जलेबी Review: जानिए क्या है खास, क्यों देखें यह फिल्म?

रिया चक्रबर्ती की फिल्म जलेबी मॉर्डन टी-20 मोहब्बत के दौर में सच्ची मोहब्बत की कहानी है. जानिए क्या है इस फिल्म में खास और किस दर्शक वर्क के लोग इसे देखने जा सकते हैं.

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फिल्म जलेबी का पोस्टर फिल्म जलेबी का पोस्टर

पुनीत पाराशर

  • नई दिल्ली,
  • 13 अक्टूबर 2018,
  • अपडेटेड 9:44 PM IST

फिल्म का नाम: जलेबी : दी एवरलास्टिंग टेस्ट ऑफ़ लव

डायरेक्टर: पुष्पदीप भरद्वाज

स्टार कास्ट: रिया चक्रबर्ती, वरुण मित्रा,  दिगांगना सूर्यवंशी

अवधि: 1 घंटा 53 मिनट

सर्टिफिकेट: U/A

रेटिंग: 2.5 स्टार

सोनाली केबल में अभनेत्री रिया चक्रबर्ती दिखाई दी थी, उसके बाद उन्होंने हाफ गर्लफ्रेंड, दोबारा, और बैंक चोर जैसी फिल्में की, और अब डेब्यू डायरेक्टर पुष्पदीप भारद्वाज की फिल्म जलेबी में वो अहम् भूमिका में नजर आ रही हैं. महेश भट्ट के प्रोडक्शन हाउस की यह फिल्म रिलीज हो चुकी है, आइए जानते हैं कैसी बनी है यह फिल्म -

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कहानी :-

यह फिल्म मुंबई से दिल्ली तक के सफर पर आधारित है, जहां राइटर आयशा (रिया चक्रबर्ती) अपनी किताब के बुक रीडिंग सेशन के लिए जाती है, लेकिन ट्रेन में उसकी मुलाक़ात अनु (दिगांगना सूर्यवंशी) से होती है, जो की आयशा के पुराने प्यार देव माथुर (वरुण मित्रा) की पत्नी हैं. अनु के साथ उसकी बेटी पुल्टी (अनन्या दुरेजा) भी होती हैं. कहानी फ्लैशबैक और प्रेजेंट डे से होते हुए, अंततः रिजल्ट तक पहुँचती है. इश्क मोहब्बत प्यार के बीते दिनों की यादें भी चलती रहती हैं, ट्रेन में सिंगर अर्जुन (अर्जुन कानूनगो) की मौजूदगी भी होती है. आखिरकार क्या होता है, ये जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी.

जानिए फिल्म क्यों देख सकते हैं?

फिल्म की ज्यादातर कहानी पहले से ही ट्रेलर में बताई जा चुकी है, लेकिन जिस तरह से डायरेक्टर पुष्पदीप भारद्वाज ने फिल्मांकन किया है, वो काबिल-ऐ-तारीफ़ है. संवाद, लोकेशन और दर्शाने का ढंग अच्छा है. कई बार इमोशनल पल आते हैं तो वहीं दूसरी तरफ पारिवारिक रिश्तों के ताने बाने को भी अच्छी तरह दिखाया गया है. दिल्ली की लोकेशन, और खास तौर पर नेताजी की बाड़ी को बढ़िया शूट किया गया है. वरुण मित्रा ने फिल्म में अच्छा काम किया है ,और उनकी आवाज कई दिलों को छू सकती है. उनका अभिनय बढ़िया है, वहीं रिया चक्रबर्ती ने उम्दा काम किया है, उन्हें जरूर इस फिल्म से फायदा होगा.

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क्या हैं कमज़ोर कड़ियां?

फिल्म की कमजोर कड़ी शायद इसका स्क्रीनप्ले है, जो हर वर्ग को पसंद नहीं आएगा, ख़ास तौर पर युवा वर्ग इससे कनेक्ट नहीं कर पायेगा. 20-20 के जमाने में टेस्ट मैच जैसा स्क्रीनप्ले लगता है. साथ ही एक गाने के अलावा बाकी गाने रिलीज से पहले हिट भी नहीं हो पाए. कहा जा रहा है यह बंगाली फिल्म प्रकटन से प्रेरित है, मैंने वो फिल्म भी देखी है, लेकिन यह फिल्म प्रकटन की पूरी खुशबू समाहित नहीं कर पायी है. युवावर्ग के मद्देनजर बेहतर स्क्रीनप्ले हो सकता था.

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