Film Review 'मस्तीजादे': कम मस्ती, बोरियत ज्यादा

मिलाप झवेरी ने एक फिल्म राइटर के तौर पर मस्ती, हे बेबी, ग्रैंड मस्ती के साथ-साथ हाल ही में रिलीज 'क्या कूल हैं हम 3' जैसी फिल्में लिखी हैं और अब वो 'मस्तीजादे' से डायरेक्शन में डेब्यूट कर रहे हैं.

Advertisement
मस्तीजादे': कम मस्ती, बोरियत ज्यादा मस्तीजादे': कम मस्ती, बोरियत ज्यादा

लव रघुवंशी / आर जे आलोक

  • मुंबई,
  • 29 जनवरी 2016,
  • अपडेटेड 4:03 PM IST

फिल्म का नाम: मस्तीजादे

डायरेक्टर: मिलाप झवेरी

स्टार कास्ट: सनी लियोन, वीर दास, तुषार कपूर, सुरेश मेनन, शाद रंधावा और असरानी

अवधि: 1 घंटा 48 मिनट

सर्टिफिकेट: A

रेटिंग: 1 स्टार

मिलाप झवेरी ने एक फिल्म राइटर के तौर पर मस्ती, हे बेबी, ग्रैंड मस्ती के साथ-साथ हाल ही में रिलीज 'क्या कूल हैं हम 3' जैसी फिल्में लिखी हैं और अब वो 'मस्तीजादे' से डायरेक्शन में डेब्यूट कर रहे हैं. फिल्म एक सेक्स कॉमेडी है और क्या दर्शकों को थिएटर तक खींच पाने में सक्षम है? आइये पता करते हैं-

Advertisement

कहानी
यह कहानी दो दोस्तों सनी केले (तुषार कपूर) और आदित्य चोटिया (वीर दास) की है जो एड एजेंसी में काम करते हैं. लेकिन इन दोनों को किन्हीं कारणों से कंपनी से बाहर निकाल दिया जाता है फिर सनी और आदित्य खुद की एड एजेंसी खोलते हैं. कहानी आगे बढ़ती है और फिर दोनों को एक ही जैसी दिखने वाली लेकिन दो अलग-अलग पर्सनालिटी की लड़कियों लिली लेले (सनी लियोन) और लैला लेले (सनी लियोन) से प्यार हो जाता है. फिर कई सारी कन्फ्यूजन होने लगता है और आखिरकार फिल्म को अंजाम मिलता है. इन तीनो किरदारों के अलावा देशप्रेमी सिंह (शाद रंधावा), असरानी और सुरेश मेनन का भी अहम रोल है.

स्क्रिप्ट
फिल्म की कहानी मिलाप झवेरी ने खुद लिखी है. मिलाप ने यूथ के हिसाब से तरह-तरह के पंच इस कहानी में डालने की कोशिश की है. फिल्म में कई सारे डबल मीनिंग जोक्स आपको सुनने और देखने को मिलते हैं साथ ही सनी लियॉन की मौजूदगी फिल्म में घनघोर अंग प्रदर्शन का तड़का लगाती है. दरअसल जो भी आपने ट्रेलर में देखा था वो सब कुछ आपको फिल्म में देखने को मिलता है. एक खास तरह की ऑडिएंस के लिए यह फिल्म बनाई गई है और इसकी तुलना पिछले हफ्ते रिलीज हुई 'क्या कूल हैं हम 3' से जरूर की जाएगी.

Advertisement

अभिनय
फिल्म में सनी लियोन दोहरे अवतार में नजर आई हैं और दोनों को बखूबी निभाया है. बोल्ड किरदार के साथ सनी ने किरदार के हिसाब से अच्छ अभिनय किया है. वहीं वीर दास ने तुषार के साथ मिलकर करेक्ट कॉमिक टाइमिंग दिखाई तो है लेकिन वो कमजोर स्क्रिप्ट की वजह से निखर कर सामने नहीं आ पाती. शाद रंधावा, असरानी, जिजेल, सुरेश मेनन और रितेश देशमुख का कैमियो भी ठीक ठाक है.

संगीत
फिल्म के गाने अच्छे हैं लेकिन फिल्मांकन के दौरान कुछ गीतों को कम किया जा सकता था. इन गीतों की वजह से फिल्म की रफ्तार धीमी लगती है.

कमजोर कड़ी
फिल्म में टिपिकल वन लाइनर्स और डबल मीनिंग संवाद है जो इसके ऑडियंस के लिए तो ठीक है लेकिन ज्यादा से ज्यादा दर्शकों को खींच पाने में मुश्किलात का सामना कर सकती है. कहानी बहुत ही आड़ी टेढ़ी है जो एक वक्त के बाद बोर करने लगती है.

क्यों देखें
अगर आप एडल्ट हैं. सनी लियोन की हिंदी फिल्मों के दीवाने हैं तो इस फिल्म को देख सकते हैं.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement