अखबार में लिपटी रोटियां-पेंट के डिब्बों में आती थी दाल, ऐसा था फुकरे के चूचा का एक्टिंग स्ट्रगल

4 फरवरी 1990 को जलंधर में जन्मे वरुण शर्मा को शाहरुख खान की फिल्म बाजीगर देखकर पहली बार एक्टर बनने का भूत चढ़ा था. वरुण ने अपने 5 साल के करियर में जितनी भी फिल्में की हैं उनमें उनके काम को बहुत सराहा गया है.

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वरुण शर्मा वरुण शर्मा

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 04 फरवरी 2021,
  • अपडेटेड 7:22 AM IST

बॉलीवुड एक्टर वरुण शर्मा गुरुवार को अपना 31वां जन्मदिन सेलिब्रेट कर रहे हैं. पंजाब के रहने वाले वरुण शर्मा को अपनी अब तक की फिल्मों में ज्यादातर उनकी कॉमेडी के लिए सराहा गया है. हालांकि, आपको शायद ही ये बात मालूम हो कि वरुण को कभी नहीं लगा था कि वह अपने अंदाज से किसी को हंसा पाएंगे.

4 फरवरी 1990 को जलंधर में जन्मे वरुण शर्मा को शाहरुख खान की फिल्म बाजीगर देखकर पहली बार एक्टर बनने का भूत चढ़ा था. वरुण ने अपने 5 साल के करियर में जितनी भी फिल्में की हैं उनमें उनके काम को बहुत सराहा गया है. हालांकि अभी भी उन्हें हिंदी सिनेमा में बहुत लंबा सफर तय करना है लेकिन जहां वो आज हैं वहां तक आने के लिए भी उन्हें बहुत संघर्ष करना पड़ा है.

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हीरो बताकर साइड आर्टिस्ट बनाया

वरुण ने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब वह सिनेमा जगत में आए तो उनके साथ किस तरह का व्यवहार किया जाता था. वरुण ने इस इंटरव्यू में बताया था कि किस तरह एक बार उन्हें हीरो का दोस्त बताकर बैकग्राउंड आर्टिस्ट के तौर पर साइन कर लिया गया था. वरुण ने बताया कि उन्हें चार लाइनों पर साइन करा कर कहा गया कि ये उनका कॉन्ट्रैक्ट है और उन्हें बतौर लीड हीरो कास्ट किया जा रहा है.

वरुण ने बताया, "उन्होंने मुझसे कहा कि बेटा यही कॉन्ट्रैक्ट है, इस पर साइन कर दो. और मुझे उस वक्त जानकारी नहीं थी, अभी समझ आता है कि क्या है. मैंने साइन कर दिया. मैं वहां गया तो हमें ट्रेन से भेजा गया. तो मैं ट्रेन से पहुंच गया वहां पर. मुझे सेट पर जाकर पता चला कि जब प्रोसेस शुरू हुआ तो कि मैं हीरो का दोस्त नहीं था मैं बैकग्राउंड आर्टिस्ट था."

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पेंट के डिब्बों में मिला था खाना

वरुण ने कहा, "...उन्होंने ये बात मुझे बताई नहीं. तो मेन लोग खड़े होते थे और मैं पीछे अपना चलता रहता था. फिर कुछ होता था और मैं पीछे चलता रहता था. मुझे लगा चलो कोई बात नहीं है एक्सपीरियंस होगा, कर लेता हूं. एक दिन खाने की बात आई. उन्होंने हमें पेंट के डिब्बों में खाना दिया. पेंट का ब्रांड का नाम बाहर लिखा हुआ था. अंदर फॉयल पेपर लगाया हुआ था और बाहर तो फॉयल पेपर भी नहीं था."

वरुण ने बताया कि पेंट के डिब्बे आए थे. एक में थी दाल, एक में चावल, एक में थी सब्जी और अखबार में थी रोटी. वरुण ने बताया कि ये घटना उनके साथ 2011-12 में हुई थी.

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