Film Review: उकताऊ फिल्म है इनडिपेंडेंस डे-2

हॉलीवुड 1996 में एलियंस के धरती पर हमले को लेकर एक फिल्म लेकर आया था इनडिपेंडेंस डे. फिल्म ने जबरदस्त कामयाबी हासिल की थी .अब फिल्म का सीक्वल आ गया है. जानें कैसी है फिल्म...

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नरेंद्र सैनी

  • नई दिल्ली,
  • 23 जून 2016,
  • अपडेटेड 11:47 AM IST

रेटिंगः 1.5 स्टार
डायरेक्टरः रोलां एमरिच
कलाकारः लायम हेम्सवर्थ, जेफ गोल्डब्लम, शार्लट गेन्सबर्ग, बिल पुलमैन, मायका मुनरो, ट्रैविस टोप और जूड हर्श

हॉलीवुड भी कई बार ऐसी गलतियां कर देता है जिसकी उम्मीद उससे नहीं होती. 1996 में एलियंस के धरती पर हमले को लेकर एक फिल्म आई थी इनडिपेंडेंस डे. फिल्म में दिखाए गए एलियन अटैक और उससे जुड़ी कहानी ने सबका दिल जीत लिया था. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा कलेक्शन किया था और अपनी पहचान बनाई थी. इसके निर्माता बीस साल बाद इसका सीक्वल लेकर आए हैं. लेकिन यह सीक्वल कहानी से लेकर हर मामले तक में निराश करता है. 

यूनिवर्सल सोल्जर (1992), इनडिपेंडेंस डे (1996), गॉडजिला (1998) और 2012 (2009) जैसी शानदार फिल्में बनाने वाले डायरेक्टर रोलां एमरिच इस बार चूक गए हैं. उन्होंने फिल्म का सीक्वल तो बनाने का फैसला कर लिया लेकिन फिल्म के लिए उनके पास कोई ठोस कहानी नहीं थी, और कोई ऐसा एक्स फैक्टर भी नहीं था जिसके साथ वे एलियंस को लेकर कुछ नया कर पाते. और कुल मिलाकर वे काफी उकताऊ, दोहराव से भरा कमजोर सीक्वल लेकर आए.

कहानी कुछ इस तरह है कि पहले एलियन अटैक को बीस साल हो चुके हैं. पहले हमले से उबरने के बाद दुनिया के सभी देशों ने मिलकर अर्थ स्पेस डिफेंस बनाया है और एरिया51 अंतरिक्ष सुरक्षा का मुख्यालय बन चुका है. अत्याधुनिक और एलियंस की टेक्नोलॉजी के जरिये अब अंतरिक्ष में आवाजाही आसान हो गई है और हथियार भी बदल गए हैं. इसके साथ ही अमेरिका की राष्ट्रपति एक महिला बन गई हैं. लेकिन इस सबके बीच दुनिया पर फिर से एलियंस का खतरा मंडराने लगा है. तरह-तरह के संकेत मिलने लगे हैं और साइंटिस्ट जेफ गोल्डब्लम इस बारे में जानकारी जुटाने निकलते हैं तो उनकी मुलाकात दूसरी साइंटिस्ट शार्लट गेन्सबर्ग (एंटीक्राइस्ट और निंफोमेनियक) से होती है. फिर वही सब शुरू हो जाता है जो पहले पार्ट में हुआ था. एलियंस पूरी ताकत के साथ धरती की ओर लौटते हैं औऱ लंदन और अमेरिका की तरह दुनिया के कई देशों के शहरों को तबाह करना शुरू कर देते हैं. फिर वही पुरानी कहानी शुरू हो जाती है जो इनडिपेंडेंस डे में नजर आई थी. लेकिन वह उस समय नई थी और अलग ढंग से कही गई थी. शायद डायरेक्टर यह भूल गए. उन्होंने सेम टू सेम वैसी ही कहानी पिरो दी, सिर्फ इतना अंतर किया कि किरदार बदल डाले. बाकी सब कुछ वैसा ही रहे. 

पुराने तरह के एलियन और कहानी में कोई कनेक्शन पॉइंट नहीं होने की वजह से मार-धाड़ बोरिंग लगने लगती है. जेफ गोल्डब्ल्म और शार्लट जैसे सधे हुए कलाकार भी फिल्म में कोई असर नहीं डाते पाते. बीच-बीच में यह सोचने पर भी मजबूर होना पड़ता है कि इतने कमजोर प्लॉट के साथ फिल्म का सीक्वल बनाने की एमरिच को क्या जरूरत थी. इनडिपेंडेंस कुल मिलाकर कहानी के प्लॉट से लेकर ट्रीटमेंट और टेक्नोलॉजी तक हर मामले में निराश ही करती है. इसे ही कहते हैं, ऊंचा नाम और फीका काम.

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