बॉलीवुड इंडस्ट्री में एक से बढ़कर एक गीतकार रहे हैं. मगर कुछ ही गीतकार ऐसे हैं जिन्होंने कई दशकों तक फिल्मों में गाने लिखे हैं. गुलजार साहब और जावेद अख्तर अभी भी फिल्मों में सक्रिय हैं. इसके अलावा एक गीतकार ऐसा और है जिसने 7 दशकों तक फिल्मों के लिए गीत लिखे. मगर आनंद बख्शी सिर्फ गीतकार ही नहीं थे. वे आर्मी में भी रहे. आनंद बख्शी के बर्थडे पर बता रहे हैं उनके जीवन के बारे में कुछ खास बातें.
बॉलीवुड के महान गीतकार आनंद बख्शी का जन्म 21 जुलाई, 1930 को रावलपिंड़ी में हुआ था. उनके परिवार वाले मूल रूप से कश्मीर के निवासी थे. बंटवारे के बाद बख्शी साहब का परिवार दिल्ली आकर बस गया. उस वक्त उनकी उम्र मात्र 17 साल थी. दूरदर्शन को दिए गए एक पुराने इंटरव्यू में आनंद बख्शी ने बताया था कि करियर के शुरुआती समय में उन्होंने संघर्ष के दौरान मोटर मैकेनिक का काम भी किया था. फिर टेलीफोन ऑपरेटर बन कर उन्होंने आर्मी ज्वॉइन कर ली थी. इस दौरान वे शौकिया तौर पर लिखना पसंद करते थे. मगर बाद में उन्होंने गीत लिखने को ही अपनी प्रायॉरिटी चुना.
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आनंद बख्शी ने अपना पहला गीत साल 1957 में शेर-ए-बगदाद फिल्म के लिए लिखा था. मगर करियर के शुरुआती 10 साल उनके गानों को कम ही पहचान मिली. साल 1964 में उन्होंने किशोर कुमार की फिल्म मिस्टर एक्स इन बॉम्बे के लिए गाने लिखे. उनका लिखा गाना मेरे महबूब कयामत होगी आज भी युवाओं के बीच बहुत पॉपुलर है. इसके बाद आनंद बख्शी साहब की गाड़ी चल पड़ी. उन्होंने 60 के दशक में आए दिन बहार के, जब जब फूल खिले, हिमालय की गोद में, राजा और रंक, आराधना, आए सावन झूम के और जीने की राह फिल्म के लिए गाने लिखे और इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना ली.
ताल-गदर जैसी फिल्मों के लिए लिखे गाने
आनंद बख्शी के लिए 70 का दशक बेहद खास रहा. इस दौरान उन्हें आर डी बर्मन और राजेश खन्ना की जोड़ी मिली. इस ट्राएलॉजी का कोई जवाब नहीं है. इसके अलावा लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के साथ उनकी जोड़ी भी सुपरहिट मानी जाती है. 70 के दशक में बख्शी साहब ने आन मिलो सजना, कटी पतंग, खिलौना, हरे रामा हरे कृष्णा, सीता और गीता, बॉबी, अमर प्रेम, आप की कसम, शोले और ड्रीम गर्ल जैसी फिल्मों के गाने लिखे. 80 और 90 के दशक और 2000 के बाद में भी आनंद बख्शी बराबर सक्रिय रहे. ताल, दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे, मोहब्बतें, यादें, परदेस और गदर जैसी फिल्मों में आनंद बख्शी ने गीत लिखे और गानों को हमेशा-हमेशा के लिए अमर कर दिया.
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