एक अध्ययन में खुलासा, भारत में 10 में से 8 बच्चे ओरल हेल्थ प्रॉब्लम से हैं परेशान

Impact Feature

कोलगेट-पामोलिव (इंडिया) लिमिटेड के लिए KANTAR IMRB के एक राष्ट्रीय अध्ययन से पता चला है कि भारत में 10 में से कम से कम 8 बच्चे ओरल हेल्थ यानी मुख संबंधी सेहत की समस्याओं से पीड़ित हैं, जिन पर गौर करने की आवश्यकता हैं.

Advertisement
बच्चों में ओरल हेल्थ समस्या बच्चों में ओरल हेल्थ समस्या

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 सितंबर 2019,
  • अपडेटेड 10:59 PM IST

KANTAR IMRB के सर्वेक्षण में भारतीय बच्चों के ओरल हेल्थ को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं.  इस सर्वेक्षण से यह बात भी सामने आई है कि बच्चों के मुख संबंधी सेहत की वास्तविकता और माता-पिता की धारणा के बीच काफी अंतर है.

कोलगेट-पामोलिव (इंडिया) लिमिटेड के लिए KANTAR IMRB के एक राष्ट्रीय अध्ययन से पता चला है कि भारत में 10 में से कम से कम 8 बच्चे ओरल हेल्थ यानी मुख संबंधी सेहत की समस्याओं से पीड़ित हैं, जिन पर गौर करने की आवश्यकता हैं.

Advertisement

सर्वेक्षण में शामिल बच्चों में पाए जाने वाले कुछ प्रमुख ओरल हेल्थ समस्याओं में दातों पर प्लैक जमना, दांतों पर सफेद धब्बे, मसूड़े की सूजन, क्षरण, सांसों की बदबू और मसूड़ों से खून आना आदि शामिल हैं. यही नहीं, सर्वे से पता चला कि हर 3 में से 2 बच्चों के दातों में कैविटीज हैं या फिर उनमें कैविटीज होने का खतरा बहुत ज्यादा है. अध्ययन में यह भी बताया गया है कि सर्वेक्षण में शामिल 10 में से 9 वयस्कों को ओरल हेल्थ की बड़ी समस्या है.

देश भर के बच्चों में बड़े पैमाने पर ओरल हेल्थ की समस्याएं देखी गईं, जो इस प्रकार थे: पूर्वी भारत (89%), पश्चिम भारत (88%), उत्तर भारत (85%) और दक्षिण भारत (64%) था.

वहीं सर्वे के एक और निष्कर्ष के अनुसार, बच्चों के दांतों के सेहत की वास्तविक स्थिति और उनके ओरल हेल्थ स्थिति के बारे में उनके मां-बाप की धारणा में काफी अंतर था. यह स्पष्ट अंतर असल में बच्चों के ओरल हेल्थ के बारे में अभिभावकों की जागरूकता में कमी की वजह से है.

Advertisement

सर्वेक्षण में शामिल 10 में से कम से कम 8 माता-पिता ने माना कि उनके बच्चों के दांत स्वस्थ हैं, जबकि दातों की जांच करने पर पाया गया कि उनमें से 80%  बच्चे कम से कम एक ओरल हेल्थ समस्या से पीड़ित हैं. बच्चों के मौजूदा ओरल हेल्थ की वास्तविकता और अभि‍भावकों की धारणा में अंतर कोलकाता (92%),  इसके बाद मुंबई (88%) और हैदराबाद (80%) में सबसे प्रमुख है.

अध्ययन में पाया गया है कि भारत में ज्यादातर बच्चे मुख संबंधी सेहत के लिए अपनाए जाने वाले नियमों का पालन नहीं करते, जैसे रोज ब्रश करना और समय-समय पर दातों की जांच करवाना आदि. सर्वेक्षण में शामिल 70% से अधिक बच्चे दिन में दो बार अपने दातों पर ब्रश नहीं करते हैं और उनमें से 60% से अधिक बच्चे पिछले एक साल में किसी डेंटिस्ट के पास नहीं गए हैं.

इसके अलावा, सर्वेक्षण में बताया गया है कि रोजाना मीठे उत्पादों का सेवन करने वाले 10 में से 8 बच्चे ओरल हेल्थ संबंधी समस्याओं से पीड़ित हैं. सर्वे में शामिल लगभग 44% बच्चों को दातों में सुधार, रूट कैनाल, दांत निकलवाने जैसे प्रमुख दंत उपचार की आवश्यकता है.

द इंडियन सोसाइटी ऑफ पेडोडोंटिक्स ऐंड प्रिवेंटिव डेंटिस्ट्री (आईएसपीपीडी) की सदस्य डॉ. मीनाक्षी एस खेर का कहना है, 'ज्यादातर माता-पिता यह नहीं जानते हैं कि बच्चे के दूध के दांतों की भी देखभाल करने की आवश्यकता होती है, मुंह में ऐसे दांत निकलने के समय से ही.

Advertisement

इन दातों का बच्चों के समग्र विकास में काफी योगदान होता है, ये बच्चे को पौष्टिंक भोजन चबाने में मदद करते हैं और साथ ही उनके जबड़ों के पर्याप्त विकास को भी बढ़ावा देते हैं. यह मजबूत स्थायी दांतों और स्वस्थ मुस्कान की नींव रखता है. बच्चों में कैविटीज और ओरल हेल्थ समस्या ज्यादा होने की वजह दूध के दांतों की खराब देखभाल ही है.'

इंडियन एसोसिएशन ऑफ पब्लिक हेल्थ डेंटिस्ट्री (IAPHD) के अध्यक्ष डॉ वी. गोपीकृष्ण ने सर्वे में सामने आये खुलासों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, ' यह अध्ययन देश में ओरल हेल्थ की स्थिति पर प्रकाश डालता है,  जिसको लेकर तत्काल जागरूकता फैलाने की जरूरत है.

कई अन्य वैज्ञानिक अध्ययनों में भी सामने आया है कि कई अन्य स्वास्थ्य दशाओं जैसे मधुमेह, बच्चे का जन्म से कम वजन होना और एथेरोस्क्लेरोसिस का भी कोई न कोई संबंध खराब ओरल हेल्थ से है. हमें यह याद रखना चाहिए कि दंत रोगों की सही तरीके से देखभाल और अच्छे ओरल हेल्थ से दांत मजबूत रहते हैं जिससे किसी व्यक्ति की समूची सेहत दुरुस्त रह सकती है.

KANTAR IMRB ने भारत के 12 शहरों में विभिन्न सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से संबंधित 2,030 वयस्कों और 1,080 बच्चों के बीच ये सर्वेक्षण किया था, जिनमें दिल्ली, चंडीगढ़, लखनऊ, मुंबई, अहमदाबाद, पुणे, हैदराबाद, चेन्नई, बेंगलुरु, कोलकाता, भुवनेश्वर और पटना आदि शामिल हैं. प्रत्येक शहर में दो दंत चिकित्सकों और केंटार आईएमआरबी के प्रतिनिधियों के साथ आयोजित कोलगेट डेंटल कैम्प में यह स्टडी की गई थी.

Advertisement

हर शिविर में KANTAR IMRB प्रतिनिधियों ने लोगों का उनके ओरल हेल्थ को लेकर पूछताछ की और फिर इसके आधार पर एक डेंटिस्ट को दातों की व्यापक तौर पर जांच करने को कहा गया. आखिर में लोगों को उनके ओरल हेल्थ का विवरण देने वाला एक डेंटल कार्ड भी प्रदान किया गया था.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement