कोरोना महामारी और लॉकडाउन के बीच आज तक अपनी ई-एजेंडा कार्यक्रम की तीसरी कड़ी जान भी जहान भी लेकर आया है. आज तक के इस विशेष कार्यक्रम में मोदी सरकार के 17 मंत्रियों ने शिरकत की और वर्तमान में कोरोना से जो परिस्थितियां बदली हैं उन पर चर्चा की और सरकार का एक्शन प्लान साझा किया. उपभोक्ता मामले एवं खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री रामविलास पासवान ने भी अपनी बात रखी.
दिल्ली में राशन उपलब्धता और वितरण में हुई देरी को लेकर केंद्रीय मंत्री पासवान ने कहा कि हमारी सीएम अरविंद केजरीवाल से खुद बातचीत हुई थी. हमने कहा था कि जल्द से जल्द इसे डिस्ट्रिब्यूट कीजिए. इसमें दिक्कत ये हुई थी कि उन्होंने पहले कहा था कि हमको सिर्फ चावल चाहिए. ऐसे चार राज्य थे हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और चंडीगढ़ जिसने कहा था कि हमको गेहूं चाहिए. तो हमने चार राज्यों को गेहूं दिया बाकी राज्यों में चावल भिजवाया था. बाद में दिल्ली सरकार ने कहा कि हमको गेहूं भी चाहिए. हमारे पास अनाज की कोई कमी तो थी नहीं इसलिए हमने आवंटन में फिर संशोधन किया. इसमें जो भी देरी हुई है वो उनके ही कारण हुई है. हमने उनसे बात भी की थी जिसमें उन्होंने वादा किया था कि हम जल्द से जल्द इसका वितरण शुरू करवा रहे हैं.
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पासवान ने बताया वन नेशन वन कार्ड का फायदा
प्रवासी मजदूरों के लिए राशन की व्यवस्था को लेकर केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने कहा कि जिसका राशन कार्ड है उसका मान्य नहीं होने का प्रश्न ही नहीं है. जिसके पास राशन कार्ड है वो अपनी राशन दुकान से जाकर राशन ले सकते हैं. लेकिन यदि पूरे राज्य में इसे पीओएस मशीन के जरिए लागू कर लेते हैं तो वो राज्य के किसी भी जिले में जाकर ले सकता है. और इसी तरीके से यदि वन नेशन वन कार्ड में जुड़ जाते हैं तो जो 20 राज्य हैं उन राज्यों में मजदूर कहीं भी जाएगा तो वो वहां से राशन ले सकता है. उसमें किसी नए राशन कार्ड की जरूरत नहीं होगी. जो उनका राशन कार्ड है या जो उसका नंबर है उसी के जरिए उनका काम हो जाएगा और राशन मिल जाएगा.
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अनाज खराब होने की घटनाओं पर ये था केंद्रीय मंत्री का जवाब
मौसम की मार और अनाज सड़ने की घटना को लेकर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एफसीआई राज्य सरकार के माध्यम से अनाज खरीदती है. राज्य सरकार कितना भी अनाज खरीदे हम एमएसपी के रेट पर हर एक किलो का दाम उनको देने की कोशिश करते हैं. हमारे पास गोदाम हैं. गोदाम सिर्फ एफसीआई का ही नहीं है. राज्य सरकारों के भी हैं. और भी कई सारे प्राइवेट गोदाम भी हैं. जो खरीदने का इंफ्रास्ट्रक्चर है वो राज्य सरकार का है. राज्य सरकार अनाज खरीदती है. चाहे वो चावल हो या गेहूं हो. उसके बाद जितना उनके पास में जरूरत है उतना रखती है, जो एक्सट्रा होता है वो हम खरीद लेते हैं. यदि उनके कम पड़ता है तो हम हरियाणा, पंजाब जैसे दूसरे राज्यों से लाकर के उनको देने का काम करते हैं.
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केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस अनाज की खरीदी की सारी प्रक्रिया में हमारा स्टैंडर्ड बिलकुल तय है. कहीं बारिश हुई, कहीं कुछ हुआ तो हम उसमें छूट देते हैं. कुछ खराब हुआ तो हम उसको निकाल लेते हैं. जैसे दाल पर अगर पानी पड़ गया तो हमने कहा कि तुरंत इसको चेंज करो. लेकिन जो खरीदने का मामला है वो सारा का सारा राज्य सरकारें और केंद्र सरकारें मिलकर करती हैं.
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पासवान बोले- फिलहाल मजदूरों की प्राथमिकता है घर जाना
कोरोना काल में विभाग पर सबसे बड़े दबाव को लेकर पासवान ने कहा कि जो मजदूर हैं वो एक-दो नहीं बल्कि करोड़ों की संख्या में हैं. उनको खाना तो चलो फिलहाल मुफ्त में मिल जा रहा है लेकिन उनका रोजगार खत्म हो गया है. जो एक डर व्याप्त है उसके कारण से 90 प्रतिशत मजदूर घर जाना चाहते हैं. मजदूरों की पहली प्राथमिकता फिलहाल घर जाना है, फिर आता है राशन कार्ड की यानी की खाने की समस्या. वो अभी परेशान हैं क्योंकि उन्हें पता नहीं है कि ये कब तक चलेगा. हमारे पास भी तमाम फोन आते हैं. हम भी कई जिलों में फंसे मजदूरों के लिए वहां के जिलाधिकारी या संबंधित लोगों को फोन करते हैं तुरंत मदद की जाती है, ये सराहनीय कदम है.
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