17 नेशनल अवॉर्ड जीत चुके साउथ के इस दिग्गज के बारे में लोगों को बहुत कम है जानकारी

अदूर गोपालकृष्णन ने कई सारी फिल्मों का निर्देशन किया है. उन्हें सिनेमा के श्रेष्ठ निर्देशकों में शुमार किया जाता है.

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अदूर गोपालकृष्णन अदूर गोपालकृष्णन

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 जुलाई 2019,
  • अपडेटेड 7:48 AM IST

अदूर गोपालकृष्णन साउथ सिनेमा के सबसे बड़े फिल्म निर्देशक हैं. उनकी फिल्मों को विश्वभर में सम्मान मिलता है और उनकी स्क्रीनिंग कई सारे फॉरेन फिल्म फेस्टिवल्स में होती है. अदूर विलक्षण प्रतिभा के धनी हैं और फिल्म इंडस्ट्री में उनका शानदार काम उन्हें भारतीय सिनेमा के बड़े निर्देशकों सत्यजीत रे, मृणाल सेन और ऋत्विक घटक की कतार में लाकर खड़ा कर देता है. अदूर के जन्मदिन पर जानिए उनके बारे में कुछ रोचक बातें.

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अदूर गोपालकृष्णन का जन्म 3 जुलाई, 1941 को हुआ था. बचपन से ही उनका रुझान कला के प्रति था. उन्होंने 8 साल की उम्र से ही नाटकों में एक्टिंग करनी शुरू कर दी थी. उन्होंने पॉलिटिकल साइंस, एकोनॉमिक्स और पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में डिग्रियां हासिल की और तमिल नाडु में एक सरकारी नौकरी शुरू कर दी. इसके बाद उन्होंने बीच में ही नौकरी छोड़ दी और पुणे के फिल्म इंस्टीट्यूट में स्क्रीन राइटिंग और फिल्म मेकिंग की तालीम हासिल करने लगे.

उन्होंने अ ग्रेट डे, अ मिशन ऑफ लव, रोमांस ऑफ रबर जैसी डॉक्यूमेंट्रीज बनाईं. फिल्मों की बात करें तो इदुकी, यक्सागाना, कृष्णनाथम, कलमंडलम गोपी, कोडियेट्टम और पिनियुम जैसी फिल्में बनाईं. अदूर को उनके शानदार काम के लिए कई सारे सम्मानों से भी नवाजा गया है. अब तक उन्हें फिल्म मेकिंग और स्क्रीनप्ले के लिए कुल 17 बार नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है. उनसे ज्यादा नेशनल अवॉर्ड सिर्फ सत्यजीत रे और मृणाल सेन को ही मिला है.

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भारत सरकार द्वारा वे पद्मश्री और पद्म विभूषण जैसे सम्मानों से भी नवाजे जा चुके हैं. उन्हें साल 2004 में दादा साहब फाल्के अवॉर्ड से नवाजा गया था. बता दें कि वे काफी सख्त निर्देशक हैं. फिल्मों की शूटिंग को लेकर उनका ये मानना है कि वे जो स्क्रिप्ट लिखते हैं उनके किरदारों के साथ छेड़छाड़ के खिलाफ रहते हैं. वे कहते हैं कि मैं एक एक्टर से फिल्म करवा रहा हूं तो उसे फिल्म के किरदार के साथ ज्यादा छेड़छाड़ किए बिना ही उसे निभाना चाहिए. अदूर अनुशासन के साथ काम करने के किवायद का समर्थन करते हैं.

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