भारत को चोटी का निर्माता बनाना होगा

हमें भी वह नीति लागू करनी होगी जिसे अमेरिका ‘उभरते उद्योग सिद्धांत’ नाम देता है. कुछ उद्योगों की रक्षा करनी होगी पर हमेशा के लिए नहीं.

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अमिताभ कांत, सीईओ, नीति आयोग अमिताभ कांत, सीईओ, नीति आयोग

राज चेंगप्पा

  • नई दिल्ली,
  • 21 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 8:41 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'आत्मनिर्भर भारत’ की दृष्टि भारत को आत्मविश्वासी बनाने की है. यह देश को नवाचार अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है ताकि भारत वैश्विक आपूर्ति शृंखला का एक अभिन्न हिस्सा, एक उच्च क्षमता वाला मैन्युफैक्चरिंग राष्ट्र और हर क्षेत्र में समग्र रूप से उत्कृष्ट देश बनकर उभरे. यह दुनिया से खुद को अलग-थलग करने और वैश्वीकरण विरोधी होने जैसी सोच कतई नहीं है.

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प्रधानमंत्री की सोच है कि भारत को घरेलू बाजार की ताकत का उपयोग माल का उत्पादन करने और निर्यात में लंबी छलांग लेने के लिए एक आधार के रूप में करना चाहिए. बहुत सारे आयात किए जा रहे उत्पाद हमें भारत में ही बनाने में सक्षम होना चाहिए.

आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने के लिए कई चीजें करनी होंगी. सबसे पहले तो भारत को बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग शुरू करनी होगी. हमने हमेशा पूंजीगत सब्सिडी दी है. अब हमें उस व्यवस्था से दूर जाना चाहिए. इसके बजाए, उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन देने चाहिए जब तक कि हम वैश्विक स्तर की उत्पादन क्षमता प्राप्त न कर लें. हमारी योजना खुद को टिकाऊ बनाने की है—भारत में निवेश करें और यहीं उत्पादन.

दूसरे, हमें भी वह नीति लागू करनी होगी जिसे अमेरिका ‘उभरते उद्योग सिद्धांत’ नाम देता है. कुछ उद्योगों की रक्षा करनी होगी पर हमेशा के लिए नहीं. यह संरक्षण एक चरणबद्ध मैन्युफैक्चरिंग कार्यक्रम के जरिए होगा, जहां शुल्क नीचे लाए जाएंगे, कह सकते हैं कि पांच साल तक कोई शुल्क न लिया जाए जिसकी मदद से वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हो सकें.

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तीसरा, अनुभव बताता है कि चीन के खिलाफ ऊंचा शुल्क लगाने पर वही सामान उन देशों से होकर आए हैं जिनके साथ हमारे मुक्त व्यापार समझौते हैं. हमें इस राउंड-ट्रिपिंग का अध्ययन करना और उस पर रोक लगाना होगा, लालफीताशाही को बढ़ावा दिए बिना. हमें गैरजरूरी तौर पर संरक्षणवादी नीतियों में लिप्त नहीं होना चाहिए.

इनपुट की लागत के साथ छेड़छाड़ करने पर हम निर्यात में प्रतिस्पर्धी नहीं रह पाएंगे. उपभोक्ता उत्पादों की श्रेणी में आयात शुल्क बढ़ाने पर भारत के निर्यात पर उल्टा असर नहीं होगा. लेकिन यह तय समय के लिए हो और फिर धीरे-धीरे वार्षिक आधार पर घटाते हुए पांच साल की अवधि में 0-5 प्रतिशत कर दिया जाना चाहिए. यह पक्का करेगा कि हमारी मैन्युफैक्चरिंग विश्वस्तर पर प्रतिस्पर्धी बने.

चौथा और सबसे अहम सवाल है कि भारत भूमि, श्रम, सीमा शुल्क और बंदरगाहों पर जहाजों पर माल लादने और उतारने को लेकर बुनियादी मुद्दों का सामना करता है. हमें इन क्षेत्रों को डिजिटल बनाना चाहिए. राज्य स्तर पर भी चीजें आसान बनाने के लिए बहुत काम करने की जरूरत है.

चार और पहलू भी आत्मनिर्भर भारत को सफल बनाने में अहम हैं. सबसे पहले, विकास के लिए प्रौद्योगिकी को अपनाना. दूसरा, उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहनों के माध्यम से बड़े पैमाने पर निवेश लाने को नवाचार हमारी रणनीति का अहम हिस्सा होना चाहिए. तीसरा, यह पक्का करना होगा कि यहां उपभोग वाले सामान धीरे-धीरे यहीं बनाए जाएं. चौथा, बुनियादी ढांचे के विकास के लिए बड़े पैमाने पर जोर देना होगा, जिस पर पहले ही काफी होमवर्क हो चुका है.

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—राज चेंगप्पा से बातचीत के आधार पर.

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