गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि महिलाओं पर अत्याचार के मामलों में जल्दी फैसले आने चाहिए, इस पर सबकी सहमति है. दोषियों को दंड जल्दी मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की मोदी सरकार ने ही इसके लिए फांसी की सजा का प्रावधान किया. इसे कानूनी जामा पहनाया.
गृह मंत्री ने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट की कई गाइडलाइंस भी ऐसी हैं कि जो दया की अर्जी है, रिव्यू पिटीशन एक के बाद एक करते हैं. जब तक चार में से एक की भी दया याचिका या रिव्यू पिटीशन पेंडिंग है, तब तक उनको फांसी नहीं दी जा सकती. उन्होंने साथ ही कहा कि इसके बाद भी फांसी से पहले 14 दिन का समय देने का प्रावधान है.
गृह मंत्री शाह मंगलवार को एजेंडा आजतक के समापन सत्र 'शाह है तो संभव है' सत्र में सवालों का जवाब दे रहे थे. उन्होंने कहा कि हां, यह जरूर है कि इन गाइडलाइंस को बदलने के लिए सरकार को इनिशिएटिव लेना चाहिए. इस पर हम विचार भी कर रहे हैं.
निर्भया की मां के इस सवाल कि मेरी बेटी के हत्यारों को फांसी कब मिलेगी, पर कहा कि हमारी संवेदनाएं उनसे जुड़ी हैं. जब तक सुप्रीम कोर्ट का फैसला नहीं आ जाता, फांसी नहीं दी जा सकती. हैदराबाद एनकाउंटर को लेकर सवाल के जवाब में गृह मंत्री ने कहा कि हमारे पास अभी तक कोई रिपोर्ट नहीं आई है. सुप्रीम कोर्ट ने एक जांच का आदेश दिया है. बाकी सारी जांच सुप्रीम कोर्ट की जांच से रूक जाती है. उन्होंने कहा कि रिपोर्ट आएगी, तो उसे हम सार्वजनिक करेंगे.
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