गुजरात की वडगाम सीट से 2017 में निर्दलीय विधायक चुने गए जिग्नेश मेवाणी इस बार इसी सीट से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. इस चुनाव में पार्टी की तैयारी और दूसरे मुद्दों पर संपादक सौरभ द्विवेदी से उनकी बातचीत के मुख्य अंश :
विधायक रहते हुए पांच साल के दौरान आपने वडगाम में क्या काम करवाए?
इस इलाके में पहले पानी की बहुत समस्या थी. मैं जब चुनाव लड़ने आया था तो लोगों से वादा किया था कि पानी की समस्या हल करूंगा. अब मुझे सुकून है कि नर्मदा केनाल का 190 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट मंजूर हुआ है. आने वाले समय में मुक्तेश्वर बांध और कर्मावत तालाब के अलावा 24 और तालाब भरे जाएंगे. वहीं कोरोना संकट के दौरान मेरी एक अपील पर माननीय हाइकोर्ट ने फैसला देते हुए कहा कि हर विधायक को 50 लाख रुपए कोरोना बचाव कार्य के लिया खर्च करने हैं. आज वडगाम में गुजरात का सबसे बड़ा ऑक्सीजन प्लांट है. इसके अलावा पिछले पांच साल में जगह-जगह मोर्चा लगाकर हमने पूरे गुजरात में 300 करोड़ रुपए से ज्यादा की भूमि दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों को दिलवाई है.
2017 में आप हार्दिक पटेल और अल्पेश ठाकोर के साथ भाजपा को उखाड़ फेंकने की कसमें खाते थे. अब आपके दोनों साथी भाजपा में हैं. ऐसा क्यों?
पाटीदार आंदोलन के वक्त हार्दिक पर 30-35 मुकदमे दर्ज किए गए थे. उनमें से कुछ गंभीर किस्म के थे, जिनमें 10 से 15 साल के कारावास जैसी सजा थी. पता नहीं हार्दिक को यह अच्छा लगेगा या नहीं, लेकिन मुझे लगता है कि इन मुकदमों में सजा करवाने का दबाव बनाकर उसे भाजपा में शामिल करवाया गया.
जहां तक अल्पेश का मामला है तो हो सकता है कि उसने खुद को भाजपा की विचारधारा के ज्यादा करीब पाया हो या फिर वह कुछ प्रयोग कर रहा है या उसे वहां ज्यादा अवसर दिखे हों.
आपका जुड़ाव आम आदमी पार्टी के साथ भी रहा. उनकी तरफ से बुलावा नहीं आया क्या? क्या आपका अरविंद केजरीवाल से कोई साबका हुआ?
पहले एक-दो बार मुलाकात हुई है. उना आंदोलन के वक्त भी बात हुई थी. जब आम आदमी पार्टी से इस्तीफा देने के लिए गया था तब भी हुई थी. मैंने उनसे कहा कि मैं अभी किसी राजनैतिक पार्टी से जुड़ने के लिए तैयार नहीं हूं. इसके अलावा कुछ खास नहीं.
आपने कांग्रेस में जाने का फैसला क्यों किया?
मेरी राहुल गांधी से जो मुलाकात हुई उसके बाद मैं तीन बातों को लेकर आश्वस्त था. पहली कि यह आदमी व्यक्तिगत तौर पर या फिर सार्वजानिक मंच से कभी झूठ नहीं बोलेगा. मुझे ऐसा भरोसा इस देश की मुख्यधारा की राजनीति में मौजूद किसी भी नेता से मिलने के बाद नहीं आया.
दूसरा, यह आदमी व्यक्तिगत तौर पर आपको या फिर इस मुल्क की जनता को कभी डिच नहीं करेगा. तीसरा, राहुल गांधी सच्चे मायनों में लोकतांत्रिक और उदार आदमी हैं. मेरे लिए कांग्रेस के दायरे में रहते हुए दलितों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों, मजदूरों के पक्ष में कुछ भी बोलने की आजादी हमेशा बनी रहेगी.
राहुल गांधी ने बंद कमरे में क्या वादे किए?
कोई वादा नहीं किया. मैं उस किस्म का आदमी नहीं हूं जो पद मिलने की शर्त पर पार्टी ज्वाइन करे. उन्होंने मुझसे कहा कि तुम लड़ने वाले आदमी हो, जनता की लड़ाई लड़ो, मेरा तहेदिल से समर्थन रहेगा.
आपकी राहुल गांधी के साथ करीबी पार्टी के सीनियर नेताओं को असहज नहीं करती?
पार्टी के जितने भी सीनियर नेता हैं उनकी जड़ें इतनी मजबूत हैं कि हमारे जैसे युवाओं से वे असहज महसूस नहीं करते हैं. पार्टी की सीनियर लीडरशिप ने ही मुझे गुजरात में पार्टी का वर्किंग प्रेसिडेंट बनाया है.
क्या काम होता है वर्किंग प्रेसिडेंट का?
सुरक्षित सीटों के अलावा हमने 40 ऐसी सीटें चिन्हित की हैं जहां पर दलित वोटर अच्छी तादाद में हैं. मुझे पार्टी की तरफ से इन 40 सीटों पर दलित वोटरों को लामबंद करने का काम दिया गया है. इसके अलावा नॉर्थ गुजरात में पाटन और बनासकांठा जिले की विधानसभा सीटों की जिम्मेदारी दी गई है.
इस चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा क्या है?
युवा साथियों को बेरोजगारी सबसे बड़ा मुद्दा लग सकता है. लेकिन मेरे हिसाब से सबसे बड़ा मुद्दा महंगाई का है. पेट्रोल, भाड़ा, किराना सब महंगा हुआ है. इसके अलावा बेरोजगारी, ठेके पर काम कर रहे कर्मचारी, पेपर लीक, मुंद्रा पोर्ट से दो लाख करोड़ रुपए की ड्रग्स का पकड़ा जाना भी बड़े मुद्दे हैं.
गुजरात के गालिब कहे जाने वाले मरीज आपके पसंदीदा शायर हैं. इस इंटरव्यू को उन्हीं के किसी शेर के साथ खत्म करते हैं.
आ एक गुण खुदा नो अमारा जीवन मां छे, वर्तन नथी सामान अमारू बधानी साथे. इसका हिंदी अर्थ है कि खुदा का एक गुण हमारे जीवन में भी है. हमारा भी बर्ताव सब के साथ एक जैसा नहीं है.
सौरभ द्विवेदी