खोसला का घोसला और शंघाई जैसी फिल्में बना चुके फिल्मकार दिबाकर बनर्जी ने इंडिया टुडे कॉनक्लेव ईस्ट 2018 में शिरकत की. उन्होंने सेन्सरशिप, बंगाली कल्चर और बॉलीवुड फिल्मों पर बात की.
दिबाकर ने कहा "मैं पूरी तरह से बंगाली नहीं है. यहां कल्चरल गैप है. मैं दिल्ली के करोलबाग के जन्मा हूं. मेरे अंदर हरियाणवी और पंजाबी कल्चर का मिश्रण भी है. दरअसल, जो 40 साल पहले बंगाल छोड़ चुके हैं और जो रह रहे हैं, उनके कल्चर में बहुत अंतर है. मैं प्रवासी बंगाली हूं. "
आगे उन्होंने कहा, "मैं नास्तिक हं. किसी भी धर्म के पर्व को नहीं मानता, सिर्फ दुर्गा पूजा के दौरान होने वाली गेदरिंग को छोड़कर. इस दौरान लगने वाला मेला काफी पसंद है. इस दौरान तमाम तरह के फूड एक साथ खाने मिल जाते हैं."
सेन्सरशिप पर दिबाकर ने कहा, "मेरी फिल्म एलएसडी के डायलॉग 'छोटी जात के कुत्ते तेरे को घर में क्या घुसने दिया तू अपनी जगह भूल गया' पर सेन्सर बोर्ड काे आपत्ति थी. हमसे कहा गया था कि यदि इस डायलॉग के बाद दंगे हो गए, बसें जल गईं तो कौन जिम्मेदार होगा. इसके बाद हमने हटा लिया डायलॉग, ताकि फिल्म रिलीज डेट न टल जाए."
महेन्द्र गुप्ता