नई कार क्या होती है? आप कहेंगे कि वह आपकी लाइफ को आसान कर देती है. लेकिन क्या सचमुच इतना ही है? सच्चाई यह है कि हमारे देश के किसी घर में जब नई कार आती है तो खुशियां लाती है, प्यार लाती है. किसी के सपने पूरे होते हैं, बच्चों की खुशियां फव्वारे जैसी फूट पड़ती है, बड़े बुजुर्गों की दबी ख्वाहिशों को भी पंख लगते हैं. पड़ोस में मिठाइयां बंटती हैं. मोहल्ले में आपको आपके नाम से ही नहीं बल्कि फला गाड़ी वाले भाई साहब के नाम से भी लोग जानने लगते हैं. और तो और आपके बेटे का दोस्त, बिटिया की सहेलियां और पड़ोस के शर्मा जी भी गाड़ी के जश्न में आपके साथ झूम उठते हैं.
सचमुच, हमारे यहां नई कार का घर आना भी एक त्योहार जैसा ही पल होता है. इसमें सिर्फ मंदिर ले जाकर पंडित जी द्वारा लगाया जाने वाला टीका ही नहीं दिखाई देता है, फ्रेश फूलों की खुशबू से उसका जो वेलकम होता है, उससे बल्कि कई रिश्ते भी जुड़ते हैं. जब एक कार खरीदने वाला पहली बार अपनी नई कार को छूता है, उसी समय उसका उस कार संग एक रिश्ता जुड़ जाता है. ये अपनेपन वाली फीलिंग हर लम्हे के साथ-साथ और भी मजबूत होती चली जाती है.
भारत में एक नई कार खरीदना एक बड़ा उत्सव होता है. देश के परिवारों में नई कार का घर आना जश्न तो पैदा करता ही है, साथ में इस जश्न में पूरे परिवार को एक साथ भी ला देता है. मारुति सुजुकी एरिना का नया विज्ञापन देश के परिवारों के इसी 'त्योहार' पर फोकस कर रहा है. इस विज्ञापन में नई कार की खुशी को बेहद ही शानदार ढंग से दिखाया गया है. नई कार पर कोई बच्चा कैसे खुशी जाहिर करता है उसकी एकदम सटीक तस्वीर इसमें दिखाई गई है. ये विज्ञापन तब दिल में उतर जाता है जब हंसी खुशी के रास्ते, कुछ गुदगुदाते और ढेर सारे खिलखिलाते चेहरों के साथ ये आपको एक कभी न भूलने वाला अहसास भी दे देता है.
ये विज्ञापन देखकर आपको ऐसा लगेगा कि जैसे ये आपके घर की ही कहानी है. वो लड़की गुन्नू आपकी ही कोई रिलेटिव है और वो साहबजादा, शायद आपका बेटा हो... बच्चे के खुले कपड़े तो शायद आपको अपने बचपन की ही याद दिला दें. वाह! कमाल का विज्ञापन है ये जो अपने पीछे भारत के परिवारों की असली कहानी को छोड़कर चला जाता है.
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