'साहित्य आजतक 2022' शुक्रवार से शुरू हो चुका है. दूसरे दिन कि शुरुआत हंस राज हंस ने सुरीले गीत से की. इस दौरान इन्होंने गायक जगजीत सिंह को भी याद किया. वहां बैठी जनता के बीच समा बांध दिया. इसी के साथ स्टेज 3 पर आरजे और लेखर युनूस खान आए. इन्होंने फिल्मी दुनिया में जो 80-90 के दशक में गीत बनते थे, उनके बारे में किस्से सुनाए.
युनूस खान ने लिरिसिस्ट राजेंद्र कृष्ण से जुड़ा एक मजेदार किस्सा सुनाया. जहां उन्होंने बताया कि कैसे राजेंद्र 30 दिन में से 29.5 दिन मस्ती करते थे और केवल आधे दिन में तकिए पर बैठकर गाना लिखा करते थे.
युनूस खान ने सुनाया किस्सा
गीतकार राजेंद्र कृष्णा बहुत ही फास्ट गाने लिखने वाले गीतकार रहे हैं. उनका ऐसा था कि एक महीने पहले प्रोड्यूसर उन्हें साइन करता था. म्यूजिक डायरेक्टर उन्हें ट्यून सुना दिया करते थे. और फिर वह कहते थे कि हां, गाना हो जाएगा. लेकिन जब उन्हें गाना लिखने के लिए 30 दिन मिलते थे तो 29.5 दिन वह गाना नहीं लिखते थे. वह अपनी मौज करते रहते थे और बाकी के बचे आधे दिन में वह गाना लिखते थे.
एक दिन राजेंद्र जी बहुत परेशान और चिंतित थे. उनके गाना लिखने की स्टाइल यह थी कि वह अपने बेडरूम में तकिए पर बैठकर गाना लिखा करते थे. उनकी पत्नी नहाकर बाथरूम से उस दिन निकलीं और जैसे की महिलाएं करती हैं, उन्होंने अपने गीले बाल तौलिए से झाड़े और पानी से राजेंद्र जी के सारे पेपर्स वगैराह भीग गए. राजेंद्र जी भी भीगे. यह वाकया देखकर उनकी पत्नी हंस पड़ीं. लेकिन गौर करने वाली बात यहां यह रही कि गीतकार मामूली जिंदगी की घटनाओं को कैसे गानों का रूप देता है. इसका उदाहरण यह गाना है जो उन्होंने उस दिन लिखा. गाना था 'न झटकों जुल्फ से पानी ये मोती टूट जाएंगे'. आम जिंदगी की घटनाओं को फिल्मी गानों में बदल देते हैं, यही एक गीतकार की कला होती है.
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