नेपोटिज्म पर बोले पीयूष मिश्रा, 'कोई कपूर-खान मेरे काम के बीच नहीं आया'

अब दिग्गज अभिनेता पीयूष मिश्रा ने भी नेपोटिज्म के मुद्दे पर खुलकर अपने विचार रखे हैं. एक न्यूज पोर्टल को दिए इंटरव्यू में पीयूष ने माना है कि बॉलीवुड में कुछ कलाकारों की दादागिरी देखने को मिलती है, लेकिन नेपोटिज्म के होने से वे इनकार करते हैं.

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पीयूष मिश्रा पीयूष मिश्रा

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 10 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 11:24 AM IST

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद से बॉलीवुड में नेपोटिज्म पर काफी विवाद देखने को मिला है. एक्टर की मौत के बाद से कई स्टार किड्स को जमकर ट्रोल किया गया है. कई सेलेब्स की तो फिल्म भी फ्लॉप करवा दी गई. इसका सबसे बड़ा उदाहरण है हाल ही में आलिया की रिलीज हुई फिल्म सड़क 2. अब नेपोटिज्म पर हर कलाकार के अपने-अपने विचार हैं. कोई इसे ठीक मानता हैं तो किसी की नजरों में मेहनत ही मायने रखती है.

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बॉलीवुड में गुंडागर्दी: पीयूष मिश्रा

अब दिग्गज अभिनेता पीयूष मिश्रा ने भी नेपोटिज्म के मुद्दे पर खुलकर अपने विचार रखे हैं. एक न्यूज पोर्टल को दिए इंटरव्यू में पीयूष ने माना है कि बॉलीवुड में कुछ कलाकारों की दादागिरी देखने को मिलती है, लेकिन नेपोटिज्म के होने से वे इनकार करते हैं. पीयूष कहते हैं- निजी तौर पर नेपोटिज्म ने मेरे करियर पर कोई असर नहीं डाला है. मैंने काफी काम किया है. कोई खान या कपूर मेरे काम के बीच में नहीं आया. मेरे लिए नेपोटिज्म का कोई अस्तित्व नहीं है, और अगर ऐसा कुछ है भी तो मेरे साथ तो नहीं हुआ. लेकिन हां इस इंडस्ट्री में गुंडागर्दी होती है. दादागिरी देखने को मिलती है.

इस दादागिरी वाले प्वाइंट पर पीयूष बताते हैं कि जो सीनियर लोग होते हैं वे हमेशा उम्मीद करेंगे कि जो भी नया टैलेंट है वो उनके सामने झुके, उन्हें सम्मान दे. ऐसा ना करने पर स्टार के करियर पर असर पडता है. लेकिन पीयूष के मुताबिक वे ना कभी किसी के सामने झुके और ना ही कभी किसी के इशारों पर काम किया. वे कहते हैं- मैं किसी के सामने झुकने को तैयार नहीं था. मैंने अपने सिद्धांतों पर काम किया है. अगर कुछ मेरे मुताबिक नहीं होता है तो मैं वो काम छोड़ देता हूं.

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हर दल ने इस्तेमाल की मेरी कविता: पीयूष मिश्रा

पीपूष ये भी मानते हैं कि उन्हें अपनी कविताओं की वजह से काफी लोकप्रियता मिली है. उनकी नजरों में कुछ कविताओं को लेकर बवाल जरूर होता है, लेकिन फिर भी उनकी कविता का हर राजनीतिक पार्टी कभी ना कभी इस्तेमात तो करती ही है. एक्टर की माने जब किसी कार्यक्रम या फिर इवेंट में उनकी कविता का इस्तेमाल किया जाता है, तो उन्हें अच्छा लगता है.
 

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