एजेंडा आजतक में राम मंदिर के मुद्दे पर बात करते हुए विश्व हिंदू परिषद के नेता, श्री आचार्य धर्मेंद्र ने कहा कि राम जन्मभूमि न्यास एक प्रमाणिक और विश्वसनीय न्यास है. राम मंदिर के लिए देश के अंदर ऊर्जा जगाने का काम इसी न्यास ने किया. इसलिए न्यास के रहते किसी और को ट्रस्ट में भागीदार बनाने का सवाल ही नहीं उठता.
उन्होंने आगे कहा, 'पहले तो यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में जाना ही नहीं चाहिए था. सरकार को बहुमत ही श्री राम की कृपा से मिली थी. सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों का पहले उद्घोष होता था- यह तो अभी झांकी है, काशी-मथुरा बाकी है. इसलिए अलग से ट्रस्ट की जरूरत ही नहीं थी.'
वहीं संविधान का ज़िक्र करते हुए आचार्य धर्मेंद्र ने कहा कि अगर इस देश को धर्मनिरपेक्ष संविधान मिला है तो वो हिंदुओं का बनाया हुआ है. उन्होंने कहा कि अयोध्या में बनने वाला मंदिर भव्य होगा. जो पूरे विश्व के पर्यटकों के लिए आश्चर्य का केंद्र बनेगा.
वहीं सुप्रीम कोर्ट द्वारा सरकारी ट्रस्ट बनाने के आदेश पर आईपीएस और अयोध्या रिविजिटेड किताब के लेखक किशोर कुणाल ने कहा कि ट्रस्ट में राम जन्मभूमि का सबसे बड़ा अधिकार बनता है लेकिन इसमें एक कानूनी अड़चन है. जनवरी 2019 के बाद जिस ट्रस्ट का गठन है उसी को यह अधिकार दिया जा सकता है. इसलिए कानूनन न्यास को इस ट्रस्ट में भागीदार नहीं बनाया जा सकता है. लेकिन इस न्यास में जो लोग हैं उन्हें मिलाकर ट्रस्ट का गठन होना चाहिए. राम का आचरण त्याग का है इसलिए जो भी उनसे जुड़े हैं वो इसी भावना के साथ काम करें.
अगर त्याग का भाव होगा तो सदस्य बनने को लेकर कहीं कोई विवाद नहीं होगा. भरत और राम का किस्सा इस बात का उदाहरण है. दोनों एक दूसरे पर सत्ता लुटाते रहे. पूरे विश्व इतिहास में इस तरह का उदाहरण देखने को नहीं मिलेगा.
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