साउथ एक्ट्रेस पार्वती थिरुवोथु ने अपना दर्दनाक एक्सपीरियंस शेयर किया है. पार्वती दो बार नेशनल अवॉर्ड जीत चुकी हैं. लेकिन उनके जीवन का एक लंबा दौर रहा है जब वो दिमागी संतुलन बनाए रखने के लिए थेरेपीज पर डिपेंड रहती थीं. एक्ट्रेस बताती हैं कि वो अकेलेपन के लंबे दौर से जूझ चुकी हैं, लेकिन उन्हें उस ट्रॉमा से निकालने के लिए कोई अच्छा थेरेपिस्ट नहीं मिला. उन्होंने अपनी मेंटल सिचुएशन का हाल ही में खुलासा किया.
गलत थेरेपीज ने बिगाड़ी हालत
पार्वती पंकज त्रिपाठी के साथ कड़क सिंह में भी कर चुकी हैं. एक्ट्रेस ने अपनी पर्सनल लाइफ का जिक्र हॉटरफ्लाई से बातचीत में किया. उन्होंने बताया कि सही थेरेपिस्ट ढूंढने में उन्हें काफी वक्त लगा और कई बार ट्रायल-एंड-एरर से गुजरना पड़ा. पार्वती ने कहा कि थेरेपी शुरू करने का फैसला उनकी जिंदगी के सबसे अच्छे फैसलों में से एक रहा, लेकिन गलत थेरेपिस्ट मिलने से जख्म और गहरे भी हो सकते हैं.
पार्वती ने कहा- जब तक मुझे मेरा मौजूदा थेरेपिस्ट नहीं मिला, तब तक मुझे कई खराब थेरेपिस्ट झेलने पड़े. मेरे लिए ऐसा थेरेपिस्ट ढूंढना मुश्किल था जो मुझे एक पब्लिक फिगर की तरह न देखे. मेरा पहला थेरेपिस्ट अमेरिका में था, इसलिए सेशन्स रात 1–2 बजे होते थे. कुछ देसी थेरेपिस्ट, जिनमें रेड फ्लैग्स होते हैं, हालात और बिगाड़ देते हैं क्योंकि वे हमारी संस्कृति की कमजोर नसों को अच्छी तरह जानते हैं और वहीं दबाव डालते हैं. आखिरकार, यह सब बहुत दर्दनाक होता है.
खुद को ‘मदद से बाहर’ समझने लगी थीं पार्वती
अपनी जिंदगी के एक अंधेरे दौर के बारे में बात करते हुए पार्वती ने कहा- एक समय मैं बहुत अकेली थी. दोस्तों से कहती रहती थी कि नए-नए थेरेपिस्ट ट्राय कर रही हूं, लेकिन कुछ काम नहीं कर रहा था. मुझे लगने लगा था कि मैं मदद से बाहर हूं. हालात बहुत खराब हो गए थे. आत्महत्या के ख्याल बहुत ज्यादा आने लगे थे. 2021 के जनवरी-फरवरी के महीने मुझे अब याद ही नहीं, सब धुंधला है. फोन की गैलरी देखती हूं, तभी याद आता है कि तब क्या-क्या हुआ था. इसके बाद ही थेरेपी ने मेरे लिए काम करना शुरू किया.
पार्वती ने आगे बताया- अब मैं दो तरह की थेरेपी लेती हूं. एक है EMDR (आई मूवमेंट डिसेंसिटाइजेशन एंड रीप्रोसेसिंग), जिसने मेरी जिंदगी में बड़ा बदलाव किया है क्योंकि अब मेरे पास ट्रॉमा-इन्फॉर्म्ड थेरेपिस्ट है. EMDR के जरिए वह मेरी ताकत से जुड़ी सोच और शरीर में बैठी शर्म की भावना को बदलने में मदद कर रही हैं. इसके अलावा मेरी एक सेक्स थेरेपिस्ट भी हैं. यानी अभी मेरी प्लेट पूरी भरी हुई है- काम, दोस्त, परिवार और खुद को दोबारा समझने-जानने की इस पूरी प्रोसेस के साथ. लोगों ने कहा था कि 30 के बाद इंसान खुद के और करीब आने लगता है, और तब रिश्तों को देखने का नजरिया भी बदल जाता है. जिंदगी ज्यादा संतुलित और पूरी लगने लगती है.
पार्वती ‘बैंगलोर डेज’, ‘एन्नु निन्ट मोईदीन’, ‘चार्ली’, ‘टेक ऑफ’, ‘उयारे’, ‘वायरस’ और ‘पुझु’ जैसी फिल्मों के लिए जानी जाती हैं. आखिरी बार वह एंथोलॉजी फिल्म ‘हर’ में नजर आई थीं. फिलहाल वह दो फिल्मों—‘आई, नोबडी’ और ‘प्रधमा दृष्ट्या कुटक्कर' पर काम कर रही हैं.
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