ये होगी 'बुलबुल' के डॉ सुदीप उर्फ एक्टर परमब्रता की नई हिंदी फिल्म

बुलबुल के बाद 2020 में उनकी एक और फिल्म ‘टीकी टाका’ जी 5  पर दर्शकों का भरपूर मनोरंजन कर रही है. अभिनेता होने के साथ वो एक डायरेक्टर भी हैं और 'टिका टाका ' को उन्होंने डायरेक्ट भी किया है. परमब्रता ने कई बांग्ला फिल्में डायरेक्ट की हैं और 'टिका टाका' बतौर निर्देशक उनकी पहली हिंदी फिल्म है.

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परमब्रता चट्टोपाध्याय परमब्रता चट्टोपाध्याय

अमित त्यागी

  • मुंबई,
  • 18 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 12:17 PM IST

परमब्रता चट्टोपाध्याय बांग्ला फिल्म इंडस्ट्री का वो चमकता सितारा है, जो पिछले 14 सालों से दर्शकों का मनोरंजन करता आ रहा है. लेकिन परमब्रता ने हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री में कदम साल 2012 में आई एक्ट्रेस विद्या बालन की फिल्म ‘कहानी’ से रखा था.

कोलकाता की  बांग्ला फिल्म इंडस्ट्री से मुंबई की फिल्म  इंडस्ट्री को कई कलाकार दिए हैं जिनमे कोंकणा सेनगुप्ता ,जीशु सेनगुप्ता , स्वस्तिका और पाओली धाम के साथ परमब्रता भी कई फिल्म और वेब शोज में दिख रहे हैं. हांलाकि परमब्रता अभी भी ज्यादातर फिल्में बांग्ला भाषा में ही करते हैं, लेकिन पिछले कुछ समय से वो बॉलीवुड में भी काफी एक्टिव रहे हैं. अनुष्का शर्मा के साथ फिल्म 'परी' में वो बतौर हीरो दिखे और हाल में OTT प्लेटफॉर्म  नेटफ्लिक्स की फिल्म ‘बुलबुल’ में दमदार रोल निभाया.

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बुलबुल के बाद 2020 में उनकी एक और फिल्म ‘टीकी टाका’ जी 5  पर दर्शकों का भरपूर मनोरंजन कर रही है. अभिनेता होने के साथ वो एक डायरेक्टर भी हैं और 'टिकी टाका ' को उन्होंने डायरेक्ट भी किया है. परमब्रता ने कई बांग्ला फिल्में डायरेक्ट की हैं और 'टिकी टाका' बतौर निर्देशक उनकी पहली हिंदी फिल्म है.

फिल्म ‘टीकी टाका’ पर आजतक से बात करते हुए परमब्रता चट्टोपाध्याय कहते हैं, ‘जैसा कि हम सभी जानते हैं कि बंगाल के लोगों का फुलबॉल से काफी पुराना नाता है. आप ये भी जानते होंगे कि बंगाल के कई फुटबॉल लीग्स में अफ्रीका के देशों से खिलाड़ी आकर खेलते हैं. तो ऐसे ही एक किरदार को लेकर ये कहानी है जो जाने अनजाने हमारे शहर में आ जाता है और यहां आकर वो मुसीबत में फंस जाता है. लेकिन कहानी में ट्विस्ट आता है और वो बतौर फुलबॉल खिलाड़ी फेमस हो जाता है तो बस खेल और मुसीबत के बीच फंसी मजेदार कहानी है ‘टीकी टाका’.

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फुटबॉल से है परमब्रता को प्यार

क्रिकेट और फुटबॉल के बारे में बात करते हुए परमब्रता कहते हैं, ‘मैं किक्रेट से प्यार करता हूं और बचपन से ही टीवी पर किक्रेट मैच देखता आया हूं. लेकिन ये सच है कि क्रिकेट हमें औपनिवेशिक विरासत के तौर पर मिला है और हम हमेशा उसी को सेलिब्रेट करते रहे. फुटबॉल और मेरा बचपन से ही नाता है और इसका क्रेडिट मैं अपने पिता जी को देता हूं जो एक बहुत बड़े खेल प्रेमी हैं. 

हांलाकि ये भी सच है कि फुटबॉल को पहले गरीबों का खेल माना जाता था. लेकिन अब फुटबॉल पूरी दुनिया का सबसे बड़ा गेम बन गया है. मैं किक्रेट और फुटबॉल दोनों पसंद करता हूं लेकिन मुझे लगता है कि फुटबॉल में हमारे देश को और आगे जाने की जरुरत है. हांलाकि पिछले 1 दशक में इंडिया ने फुटबॉल गेम में काफी अच्छा किया है और हमारी फीफा रैंकिंग भी काफी अच्छी हुई है. मुझे पूरी उम्मीद है कि एक दिन हमारा देश फुटबॉल वर्ल्डकप में जरुर खेलेगा.’

 

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