तकिया नहीं बैक्टीरिया-फंगस की फैक्ट्री...हर महीने जमा होती है हथेली बराबर डेड स्किन! 3 डॉक्टर्स ने बताया गंदा पिलो कितना खतरनाक

Sleeping on dead skin or pillow: बेंगलुरु, जयपुर और दिल्ली के 3 डॉक्टर्स ने Aajtak.in को तकिये और तकिये के कवर की हाइजीन को लेकर 10 सवालों के जवाब दिए जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं.

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साफ दिखने वाले तकिये में भी लाखों बैक्टीरिया होते हैं. (Image credit: AI Generated)) साफ दिखने वाले तकिये में भी लाखों बैक्टीरिया होते हैं. (Image credit: AI Generated))

मृदुल राजपूत

  • नई दिल्ली,
  • 13 अगस्त 2025,
  • अपडेटेड 12:21 PM IST

Sleeping on dead skin or pillow: चैन की नींद के लिए इंसान को चाहिए कंफर्टेबल बिस्तर और एक नरम-नरम तकिया...लेकिन क्या होगा जब आपका ये आराम ही आपके लिए मुसीबत बन जाए? जी हां, हम बात कर रहे हैं आपके तकिये और तकिये के कवर की. तकिये के कवर न केवल तकिये को गंदगी, पसीने और धूल से बचाते हैं साथ ही साथ यह तकिये को जल्दी-जल्दी गंदा होने से भी रोकता है, जिससे उसमें धूल, एलर्जी और कीटाणु नहीं पनपते. लेकिन क्या आप जानते हैं कि तकिये के कवर पर एक टॉयलेट सीट से भी अधिक बैक्टीरिया, वायरस और कवक पाए जाते हैं?

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शायद आपमें से कई लोगों को ये बात जानकर हैरानी होगी लेकिन ये बात बिल्कुल सही है. अब ऐसे में सभी को तकिये के कवर के बारे में बेसिक जानकारी जरूर होनी चाहिए ताकि समय रहते आप उसे चेंज कर सकें और बैक्टीरिया के कारण होने वाली गंभीर बीमारियों से बच सकें.

तकिये और तकिये के कवर की हाइजीन कैसे मेंटेन करें, अधिक समय तक तकिये का कवर ना बदलने से कौन सी समस्याएं, हो सकती हैं, इस बारे में जानने के लिए हमने बेंगलुरु, जयपुर और दिल्ली के 3 डॉक्टर्स से बात की और उन्होंने Aajtak.in को तकिये और तकिये के कवर की हाइजीन को लेकर 10 सवालों के जवाब दिए जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह स्वास्थ्य के लिहाज से बहुत अहम हो सकते हैं. लेकिन आइए पहले आपका साफ दिखने वाला तकिया कितना गंदा होता है, इस बारे में जान लीजिए.

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साफ दिखने वाला तकिया कितना गंदा हो सकता है?

(Image Credit: AI Generated)

हम अपनी चादरों और तकियों पर अपने दैनिक जीवन का एक तिहाई हिस्सा बिताते हैं. नेशनल स्लीप फाउंडेशन, एनवायरमेंट हेल्थ पर्सपेक्टिव 2018 के मुताबिक, तकिये और चादरें, हमारी मृत त्वचा कोशिकाओं के जुड़ने का मुख्य स्थान होते हैं क्योंकि हम रोजाना रात भर एक ही बिस्तर पर सोते रहते हैं.

जर्नल एनवायरमेंटल एंड टेक्नोलॉजी में 2011 में पब्लिश हुई स्टडी के मुताबिक, इंसान के शरीर से हर घंटे 0.03 से 0.09 ग्राम डेड स्किन सेल्स निकलते हैं. सुनने में यह लगभग नगण्य लगता है, लेकिन जीवन भर में यह लगभग 35 किलोग्राम, यानी आपके शरीर के वज़न का लगभग आधा हो जाता है. इन डेड स्किन सेल्स का अधिकांश भाग छोटे-छोटे कणों के रूप में होता है जो घर की धूल के रूप में भी निकलता है.

इंसान के शरीर से एक दिन में 50 करोड़ डेड स्किन सेल्स गिरते हैं. 2013 में अमेरिकी बिस्तर बनाने वाली कंपनी अमेरीस्लीप ने दावा किया कि उन्होंने एक ऐसे तकिये के कवर से स्वाब लिए जो एक हफ्ते से धुला नहीं था. उस तकिये के कवर में प्रति वर्ग इंच लगभग 30 लाख बैक्टीरिया थे यानी एक औसत टॉयलेट की सीट से लगभग 17,000 गुना अधिक.

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हॉवर्ड हेल्थ पब्लिशिंग के मुताबिक, इंसान के शरीर से रोजाना लगभग 30,000 से 40,000 मृत त्वचा कोशिकाएं निकलती हैं और इनका करीब 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा बिस्तर की सतह पर जमा होता है. अंदाजा लगाया जाए तो ऐसे में इंसान 1 महीने में करीब 12 लाख डेड स्किन सेल्स रिलीज करता है. पूरे शरीर की स्किन का कुल क्षेत्रफल लगभग 1.5 से 2 वर्ग मीटर होता है और इस दृष्टि से इंसानी शरीर में कुल लगभग 1600 अरब स्किन सेल्स होंगे. अब अगर आप महीने भर तकिये का कवर नहीं बदलते तो आप अपने हथेली के बराबर डेड स्किन पर सोते हैं.

