सलमान खान आज भले ही बॉलीवुड सुपरस्टार हों लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब उनके पिता चाहते ही नहीं थे कि वे एक्टर बनें. सलमान के पिता चाहते थे कि सोहेल खान एक्टर बने, अरबाज एक्टर या डायरेक्टर की कमान संभाल सकते हैं और सलमान सिर्फ कैमरे के पीछे काम करें यानि डायरेक्शन की कमान संभालें. दरअसल सलमान की हाइट और उनके वजन को देखते हुए सलीम खान ने उन्हें ये राय दी थी. सलमान उस दौर में काफी पतले हुआ करते थे. ये वो दौर था जब बॉलीवुड के पर्दे पर अमिताभ बच्चन, विनोद खन्ना, जैकी श्रॉफ जैसे लंबे-चौड़े सितारों का दबदबा था.
वही सलमान 17 साल की उम्र में ही प्रोड्यूसर्स के चक्कर लगाया करते थे और अपनी स्क्रिप्ट्स को उनके पास ले जाया करते थे सलमान ने एक इंटरव्यू में कहा था कि मुझे टरकाने के लिए कई प्रोड्यूसर्स ने कह देते थे कि तुम हीरो ही क्यों नहीं बन जाते. मुझे 15-20 लोगों ने जब ऐसा कहा तब मुझे लगा कि एक्टिंग ही ट्राई करना चाहिए.
सलमान ने जब अपने पिता से कहा था कि वे एक्टिंग करना चाहते हैं तो सलीम ने उनसे पूछा था- तुम मोहल्ले के दादा बन सकते हो? सलमान ने कहा था नहीं, फिर पूछा पुलिसवाले बन सकते हो? सलमान ने कहा नहीं, जज? वकील? सलमान ने नहीं में जवाब दिया. दस आदमी उठा कर फेंक सकते हो? सलमान ने कहा नहीं. तब सलीम ने कहा कि आज के दौर में ऐसी ही फिल्में बनती हैं, तुम कैसे मैनेज करोगे.
सूरज बड़जात्या की फिल्म से बदल गई थी किस्मत
यही कारण है कि सलमान ने शशिलाल नैयर नाम के डायरेक्टर को तीन फिल्मों के लिए असिस्ट किया था. हालांकि उन्हें क्रेडिट नहीं मिला था. इसके बाद उन्हें साल 1988 में बीवी हो तो ऐसी फिल्म में डेब्यू करने का मौका मिला था लेकिन फिल्म के डायरेक्टर सलमान के काम से बिल्कुल प्रभावित नहीं थे. सलमान खुद आत्मविश्वास की कमी से गुजर रहे थे लेकिन इसके बावजूद सूरज बड़जात्या ने उन्हें अपनी फिल्म में लिया था क्योंकि उन्हें सलमान के फोटोग्राफ काफी पसंद आए थे. सलमान और सूरज की फिल्म मैंने प्यार किया सुपरहिट साबित हुई और दोनों का करियर चल निकला.
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