महिला सशक्तिकरण और बाल विवाह के साथ-साथ प्रधानमंत्री के स्लोगन "बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ" जैसे विषय पर आधारित एक बेहतरीन फिल्म "द टेल ऑफ राइजिंग रानी" जिसने रिलीज़ होने से पहले ही कर लिए है कई सारे अवॉर्ड्स अपने नाम. आजतक से ख़ास बात चीत में फिल्म के डायरेक्टर प्रकाश सैनी ने बताई अपनी फिल्म राइजिंग रानी की कहानी.
रिलीज से पहले ही फिल्म फेस्टिवल्स में छा चुकी है फिल्म, जीते दर्जनों अवॉर्ड्स
प्रकाश सैनी ने कहा, "जी हां, हमारी फिल्म "द टेल ऑफ राइजिंग रानी " को बहुत सराहा गया, जिसने दुनिया भर में भारत का नाम रोशन किया और कहानी को भी बहुत पसंद किया गया. और इस फिल्म में इंडियन मामी फिल्म फेस्टिवल, ऑस्टिन 53वें वर्ल्डफ़ेस्ट ह्यूस्टन, लंदन इंडिपेंडेंट फिल्म अवार्ड्स, वर्ल्ड फिल्म कार्निवल, सिंगापुर ओनर्स फिल्म अवॉर्ड्स इटली में अपने नाम किया.''
''वहीं लंदन ग्रीक फिल्म फेस्टिवल लॉस एंजेलिस, फिल्म फेस्टिवल अवॉर्ड्स में सेमी फाइनालिस्ट की जगह हासिल की. इसके अलावा न्यूयॉर्क शहर स्वतंत्र फिल्म समारोह, कोलंबिया फिल्म कला महोत्सव इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भी इसका आधिकारिक चयन हुआ. कुल मिलाकर इस फिल्म ने दुनियाभर के फिल्म फेस्टिवल में जम कर धूम मचाई जिसके लिए मैं अपनी सारी टीम का तहे दिल से आभारी हूं.''
हाथरस में हुई रियल कास्ट के साथ फिल्म "द टेल ऑफ राइजिंग रानी" की शूटिंग
''जी हां, फिल्म की कहानी हाथरस जंगशन के गांव पर आधारित है, जिसमें सारे के सारे रियल कैरेक्टर हैं. हमने इस फिल्म में सारे नॉन एक्टर्स से एक्टिंग कराई है फिल्म में आपको कोई भी मार्केट का जाना पहचाना चेहरा नहीं दिखेगा. यही खासियत है हमारी फिल्म की और हमने सारी शूटिंग रियल लोकेशन यानी हाथरस में ही की है. फिल्म की कहानी की अगर बात करूं तो ये कहानी है एक लड़की जिसका नाम रानी है उसके परिवार में उसका पिता जिनकी उसकी चार बेटियां और दो बेटे है उनमें से ही एक का नाम रानी है. जैसा आम तौर पर देखा जाता है की लड़कियों को ही समझौता करना पड़ता है, अपनी आकांक्षाओं का गाला घोंटना पड़ता है और जिस उम्र में उनको अपने परिवार की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, उस उम्र में उनकी शादी कर दी जाती है. तो कैसे इस तरह जिससे बच्चियों को न्याय नहीं मिल पाता है. सच्ची घटनाओं और अन्यायपूर्ण पंचायत प्रणाली के आधार पर विकसित इस फिल्म में दिखाया गया है, समाज की दकियानूसी सोच और मानसिकता के कारण कैसे एक मासूम लड़की की जिंदगी बिखर जाती है. हमारी फिल्म की हीरो रानी कैसे इस समाज और सिस्टम से लड़ती है और जीत हासिल करती है. यही है हमारी फिल्म की कहानी जो बहुत जल्द आपके सामने होगी.''
बल्लभगढ़ की बेटी और हाथरस की निर्दोष लाडली पर बोले फिल्म मेकर प्रकाश सैनी
''मैं बस यही कहूंगा की जो देश में इस वक़्त हो रहा है बहुत निंदा करने योग्य है. कैसे हमारी बहू- बेटियां सुरक्षित रहे. इस के लिए भी एक जागरूकता फैलाने की जरूरत है. इस तरह का अपराध करने वालों को किसी न किसी माध्यम से ये बताया जाए की बलात्कार जैसे अपराधों के आरोपियों को कितनी कड़ी सजा दिए जाने का प्रावधान है. हमारे देश में है ये उन्हें जागरूकता के माध्यम से पता चले और कोई भी ऐसा अपराध करने की सोच भी न रखे. हमारी फिल्म में भी यही संदेश है की जागरूकता कितनी जरूरी है चाहे वो शिक्षा समाज और बेटिओं की हक़ की बात हो या उनकी सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर जागरुक होने की बात हो. मुझे लगता है अपराध और अपराधियों पर अंकुश जरूर लगेगा. जब इनको पता चलेगा की सजा कितनी कड़ी भुगतनी पड़ेगी और इस साथ ही ये भी कहना चाहूंगा की इस तरह का अमानवीय अपराध करने वालों को कड़ी से कड़ी सजा भी मिले.''
अनुराग गुप्ता