फैक्ट चेक: केरल में आरएसएस कार्यकर्ताओं को बांधकर घुमाने के वीडियो की ये है सच्चाई

केरल के इस तनावपूर्ण सियासी माहौल के बीच सोशल मीडिया पर एक छोटा सा वीडियो वायरल हो रहा है. वीडियो में दिख रहा है कि आरएसएस के यूनिफॉर्म में दो लोगों के हाथ बांधकर मुस्लिमों का एक समूह उन्हें सड़क पर घुमा रहा है. वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि केरल के मुस्लिम बहुल मलप्पुरम जिले में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के कार्यकर्ताओं ने आरएसएस के कार्यकर्ताओं को जंजीर और रस्सी में बांधकर सड़क पर मार्च निकाला.

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आजतक फैक्ट चेक

दावा
वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे केरल में पीएफआई के कार्यकर्ता आरएसएस के कार्यकर्ताओं को बांधकर सड़क पर घुमा रहे हैं.
सच्चाई
वायरल वीडियो पॉपुलर फ्रंट डे 2021 के मौके पर आयोजित एक नाटकीय प्रदर्शन का है जिसे पीएफआई के कार्यकर्ताओं ने आयोजित किया था. वीडियो में यूनिफॉर्म पहने लोगों समेत जो भी दिख रहे हैं, वे सब लोग पीएफआई के सदस्य हैं.

धीष्मा पुज़क्कल

  • नई दिल्ली,
  • 20 फरवरी 2021,
  • अपडेटेड 9:09 PM IST

केरल में होने जा रहे विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक सरगर्मियां काफी बढ़ गई हैं. बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) वाम दलों से उनका आखिरी किला छीनने के लिए पुरजोर तैयारियों में लगे हैं. दूसरी ओर केरल की हिंसक राजनीतिक लड़ाई में पिछले कई वर्षों के दौरान आरएसएस के कई कार्यकर्ता अपनी जान भी गंवा चुके हैं. 

पिछले साल आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने रिटायर्ड प्रोफेसर एकेएम दास की लिखी किताब "आरएसएस इन केरला: ए सागा ऑफ स्ट्रगल" का लोकापर्ण किया था. इस किताब के मुताबिक, केरल में 1969 से ले​कर अब तक आरएसएस के 270 स्वयंसेवक और समर्थक अपनी जान गंवा चुके हैं. 

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केरल के इस तनावपूर्ण सियासी माहौल के बीच सोशल मीडिया पर एक छोटा सा वीडियो वायरल हो रहा है. वीडियो में दिख रहा है कि आरएसएस के यूनिफॉर्म में दो लोगों के हाथ बांधकर मुस्लिमों का एक समूह उन्हें सड़क पर घुमा रहा है. वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि केरल के मुस्लिम बहुल मलप्पुरम जिले में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के कार्यकर्ताओं ने आरएसएस के कार्यकर्ताओं को जंजीर और रस्सी में बांधकर सड़क पर मार्च निकाला.

वीडियो में देखा जा सकता है कि दो और लोगों के हाथ बंधे हुए हैं जो ब्रिटिश काल के यूनिफॉर्म पहने हुए हैं. उन्हें सड़क पर घुमाने वाले लोग पारंपरिक मुस्लि‍म पोशाक में हैं और पीएफआई के झंडे लिए हुए हैं.

कई सोशल मीडिया यूजर इस वीडियो की निंदा कर रहे हैं. खासकर इसलिए क्योंकि पीएफआई की पहचान एक कट्टरपंथी संगठन की है और ये संगठन कई बार खुफिया एजेंसियों के निशाने पर भी रह चुका है. इस संगठन को प्र​तिबंधित करने की भी मांग उठती रही है. इन विवादों के बावजूद, केरल में पीएफआई एक मजबूत संगठन है.

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वीडियो के साथ हिंदी में लिखा है, “केरल के चेलारी में PFI की रैली... यहां ला-इलाह-इल्लाह के नारे लग रहे हैं... और कुछ RSS कार्यकर्ताओं को ज़ंजीरों और रस्सियों से बांधा गया है, सरेआम सड़क पर उन्हें जानवरों की तरह हांका जा रहा है! ISIS के स्टाइल में इन युवकों को बांधकर सड़क पर इनका जुलूस निकाला जा रहा है...! आखिर केरल सरकार द्वारा PFI द्वारा इस नफरत मार्च को कैसे अनुमति दी गई?”

इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि वीडियो के साथ किया जा रहा दावा भ्रामक है. यह वीडियो एक नाटकीय झांकी का है, जो पॉपुलर फ्रंट के स्थापना दिवस (2021) के मौके पर आयोजित किया गया था. वीडियो में दिख रहे सभी लोग पीएफआई के कार्यकर्ता हैं. आरएसएस के वर्दी में जो लोग मार्च में शामिल हैं, वे भी पीएफआई के कार्यकर्ता हैं.

कुछ वायरल पोस्ट के आर्काइव यहां, यहां और यहां देखे जा सकते हैं.   

AFWA की पड़ताल
अगर पीएफआई के सदस्य आरएसएस के कार्यकर्ताओं को सड़कों पर घसीटते हुए मार्च निकालते तो ये घटना निश्चित तौर पर मीडिया की सुर्खियां बनती. लेकिन मीडिया में, यहां तक कि केरल के स्थानीय मीडिया में हाल-फिलहाल में ऐसी कोई घटना सामने नहीं आई है. वायरल वीडियो को गौर से देखने पर समझ में आता है कि वीडियो के बैकग्राउंड में एक बि‍ल्डिंग दिख रही है जिस पर “चेलारी ट्रेडिंग्स” लिखा हुआ है.

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गूगल पर चेलारी ट्रेडिंग्स सर्च करने पर पता चला कि वीडियो में जो बिल्डिंग दिख रही है, वह केरल के मलप्पुरम जिले के चेलारी में है. इस बिल्डिंग की गूगल मैप इमेज यहां देखी जा सकती है.

इसके बाद हमने तेनीपालम पुलिस स्टेशन पर संपर्क किया जिसके इलाके में चेलारी पड़ता है. इंस्पेक्टर लालू वीएस ने इस बात की पु‍ष्टि की कि वीडियो के साथ किया जा रहा दावा भ्रामक है.

इंस्पेक्टर लालू ने कहा, “17 फरवरी को पीएफआई ने अपनी सालगिरह पर एक मार्च आयोजित किया था. ये मार्च शांतिपूर्ण था और इस दौरान हिंसा की कोई घटना दर्ज नहीं हुई. जो वीडियो वायरल है वह मार्च के दौरान आयोजित एक प्रदर्शन था. हाल-फिलहाल में आरएसएस कार्यकर्ताओं पर पीएफआई के सदस्यों ने कोई हमला किया हो, हमें ऐसी किसी घटना की जानकारी नहीं है.”

इस बारे में और ज्यादा पुख्ता जानकारी के लिए हमने केरल के आरएसएस कार्यालय में संपर्क किया. संघ की केरल यूनिट के ज्वांइट सेक्रेटरी राधाकृष्णन एम ने हमें बताया कि आरएसएस के कार्यकर्ताओं के साथ ऐसी कोई घटना नहीं हुई है, जैसा वीडियो में दिख रहा है.

राधाकृष्णन ने कहा, “सोशल मीडिया पोस्ट में जैसा कहा जा रहा है, वैसी कोई घटना सामने नहीं आई है.  वायरल वीडियो में जैसा दिख रहा है, उस तरह से अगर पीएफआई ने हमारे सदस्यों को जबरन मार्च कराया होता तो निश्चित रूप से हम इस पर प्रतिक्रिया देते. वीडियो में दिख रहे लोग आरएसएस के सदस्य नहीं हैं. ये पीएफआई का ही कोई प्रदर्शन होगा.”

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इसके बाद AFWA ने केरल में पीएफआई के नेताओं से संपर्क किया. संगठन के केरल प्रवक्ता सुधीर ने हमें बताया कि वायरल वीडियो पॉपुलर फ्रंट डे 2021 के मौके पर आयोजित एक मार्च का है जिसमें एक झांकी प्रदर्श‍ित की गई थी. वीडियो में दिख रहे सभी लोग पीएफआई के सदस्य हैं. जो लोग आरएसएस के यूनिफॉर्म में हैं वे भी पीएफआई के हैं.

सुधीर ने कहा, “ये वीडियो 17 फरवरी को पॉपुलर फ्रंट डे 2021 के मौके पर मलप्पुरम में आयोजित यूनिटी मार्च का है. ये पीएफआई का एक नाटकीय प्रदर्शन था जिसमें कुछ लोग आरएसएस कार्यकर्ता बने थे.” उन्होंने हमें एक वीडियो भी भेजा जिसमें पीएफआई के नेशनल जनरल सेक्रेटरी अनीस अहमद बता रहे हैं कि इस पेशकश के पीछे का आईडिया क्या था.

वीडियो में अनीस कह रहे हैं, “इस खास नाटक में 1921 में अंग्रेजों और मालाबार के लोगों के बीच लड़ाई को दिखाया गया था. मालाबार के लोग हर साल इसे मनाते हैं. वीडियो में जो दिख रहा है, उसके पीछे का विचार ये है कि मालाबार के लोगों ने 1921 में अंग्रेजों के बाहरी खतरे से लड़ने में अहम भूमिका अदा की थी, और अब जब आरएसएस फासीवाद के आंतरिक खतरे को थोप रहा है तो भी मालाबार के लोग उनका सामना करेंगे और देश की रक्षा करेंगे.”

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हमें “टाइम्स नाउ” की एक रिपोर्ट जो इस वीडियो के बारे में है. 19 फरवरी की इस रिपोर्ट में भी कहा गया है कि वीडियो में जो भी दिख रहा है वह पीएफआई के सदस्यों की ओर से खेला गया एक नाटक था.

पड़ताल से साफ है कि वायरल वीडियो में आरएसएस के यूनिफॉर्म में दिख रहे लोग वाकई आरएसएस के कार्यकर्ता नहीं हैं, बल्कि वे पीएफआई के सदस्य हैं जो आरएसएस कार्यकर्ताओं की भूमिका अदा कर रहे हैं.

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