आइए अब तकिये के कवर से संबंधित वो सवाल भी जान लीजिए जो हर किसी को जानना काफी जरूरी हैं.

1. क्या तकिया या तकिये के कवर हमारे चेहरे पर मुंहासों और एलर्जी का एक प्रमुख कारण हो सकते है?

बेंगलुरु के फोर्टिस हॉस्पिटल में कंसल्टेंट डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. रश्मि श्रीराम (Dr Rashmi Sriram) ने Aajtak.in को बताया, 'हां, अगर तकिये साफ न हों, तो वे मुंहासों और एलर्जी जैसी त्वचा संबंधी समस्याओं को बार-बार जन्म देते हैं. दरअसल, तकिये के कवर पर जब आप चेहरा रखकर सोते हैं तो उनमें तेल, डेड स्किन, पसीना और समय के साथ जमा हुए कीटाणु होते हैं जो बैक्टीरिया के लिए प्रजनन स्थल बनाते हैं. ये रोगाणु चेहरे के रोमछिद्रों को बंद कर देते हैं और मुंहासों को बढ़ावा देते हैं. गंदे तकिये के कवर से रैशेज या दाने भी हो सकते हैं.'

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2. एक ही तकिये का कितने दिनों तक इस्तेमाल करने से उसमें फंगस या बैक्टीरिया पनप सकते हैं और क्या इससे फेफड़ों में संक्रमण हो सकता है?

'तकिये पर फंगस और बैक्टीरिया 7-10 दिनों में ही पनपने लग सकते हैं. जिन लोगों को सोते समय अधिक पसीना आता है मुंह से लार आती है, उन लोगों के तकिये में ये चांस अधिक होता है. जैसे-जैसे तकिये के कवर पर सूक्ष्मजीवी इकट्ठे होते जाते हैं, यह और भी गंभीर समस्या पैदा कर सकता है.'

3. क्या तकिये पर उतनी ही डेड स्किन जमा होती है जितनी इंसानी हथेली पर होती है?

डॉ. रश्मि ने कहा, 'यह बिल्कुल सही है. मानव शरीर में औसतन एक दिन में लाखों डेड स्किन सेल्स जमा हो जाती हैं और जब आप तकिये पर सोते हैं तो उनका काफी सारा हिस्सा तकिये के कवर पर जमा हो जाता है. अब यदि कोई एक महीने तक तकिये का कवर नहीं धोता है तो मानकर चलिए उसके तकिये पर किसी इंसान के हथेली एक महीने में, यह मृत त्वचा शरीर के एक छोटे से हिस्से, जैसे हथेली, के बराबर हो सकती है.'

'तकिया और तकिये के कवर हर रात हमारे चेहरे और बालों से पसीना, तेल, लार और त्वचा कोशिकाओं को सोख लेते हैं. समय के साथ, अगर इन्हें नियमित रूप से साफ नहीं किया जाता तो उन पर डेड स्किन सेल्स जमा होते जाते हैं.'

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4. तकिये के कवर को कब धोना चाहिए और तकिया कब बदलना चाहिए?

'हर 3-4 दिन में तकिये के कवर को धो लेना चाहिए ताकि हाइजीन मेंटेन रहे. लेकिन सिर्फ इतना ही काफी नहीं है. कवर के अंदर का तकिया भी समय के साथ पसीना, तेल और धूल सोख लेता है इसलिए इसे हर 3-6 महीने में धोना चाहिए (अगर धोने योग्य हो) या हर 1 साल में बदल लेना चाहिए.'

5. क्या गंदा तकिया डिप्रेशन, माइग्रेन या त्वचा रोग का कारण बनता है?

डॉ. रश्मि ने कहा, 'हां, तकिये नींद की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं. एक पुराना और अनकंफर्टेबल तकिया गर्दन में खिंचाव पैदा कर सकता है और नींद में खलल डाल सकता है, जबकि एक गंदा तकिया एलर्जी, त्वचा की समस्याओं या साइनस की समस्याओं को बढ़ा सकता है. ऐसी परेशानियों से नींद खराब होने से समय के साथ थकान, मूड स्विंग और यहां तक कि डिप्रेशन के लक्षण भी हो सकते हैं. इसके अलावा, सिर को उचित सहारा न मिलने या तकिये में मौजूद एलर्जी के कारण माइग्रेन हो सकता है.'

