फ्लाइंग जट मिल्खा सिंह को पहली बार कैमरे में कैद करने वाले डायरेक्टर ने दी श्रद्धांजलि

अपनी तेज रफ्तार से देश को प्राउड फील कराने वाले मिल्खा सिंह पर साल 1962 में पहली शॉर्ट फिल्म फ्लाइंग सिख बनी थी. इसके डायरेक्टर दीपक हल्दांकर ने मिल्खा सिंह को याद करते हुए आजतक से कहा ऐसे लोग बार-बार नहीं जन्म लेते हैं.

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मिल्खा सिंह संग दीपक हल्दांकर मिल्खा सिंह संग दीपक हल्दांकर

अनुराग गुप्ता

  • मुंबई,
  • 20 जून 2021,
  • अपडेटेड 4:21 PM IST
  • जब मिल्खा सिंह पर बनी थी शॉर्ट फिल्म
  • डायरेक्टर ने शेयर किए रोचक किस्से
  • अच्छे निशानेबाज भी थे मिल्खा सिंह
दिग्गज एथलीट मिल्खा सिंह का 91 साल की उम्र में निधन हो गया. उनके निधन से देशभर में शोक की लहर देखने को मिल रही है. अपनी तेज रफ्तार से देश को प्राउड फील कराने वाले मिल्खा सिंह पर साल 1962 में पहली शॉर्ट फिल्म फ्लाइंग सिख बनी थी. इसके डायरेक्टर दीपक हल्दांकर ने मिल्खा सिंह को याद करते हुए आजतक से कहा ऐसे लोग बार-बार नहीं जन्म लेते हैं.

शूटिंग में भी बड़े अनुशासन के साथ करते थे काम

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दीपक हल्दांकर कहते हैं कि सबसे पहले तो मैं ऐसे शानदार इंसान, एक महान खिलाड़ी और एक देशभक्त को श्रद्धांजलि देता हूं. मैं खुशनसीब हूं कि मुझे उनके साथ काम करने का मौका मिला और सबसे पहले मैंने ही उन्हें अपने कैमरे से शूट किया. कुछ यादें मेरे जहन में आज भी ताजा हैं क्योंकि हमने उनके साथ 18 दिन बिताए थे. हम चंडीगढ़ में हमारी शॉर्ट फिल्म फ्लाइंग सिख की शूटिंग करने गए थे. मैं वो शॉर्ट फिल्म डायरेक्ट कर रहा था. कई बार हम लोग सीन के बारे में चर्चा करते थे. वो हमेशा टाइम पर होते थे और सबके साथ बड़े खुश मिजाज व्यवहार के साथ मेल-मिलाप करते थे. क्योंकि हमारी शॉर्ट फिल्म रियल कंटेंट पर आधारित थी तो एक महान इंसान के साथ काम करने का बड़ा अच्छा अनुभव रहा.  फिल्म के बाद भी कई बार हमारी मुलाकातें हुई लेकिन वो इंसान हमेशा एक जैसा ही लगा कभी बदला नहीं.

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शूटिंग के बाद हम सब को बुलाया घर खाने पर

मुझे याद है हमारा काम लगभग खत्म होने वाला था और हम 17 से 18 दिन शूट कर चुके थे. तो मिल्खा सिंह जी ने मुझे कहा कि यार तुम लोग हफ्तों से बाहर का खाना खा रहे हो, चालो आज रात को सब मेरे घर आओ. मैं तुम लोगों को घर का खाना खिलाता हूं. हम सब फिर उनके घर गए. उस वक्त तक उनकी दो ही बेटियां थीं. मोना और लीजा. उनकी धर्मपत्नी द्वारा हमारा वेलकम किया गया.

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हम सब ने साथ  बैठ कर खाना खाया. बहुत अच्छी तरह खातिरदारी की गई हमारी उस रात. मिल्खा जी के बड़े अच्छे दोस्त दुर्गा जी भी खाने पर आमंत्रित थे. जो बाद में चीफ हुए पंजाब फिल्म डिविजन के. खैर फिर शुरू हुआ हंसी-मजाक का दौर. दुर्गा जी मिल्खा सिंह पर ही जोक बना रहे थे और सब हंस रहे थे. खुद मिल्खा जी भी खूब एंजॉय कर रहे थे. सुबह तक ये सिलसिला चलता रहा. वो दिन मैं कभी नहीं भूल सकता.

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बेहतरीन एथलीट के साथ जबरदस्त निशानेबाज थे मिल्खा

मिल्खा जी हरफनमौला खिलाड़ी थे. एक बेहतरीन एथलीट के साथ वे बहुत अच्छे निशानेबाज भी थे. एक किस्सा मुझे याद आया. वैसे तो हम सुबह आठ बजे से शाम 5 बजे तक मिल्खा जी के साथ अपनी शॉर्ट फिल्म फ्लाइंग सिख की शूटिंग किया करते थे. लगभग 10 दिन हो चुके थे. चंडीगढ़ में हमें शूट करते हुआ एक दिन अचानक मिल्खा जी ने मुझसे कहा कि दीपक ऐसा है कि कल मैं शिकार खेलने जा रहा हूं. तुम भी मेरे साथ चलना. मैं तुम्हें तुम्हारे गेस्ट हाउस से पिक कर लूंगा. हम चंडीगढ़ से लगभग 25 किलोमीटर दूर जंगलों में गए और फिर वहां मिल्खा जी ने शिकार खेला और बहुत अच्छी निशानेबाजी हमें देखने को मिली. उन्हें शिकार पर जाने का बड़ा शौक था. मिल्खा जी के पास उनके गन कलेक्शन में कई सारी बंदूकें हुआ करती थीं लेकिन उनकी सबसे फेवरेट बीएसए गन थी वो ज्यादातर उसी का इस्तेमाल शिकार पर किया करते थे.


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