सुरों की मल्लिका और सूफी गानों में महारत रखने वालीं ऋचा शर्मा 29 अगस्त को अपना बर्थडे सेलिब्रेट करती हैं. ऋचा को बॉलीवुड के उन सिंगर्स में गिना जाता है जो हर तरह के गाने आसानी से गा सकती हैं. उनकी बुलंद आवाज सभी के दिल को छू जाती और हर कोई सिर्फ उन्हें लगातार सुनता रहता है. लेकिन जिस ऋचा शर्मा ने बॉलीवुड में अपने टैलेंट के दम पर एक अलग जगह बनाई है, एक जमाने में उन्होंने जबरदस्त संघर्ष किया था.
अब कहने को ऋचा शर्मा का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ था जिसका संगीत से गहरा नाता था. उनके पिता दयाशंकर एक बड़े शास्त्रीय गायक थे. जब ऋचा का जन्म हुआ था, उसी वक्त उन्हें आभास हो गया था कि उनकी बेटी संगीत जगत में खूब नाम कमाएगी.
जब ऋचा को गाने के मिलते 11 रुपये
जैसा उनके पिता ने सोचा था, ऋचा उससे भी बेहतर निकलीं. उन्होंने सिर्फ 10 साल की उम्र में जगरातों में गायकी शुरू कर दी थी. माता के भजन गा वे 11 रुपये कमाया करती थीं. खुद कई इंटरव्यू में ऋचा ने बताया है कि उन 11 रुपयों को उन्होंने अभी भी संभालकर रखे हैं. नेपोटिज्म के दौर में भी ऋचा उन कलाकारों में शुमार हैं जिन्होंने सिर्फ और सिर्फ अपनी मेहनत के बलबूते एक अलग मुकाम हासिल किया है.
शाहरुख की फिल्मों में हमेशा रहीं हिट
इसके बाद साल 1995 में ऋचा की जिंदगी में टर्निंट प्वाइंट आया था. उन्होंने मुंबई के एक कार्यक्रम में भजन गाए थे. वहां किसी की उन पर नजर पड़ी और उन्हें फिल्म सलमा पे दिल आ गया में गाने का मौका मिल गया. इसके बाद ऋचा का बॉलीवुड में बतौर प्लेबैक सिंगर करियर सरपट दौड़ने लगा. उन्होंने शाहरुख खान की कई हिट फिल्मो में बेहतरीन गाना गाया. फिर चाहे वो उनकी फिल्म कल हो ना हो या फिर ओम शांति ओम. ऋचा ने माइ नेम इज खान में भी अपनी मधुर आवाज का जलवा बिखेरा था. उन्होंने आइटम सॉन्ग बिल्लो रानी के जरिए भी खूब लोकप्रियता हासिल की है.
वैसे अब ऋचा एक बड़ी स्टार जरूर बन गई हैं लेकिन वे अपने संघर्ष को आज भी याद रखती हैं. वे अभी भी भजन गाती हैं और सूफी गानों में गहरी दिलचस्पी दिखाती हैं.
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