''हमारा लक्ष्य केवल आर्थिक विकास हासिल करना नहीं है, हम इसे समावेशी बनाना चाहते हैं''

तमिलनाडु राज्यों के प्रदर्शन का आकलन करने वाली 12 श्रेणियों में से 9 में शीर्ष 5 राज्यों में शामिल है

Advertisement
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन

राज चेंगप्पा

  • नई दिल्ली,
  • 20 दिसंबर 2022,
  • अपडेटेड 6:09 PM IST

आत्मविश्वास से भरपूर और निश्चिंत नजर आते तमिलनाडु के 69 वर्षीय मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने अपने निजी आवास पर इंडिया टुडे के समूह संपादकीय निदेशक राज चेंगप्पा के साथ बातचीत में अपनी मुख्य प्राथमिकताओं के साथ-साथ सफलता के मंत्र पर चर्चा की. बातचीत के प्रमुख अंश: 

प्र: आपकी सफलता का राज क्या है?

कोई रहस्य नहीं है. मैंने हमेशा अपने लोगों के प्रति वफादार रहने की कोशिश करते हुए अपने विवेक से कार्य किया है और यही मेरी सफलता का कारण है. आज मैं जो कुछ भी हूं, वह जनता के आशीर्वाद से हूं. एक समय था जब लोगों को विधायकों और मंत्रियों से मिलने आना पड़ता था, लेकिन अब वह रिवाज बदल गया है. अब जनता हमारे पास नहीं आती, बल्कि सत्ता में आने से पहले ही हमने 'नामक्कु नामे' नाम से एक योजना बनाई थी जिसके तहत हम तमिलनाडु के हर कोने में पहुंचे, लोगों से मिले और उनकी शिकायतें सुनीं. फिर पिछले साल मैंने पदभार संभालने के बाद उनगल थोगुथियिल मुथलमाईचर (मुख्यमंत्री आपके निर्वाचन क्षेत्र में) की शुरुआत की और हर निर्वाचन क्षेत्र का दौरा किया और लोगों की परेशानियां जानीं. हमने उन्हें आश्वासन दिया है कि हम एक-एक कर उनकी सारी समस्याओं का समाधान करेंगे. 

Advertisement

मई 2021 में कार्यभार संभालने के बाद से आपकी प्रमुख प्राथमिकताएं क्या रही हैं और उन्हें लागू करने में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा है? 

मैं बहुत चुनौतीपूर्ण समय में मुख्यमंत्री बना. तब महामारी कहर बरपा रही थी. यह हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता थी. लॉकडाउन भले ही कोविड-19 का प्रसार नियंत्रित करने का एक महत्वपूर्ण तरीका था, फिर भी हमने यह सुनिश्चित किया कि लोगों की आजीविका प्रभावित न हो और उनकी बुनियादी जरूरतें पूरी हों. हमने सभी राशन कार्डधारकों को दो किश्तों में 4,000 रुपए दिए और दैनिक जरूरत की सामग्रियों वाले कोरोना राहत किट वितरित किए. हमने इलम थेडी कलवी (शिक्षा आपके द्वार) जैसी योजनाएं लागू कीं. इसके कुछ समय बाद ही राज्य में रिकॉर्ड बारिश हुई और राज्य के कई हिस्सों में बाढ़ आ गई. कुशल समन्वय और बेहतर संकट प्रबंधन के साथ इसे प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया गया.

Advertisement

ये तो प्राकृतिक आपदाएं थीं जिनका हमने सामना किया. फिर 2011 से 2021 तक अन्नाद्रमुक के शासन के दौरान की मानव निर्मित आपदाएं भी थीं. प्रशासन निष्क्रिय था, मंत्री भ्रष्टाचार में लिप्त थे, और राज्य की वित्तीय स्थिति खराब हो गई थी. मैंने ऐसी स्थिति में पदभार संभाला और पिछली सरकार द्वारा पैदा किए गए संकट से तमिलनाडु को उबार रहा हूं. हमने राज्य की अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए एक आर्थिक सलाहकार परिषद भी बनाई है जिसमें नोबेल पुरस्कार विजेता एस्थर डुफ्लो और आरबीआइ के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन शामिल हैं. हम ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (व्यापार में सुगमता) रैंकिंग में 14वें स्थान से छलांग लगाकर तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं. यहां उद्योग विभाग जोरों से काम कर रहा है; मेरे कार्यभार संभालने के बाद से राज्य में 2.23 लाख करोड़ रुपए का निवेश लाने के लिए 207 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए हैं.

आपने 2030 तक राज्य को एक ट्रिलियन (दस खरब) डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा है. इसे पूरा करने के लिए तमिलनाडु का विकास मॉडल क्या है? 

हम इस दिशा में गंभीरता से काम कर रहे हैं. मैं इस बात पर जोर देता रहा हूं कि विकास के हमारे द्रविड़ मॉडल को समावेशिता के मानदंड पर चलाया जाना चाहिए, जिसमें हर व्यक्ति, क्षेत्र और जिला शामिल हो. मात्र आर्थिक विकास हमारा लक्ष्य नहीं है. मैं तमिलनाडु में समग्र विकास देखना चाहता हूं जो सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक हर क्षेत्र में होना चाहिए. हमारी सभी नीतियां उसी के अनुसार बनाई गई हैं. हाल ही में शुरू की गई नान मुधलवन (सबसे पहले मैं) योजना के माध्यम से युवाओं को उद्योग से संबंधित कौशल प्रदान किया जा रहा है. हम यह भी चाहते हैं कि रोजगार परिदृश्य समावेशी के साथ-साथ महिलाओं, दिव्यांग व्यक्तियों और हाशिये पर रहने वाले वर्गों के अनुकूल हो. 

Advertisement

केंद्र-राज्य संबंधों पर आपकी क्या राय है? 

'राज्य में स्वायत्तता, केंद्र में संघवाद' पेराअरिंगर अन्ना और मुत्तमिरअरिंगर कलैगनार के समय से हमारे आंदोलन का मौलिक और जांचा-परखा स्वीकृत सिद्धांत है. संविधान भारत को राज्यों के संघ के रूप में परिभाषित करता है. केंद्र सरकार का दायित्व है कि वह राज्य सरकारों का सम्मान करे. दुख की बात है कि वर्तमान भाजपा सरकार इनमें से कुछ भी नहीं करती. वे हमसे परामर्श किए बिना ऐसे कानून लाते हैं जो सभी राज्यों के लिए बाध्यकारी हों. इसे बदलना होगा. 

अगर मैं निजी बात पूछ सकूं तो जानना चाहूंगा कि आप रिलैक्स कैसे करते हैं?

सामान्यत: रिलैक्स करने के लिए मैं सैर को जाता हूं. साथ ही समय मिलने पर योग भी करता हूं. मैं अपने पार्टी कार्यकर्ताओं और मित्रों द्वारा भेंट की गई नई पुस्तकें भी पढ़ता हूं. देश-दुनिया के मुद्दों पर लोग क्या राय रखते हैं, इसे समझने के लिए मैं कभी-कभार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी एक नजर डाल लेता हूं.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement