पॉप स्टार रिहाना, पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग और पोर्न स्टार मिया खलीफा के किसान आंदोलन के पक्ष में किए गए ट्वीट्स के बाद कई भारतीय सेलेब्रिटीज ने भी ‘#IndiaAgainstPropaganda’ और ‘#IndiaTogether’ के साथ ट्वीट किए. इन हस्तियों में राज्यसभा सांसद व पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर भी शामिल थे. उन्होंने 3 फरवरी को ट्विटर पर लिखा, “भारत की संप्रभुता से समझौता नहीं किया जा सकता. बाहरी ताकतें दर्शक हो सकती हैं, लेकिन प्रतिभागी नहीं. भारतीय नागरिक भारत के बारे में जानते हैं और भारत से जुड़े निर्णय उन्हें ही लेने चाहिए. हमें एक राष्ट्र के तौर पर एकता बनाए रखनी चाहिए.”
सचिन के इस ट्वीट के समर्थन में जहां कुछ लोगों ने ‘#IstandwithSachin’ हैशटैग ट्रेंड कराया, वहीं कुछ लोगों ने इस ट्वीट के विरोध में उनके घर के बाहर प्रदर्शन किया. केरल में तो यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने उनकी तस्वीर पर कालिख तक पोत दी.
समर्थन और विरोध के इस दौर में अचानक सचिन की फोटो और उनके नाम के साथ एक भावुक कर देने वाली कहानी सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही है. ये कहानी सचिन के एक कथित बयान के रूप में है-
“मैंने जिस दिन चिकन शॉप में मुर्गे को सामने कटते देखा, मेरी अंतरात्मा कांप गई. मैं उस रात सो नही सका. मेरी आँखों के सामने रात भर मेरे बच्चो का चेहरा घूम रहा था. वो जीव भी तो किसी का बच्चा था. मेरे स्वाद के लिए उसे कितनी भयंकर पीड़ा से गुजरना पड़ा. मैंने उसी दिन आजीवन शाकाहारी बनने का संकल्प ले लिया. -सचिन रमेश तेंडुलकर”
एक फेसबुक यूजर ने इस वायरल संदेश को शेयर करते हुए कैप्शन लिखा, “सचिन भाई आपका बहुत-बहुत धन्यवाद.”
इस पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है.
इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि सचिन तेंदुलकर ने शाकाहार अपनाने से जुड़ा कोई भी बयान नहीं दिया है. उनके एक करीबी ने आजतक से बातचीत में इस बात की पुष्टि की है कि वे घोषित तौर पर नॉन वेजिटेरियन हैं.
फेसबुक पर सचिन का ये कथित बयान काफी वायरल है.
एक यूजर ने सचिन के इस कथित बयान पर कमेंट करते हुए लिखा, “महान बल्लेबाज, बेहतरीन इंसान”. एक अन्य यूजर ने लिखा, “शाकाहारी बनो, दयालु हिंदू बनो”.
‘तेज टाइम्स’ नाम की एक वेबसाइट ने भी 31 दिसंबर 2020 को सचिन का ये कथित बयान अपने लेख में शामिल किया था. इस लेख का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है.
क्या है सच्चाई
हमें किसी भी विश्वसनीय न्यूज रिपोर्ट या सचिन तेंदुलकर के सोशल मीडिया अकाउंट्स में उनके शाकाहारी हो जाने जैसा कोई बयान नहीं मिला. अगर उन्होंने सचमुच इस तरह का कोई बयान दिया होता, तो हर जगह इसकी चर्चा होती.
वायरल संदेश के ठीक उलट, हमें सचिन के मांसाहारी होने के कई सबूत मिले.
नॉन वेज के शौकीन हैं तेंदुलकर
सचिन ने 30 अक्टूबर 2020 को इंस्टाग्राम पर सैमन मछली से बने एक व्यंजन की फोटो डाली थी. साथ ही कैप्शन में लिखा था, “सारा ने हमारे लिए बुद्धा बोल बनाया. इसमें मिर्च और शहद के जायके वाली सैमन मछली का जायका था.” सचिन की बेटी का नाम सारा तेंदुलकरहै.
2 जनवरी 2018 के एक दूसरे इंस्टाग्राम वीडियो में सचिन को चिकन पकाते हुए देखा जा सकता है.
‘बॉलीवुड इनसाइट’ के यूट्यूब चैनल पर भी ये वीडियो ‘नए साल पर चिकन पकाते सचिन तेंदुलकर’ कैप्शन के साथ शेयर किया था.
क्रिकेट की मशहूर वेबसाइट ‘क्रिकबज’ पर हमें सचिन का एक इंटरव्यू मिला जिसमें वो बता रहे हैं कि एक बार 1999 के विश्व कप से ठीक पहले किस तरह उनका बहुत मन होने के बावजूद उनके भाई ने उन्हें रेस्टोरेंट में बत्तख का मांस नहीं खाने दिया था. दरअसल उसने कहीं पढ़ा था कि इंग्लैंड के कुछ खिलाडियों ने बत्तख का मांस खाया और इसके बाद वे जल्दी ही आउट हो गए.
‘एनडीटीवी फूड’ ने खाने के शौकीन सचिन के पसंदीदा जायकों पर एक रिपोर्ट छापी थी. रिपोर्ट के अनुसार, पांच चीजें जो उन्हें सबसे ज्यादा पसंद हैं, वे हैं, बैंगन का भर्ता, झींगा मसाला, फिश करी और केकड़े से बने व्यंजन.
सचिन ने सहवाग को सिखाया नॉन वेज खाना
‘क्रिकेटरएडिक्टर’ वेबसाइट के अनुसार, पूर्व क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग को नॉन-वेज का चस्का भी सचिन ने ही लगवाया था. पहले सहवाग को लगता था कि नॉन-वेज खाने से वजन बढ़ता है, पर फिर सचिन ने उनसे कहा कि मैं भी तो नॉन-वेज खाता हूं. क्या मेरा वजन ज्यादा है? इसके बाद से सहवाग भी चिकन खाने लगे थे.
सचिन के एक करीबी ने नाम न छापने की शर्त पर आजतक से बातचीत में इस बात की पुष्टि की कि उनके नाम पर वायरल हो रहा शाकाहारी हो जाने का बयान पूरी तरह बेबुनियाद है और वे मांसाहारी हैं.
वैसे शाकाहारी या मांसाहारी होना व्यक्तिगत पसंद की बात है. कुछ शाकाहारी लोग मांसाहार के लिए जानवरों को मारे जाने को गलत मानते हैं. मांसाहार सही है, या गलत- ये बहस का विषय हो सकता है और हम इस पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहे हैं. हम सिर्फ इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि सचिन के शाकाहार अपना लेने की जो भावुक कहानी सोशल मीडिया पर सुनाई जा रही है, वो पूरी तरह काल्पनिक है.
ज्योति द्विवेदी