टीवी पर लौटा तारक मेहता का उल्टा चश्मा शो, लेकिन गायब हंसी का खजाना

वहीं चालू पांडे की एंट्री को भी ऐसे दिखाया गया जैसे कि वो पहली बार शो में एंट्री ले रहे हैं. पहले ही इस्टैब्लिश कैरेक्टर पर समय बर्बाद कर दिया. तारक मेहता का उल्टा चश्मा की यूएसपी सभी के चेहरे पर हंसी लाना है जो कि कमजोर दिखी.

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जेठालाल और दयाबेन जेठालाल और दयाबेन

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 23 जुलाई 2020,
  • अपडेटेड 4:27 PM IST

कहते हैं इंतजार का फल मीठा होता है, लेकिन ये मीठा फल कितना इंतजार करवाएगा किसे पता था? टीवी सीरियल तारक मेहता का उल्टा चश्मा के नए एपिसोड्स का फैंस ने पूरे 4 महीने इंतजार किया. इस दौरान फैंस के लिए शो के पुराने एपिसोड्स ही सहारा थे. फैंस ने इस टाइम पीरियड में लगभग पूरा तारक मेहता का उल्टा चश्मा दोबारा देख डाला होगा. वहीं कहीं न कहीं शो के नए एपिसोड्स देखने की लालसा भी थी.

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ब्रेक के बाद आया तारक मेहता का पहला एपिसोड

आखिरकार 22 जुलाई को असित मोदी नए एपिसोड के साथ हंसी का ताला खोल दिया है. रात 8 बजे फैंस का इंतजार खत्म हुआ, लेकिन क्या इस इंतजार का फल मीठा था? यानी ब्रेक के बाद आया पहला एपिसोड कैसा था?

वापसी के बाद पहले एपिसोड की बात करें तो ये एक तरह से हंसी की मशीन को फिर से रीस्टॉर्ट करने जैसा था. शो शुरू होते ही 8 मिनट 45 सेकंड का प्रोमो चला. तारक मेहता में इस तरह के प्रोमो नहीं होते हैं, पर शो नए सिरे से फिर शुरू हो रहा था तो दर्शकों को पुराना सबकुछ याद दिलाने, हालात के बारे में बात करने के लिए ये जरूरी था. हालांकि, उन फैंस को इससे जरूर निराशा हुई जिन्होंने इसे पहले ही सोशल मीडिया पर देख लिया.

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शो में कहानी की शुरुआत जेठालाल के सूरज को जल अर्पित करने से हुई. वही चिरपरिचत तरीके से सूर्य को जल अर्पित करना और बबिता जी के लिए बालकनी से झांकना. और फिर आत्माराम भिड़े सुविचार लिखने के लिए आना. शो में कुछ नयापन नहीं था. सुविचार लिखने के दौरान हंसराज हाथी का नाराज हो जाना, तारक मेहता का उन्हें समझाना कहीं न कहीं जबरदस्ती समय खींचने जैसा था.

30 मिनट के एपिसोड में 8-10 मिनट तो एड ब्रेक में गया. बाकी के बचे समय में 9 मिनट का प्रोमो ने जगह ले ली. उसके बाद जो थोड़ा सा वक्त मिला उसमें कुछ मजेदार देखने मिलेगा ऐसी उम्मीदे थीं, जो मिसिंग था.

वहीं चालू पांडे की एंट्री को भी ऐसे दिखाया गया जैसे कि वो पहली बार शो में एंट्री ले रहे हैं. पहले ही इस्टैब्लिश कैरेक्टर पर समय बर्बाद कर दिया. तारक मेहता का उल्टा चश्मा की यूएसपी सभी के चेहरे पर हंसी लाना है जो कि कमजोर दिखी. हंसी की जगह बोरियत सी महसूस हुई. कुछ मिनट चंपकलाल और जेठालाल को भी दी गई, पर फिर भी मजा नहीं आया. जो पागलपन शो में देखने को मिलता है वो गायब सा था. एक पल तो ऐसा लगा कि इससे अच्छा तो कोई पुराना एपिसोड ही देख लेते.

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खैर, शो में आने वाले एपिसोड के लिए थोड़ा बहुत प्लॉट बनाने की भी कोशिश की गई. शो के प्रीकैप में थोड़ा मसाला देखने को मिला है. उम्मीद है कि गुरुवार का एपिसोड फैंस को थोड़ा एंटरटेन करेगा.

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