गृह मंत्री अमित शाह ने 22 मार्च, 2023 को कुपवाड़ा, जम्मू कश्मीर के टीटवाल गांव में शारदा माता के मंदिर का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उद्घाटन किया . पाकिस्तान के साथ लगी नियंत्रण रेखा से महज 500 मीटर की दूरी पर स्थित ये मंदिर हिंदुओं के पवित्र तीर्थ शारदा पीठ से संबंधित है जो इस वक्त पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में है.
इसी बीच सोशल मीडिया पर इस मंदिर के निर्माण के सिलसिले में दो तस्वीरों का एक कोलाज वायरल हो रहा है. कुछ लोग ऐसा कह रहे हैं कि मोदी सरकार ने मां शारदा के टूटे–फूटे मंदिर का जीर्णोद्धार कर दिया है.
इस कोलाज में एक ओर जीर्ण-शीर्ण हो चुके एक मंदिर की तस्वीर है और दूसरी ओर एक नए मंदिर की तस्वीर है. कोलाज को देखकर लग सकता है कि सरकार ने बाईं तरफ दिख रहे पुराने मंदिर को ही फिर से बनवाया है.
इस कोलाज को शेयर करते हुए एक ट्विटर यूजर ने लिखा, “दो चित्र पूरी गाथा स्वयं कह रहे कश्मीर में भगवान शंकराचार्य द्वारा स्थापित लगभग २३०० वर्ष प्राचीन शारदा पीठ मन्दिर जहाँ पिछले ७० वर्षों से पूजन नहीं हो पा रहा था और उसे नष्टप्रायः कर दिया गया था. अब Narendra Modi सरकार ने उस मन्दिर का पुनर्निर्माण करवाया है.”
इंडिया टुडे फैक्ट चेक ने पाया कि वायरल हो रहे कोलाज में जिस टूटे-फूटे मंदिर की तस्वीर है वो शारदा पीठ है जो भारत नहीं बल्कि पाक अधिकृत कश्मीर में स्थित है. वहीं, भारत सरकार ने जिस नए मंदिर का निर्माण करवाया है वो कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के टीटवाल गांव में स्थित है.
कैसे पता लगाई सच्चाई?
मां शारदा पीठ का हिंदू धर्म में बेहद अहम स्थान है. इसे 18 शक्ति पीठों में से एक माना जाता है. देश की आजादी के बाद साल 1947 में जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तान की ओर से हुए कबाइली हमले के बाद शारदा पीठ PoK का हिस्सा बन गई थी.
हमें शारदा पीठ से जुड़ी ऐसी कई मीडिया रिपोर्ट्स मिलीं जिनमें
टूटे मंदिर वाली उसी तस्वीर का इस्तेमाल किया गया है जो वायरल कोलाज में शामिल है.
स्टॉक फोटोग्राफी की वेबसाइट ‘alamy.com’ में भी इस तस्वीर को PoK का बताया गया है.
हमने गूगल मैप की मदद से PoK स्थित शारदा पीठ और कुपवाड़ा में बनाए गए शारदा माता के मंदिर की लोकेशन जांची तो दोनों जगहों का अंतर साफ दिखाई दिया.
नियंत्रण रेखा यानी LoC के दोनों ओर स्थित इन धार्मिक स्थलों के बीच अगर सीधी रेखा भी खींची जाए तो भी इनके बीच लगभग 57 किलोमीटर की दूरी है.
शारदा पीठ कहां है और शारदा माता का मंदिर कहां बनाया गया है, इसे समझने के लिए गूगल अर्थ स्टूडियो की मदद से बनाया ये एनिमेशन देखा जा सकता है.
कुपवाड़ा में शारदा माता के मंदिर का निर्माण कार्य 2022 में शुरू हुआ था. इस मंदिर को बनवाने में कर्नाटक के श्रंगेरी मठ ने अहम भूमिका निभाई है.
कश्मीरी का एक संगठन ‘Save Sharda Committee’ यानी SSC लंबे वक्त से इस मंदिर के निर्माण की मांग कर रहा था.
हमने SSC के फाउंडर रवींद्र पंडिता से भी बात की. उनका कहना है कि 1948 के बाद से कश्मीर के एक हिस्से पर पाकिस्तान का कब्जा होने के बाद कश्मीरियों का शारदा पीठ के दर्शन के लिए जाना बंद हो गया. वो कहते हैं, “अपनी परंपरा को बचाए रखने के लिए हम कई सालों से मां शारदा के मंदिर के निर्माण की मांग कर रहे थे.”
उन्होंने बताया कि टीटवाल गांव में जिस जगह शारदा माता के मंदिर का निर्माण हुआ है, उस जगह को 1948 से पहले शारदा पीठ की यात्रा के लिए बेस कैंप के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था और वहीं से छड़ी मुबारक यात्रा शुरू होती थी.
उन्होंने कहा, “पहले इस जगह पर एक गुरुद्वारा भी हुआ करता था. शारदा माता के मंदिर के साथ-साथ एक गुरुद्वारे का निर्माण भी किया गया है.”
रवींद्र पंडिता ने हमें कुछ तस्वीरें भी भेजीं जिनमें मंदिर के साथ नवनिर्मित गुरुद्वारा भी नजर आ रहा है.
क्यों अहम है शारदा पीठ?
शारदा माता को विद्या की देवी सरस्वती का रूप माना जाता है. कहा जाता है कि शारदा पीठ का निर्माण कुषाण वंश के शासकों ने पहली शताब्दी में करवाया था. आगे चलकर ये पीठ शिक्षा का एक बड़ा केंद्र बन गई. आदि शंकराचार्य और कल्हण जैसे लोगों ने यहां शिक्षा हासिल की थी.
22 मार्च को शारदा माता के मंदिर के उद्घाटन के मौके पर अमित शाह ने कहा कि सरकार श्रद्धालुओं के हित में करतारपुर साहिब कॉरिडोर की तर्ज पर शारदा पीठ कॉरिडोर खुलवाने पर विचार कर रही है. अगर ऐसा होता है तो भारत के श्रद्धालुओं को नियंत्रण रेखा पार करके PoK पहुंच कर शारदा पीठ के दर्शन करने में आसानी हो जाएगी.
सुमित कुमार दुबे