'दरअसल, मृत त्वचा कोशिकाओं से भरे तकियों में धूल के कण भी होते हैं. ये अपशिष्ट कण एलर्जी पैदा करते हैं और अस्थमा, साइनसाइटिस या एलर्जिक राइनाइटिस जैसी श्वसन संबंधी समस्याओं को ट्रिगर कर सकते हैं या उन्हें और भी बदतर बना सकते हैं. इसके लक्षणों में छींक आना, नाक बंद होना, खांसी और सांस लेने में कठिनाई शामिल हैं. इसके लिए एलर्जी-रोधी कवर का उपयोग करना, बिस्तर को गर्म पानी में धोना, तथा पुराने तकियों को बदलना धूल के कणों के संपर्क को काफी हद तक कम कर सकता है तथा श्वसन संबंधी बीमारियों को रोक सकता है.'

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6. क्या गंदा तकिया हमारे बालों के झड़ने की भी एक वजह हो सकता है?

जयपुर के अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल में इंफेक्शन डिसीज एवं इंटरनल मेडिसिन कंसल्टेंट डॉ. रोहित शर्मा ने बताया, 'बिल्कुल, गंदा तकिया हमारे बालों के झड़ने को इन डायरेक्ट रूप से प्रभावित कर सकता है. दरअसल, गंदे तकिये के कवर में धूल के कण, नमी, हेयर ऑइल्स इकट्ठा रहते हैं. जब आप सोते हैं तो हेयर फॉलिकल में चले जाते हैं और उनकी पकड़ को कमजोर कर सकते हैं जिसकी वजह से आपको हेयर फॉलिकल हेयर फॉल हो सकता है.'

7. यदि तकिया कवर को काफी दिन तक नहीं बदलते हैं तो शरीर पर इसका क्या असर हो सकता है?

वैसे तो ऐसा नहीं करना चाहिए लेकिन यदि कोई काफी दिन तक तकिये के कवर नहीं बदलता है तो आप देखेंगे कि तकिये के कवर के ऊपर लगातार धूल, बैक्टीरिया, डेड स्किन सेल, फंगल और कीटाणु जमते जाएंगे और सबसे पहले स्किन में खुजली शुरू होगी. खुजली वाली जगह को रब करने से स्किन की परत निकल सकती है और बैक्टीरिया अंदर स्किन में प्रवेश कर सकते हैं. इसके अलावा यदि बैक्टीरिया सांस से नाक में चले जाते हैं तो श्वसन संबंधी समस्याएं भी शुरू हो सकती हैं.

8. क्या गंदा तकिया हमारे बालों के झड़ने की भी एक वजह हो सकता है?

दिल्ली के डर्मेटोलॉजिस्ट और हेयर ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. गौरांग कृष्णा ने Aajtak.in को बताया, 'गंदे तकिये कवर को इस्तेमाल करने से प्रॉब्लम ये होती है कि गंदे तकिये के कवर से हमारे स्कैल्प की स्किन पर इंफेक्शन आ सकता है. ये बैक्टीरियल इंफेक्शन या फंगल इंफेक्शन दोनों हो सकता है. फंगल इंफेक्शन से डैंड्रफ बढ़ता है और डैंड्रफ से बाल झड़ते हैं. हेयर रूट डैमज नहीं होते लेकिन इससे बाल झड़ सकते हैं जिससे धीरे-धीरे आपके सिर पर बाल कम हो सकते हैं. बैक्टीरियल इंफेक्शन से अंदर डीप सीटेड रूट का इंफेक्शन हो सकता है जिससे परमानेंट रूट्स को डैमेज भी हो सकता है. तो जहां तक हो सके हमें साफ तकिये का इस्तेमाल करना चाहिए.'

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9.क्या फोन की स्क्रीन जितनी गंदगी तकिये में भी होती है? क्या दोनों में बैक्टीरिया का स्तर बराबर हो सकता है या ज्यादा?

डॉ. रोहित ने कहा, 'बिल्कुल सही बात है. फोन की स्क्रीन से भी अधिक गंदगी तकिया कवर में होती है. बैक्टीरिया का जो स्तर होता है वो पिलो में अधिक होता है. इसका कारण है कि तकिये और तकिये के कवर में डेड स्किन सेल्स होते हैं और रीजन इनका वही है क्योंकि गंदे तकिये में डेड स्किन सेल्स होते हैं, सलाइवा होता है और साथ में धूल और पसीना भी मौजूद होता है. ये सभी एक फेवरेबल ग्रोथ प्रोवाइड करते हैं, बैक्टीरिया की ग्रोथ के लिए.'

10. क्या हमारे तकिये हर रात 100 मिलीमीटर से भी अधिक पसीना सोखते हैं और क्या यही बैक्टीरिया-फंगस का घर बनता है?

एक आम इंसान हर समय पसीना रिलीज करता है. जब आप सोते हैं तो आप कम से कम 100 मिलीमीटर से भी अधिक पसीना रिलीज करते हैं और वो पसीना तकिये में जाता है. यही पसीना आगे चलकर नमी का कारण बनता है और आगे चल करके बैक्टीरिया और फंगस का घर बनता है.

अब आप समझ ही गए होंगे कि तकिया और तकिये के कवर को न बदलना कितना खतरनाक हो सकता है. इसलिए हमेशा डॉक्टर के बताए हुए समय पर अपना तकिया और तकिये के कवर को बदलते रहें.

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