारा पूरा परिवार उनके लिए हमेशा दुआएं करता है. मैं उन्हें अपना सलाम पेश करता हूं.

भारत-पाकिस्तान के रागदारी गाने वाले फनकारों में आप विरले हैं जो मंचों पर लता (मंगेशकर) जी के गाए गीत भी उतने ही आनंद से गाते हैं!

लता जी एक दरवेश हैं. वे सूफी संत की हैसियत रखती हैं. भले वे फिल्मों में गायिका रहीं लेकिन वे बहुत बड़ी गवैया हैं. इसे उन्होंने अपने सुगम गायन में बार-बार दिखाया. वे जो सुर लगाती हैं ऐसा तो हमने कभी सुना ही नहीं. मैं उनके गीतों को गाना अपना सौभाग्य मानता हूं. हमारा पूरा परिवार उनके लिए हमेशा दुआएं करता है. मैं उन्हें अपना सलाम पेश करता हूं.

शास्त्रीय संगीत की महफिलों को कोरोना ने पाकिस्तान में कितना नुक्सान पहुंचाया?

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पूरी दुनिया में क्रिएटिव फॉर्म खासकर महफिली जलसों पर इसने बुरा असर छोड़ा. पाकिस्तान में भी हर दर्जे का गाने-बजाने वाला परेशान हुआ. इसके बावजूद, छोटे पैमाने पर ही क्यों न सही, महफिलें सजीं, जो कमाल की बात है. हमने भी (महफिलें) करवाईं. मैंने लाइव और वर्चुअल दोनों तरह से गाया. दूसरे मुल्कों की तरह अब पाकिस्तान में भी जिंदगी आम होने लगी है.

शास्त्रीय संगीत की महफिलों को कोरोना ने पाकिस्तान में कितना नुक्सान पहुंचाया?

पूरी दुनिया में क्रिएटिव फॉर्म खासकर महफिली जलसों पर इसने बुरा असर छोड़ा. पाकिस्तान में भी हर दर्जे का गाने-बजाने वाला परेशान हुआ. इसके बावजूद, छोटे पैमाने पर ही क्यों न सही, महफिलें सजीं, जो कमाल की बात है. हमने भी (महफिलें) करवाईं. मैंने लाइव और वर्चुअल दोनों तरह से गाया. दूसरे मुल्कों की तरह अब पाकिस्तान में भी जिंदगी आम होने लगी है.

—राजेश गनोदवाले.

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