सिनेमैटोग्राफ अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव और केंद्र को प्रदान की जाने वाली संशोधन शक्ति को शुक्रवार के दिन छह प्रमुख फिल्म उद्योग संगठनों और फिल्म संस्थानों के दो छात्र संघों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा. दरअसल भारत सरकार एक ऐसा कानून लाना चाहती है जिसके द्वारा सेंसर बोर्ड में फिल्मों के पास होने के बावजूद भी अगर फिल्म को लेकर समाज में कोई गतिरोध पैदा होता है तो उस स्थिति में सरकार उस फिल्म पर रोक लगा सकती है. इस बारे में बात करते हुए फिल्म निर्माता और IFTDA के अध्यक्ष अशोक पंडित ने आजतक से सामने अपनी राय जाहिर की.
पारदर्शिता से समझौता नहीं
फिल्ममेकर अशोक पंडित कहते हैं कि ‘भारत सरकार एक ऐसा कानून लाना चाहती है जहां फिल्मों को सेंसर बोर्ड से पास करवाने के बाद भी सरकार द्वारा किसी तरह की आपत्ति होने पर उस फिल्म को रोकने का अधिकार मिल सके. इसी विषय में सूचना एंव प्रसारण मंत्रालय ने हमसे हमारे सुझाव मांगे थे जिसकी कल आखिरी तारीख थी.’
सेंसर बोर्ड की अहमियत को समझा जाए
अशोक पंडित कहते हैं कि ‘अगर सरकार किसी फिल्म को सेंसर बोर्ड की मंजूरी के बाद भी रोकने का अधिकार अपने पास रखना चाहती है तो फिर ऐसे में सेंसर बोर्ड का क्या मतलब रह जाता है. हम सब जानते हैं कि सेंसर बोर्ड का गठन इसलिए किया गया कि अगर किसी फिल्म से किसी धर्म, संप्रदाय या फिर देश की छवि को किसी भी तरह का नुकसान पहुंचता है तो सेंसर बोर्ड उस पर अपनी कैंची चलाए. अब ऐसे में अगर सरकार ऐसा फैसला करने की सोच रही है तो फिर सेंसर बोर्ड का क्या मतलब रह जाएगा. हमारा ये कहना है कि अगर किसी को फिल्म से कोई आपत्ति है तो वो कोर्ट में जाकर फिल्म को रुकवाने के लिए स्टे ऑडर ले नाकि सरकार की मदद से फिल्म को रोकने की कोशिश करे.’
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छोटे फिल्ममेकर्स को होगा काफी नुकसान
अपनी आपत्ति को जाहिर करते हुए अशोक पंडित आगे कहते हैं कि ‘हमारे देश में सारे फिल्म मेकर्स इतने अमीर नहीं हैं जो इस तरह की मार को झेलकर भी नुकसान में नहीं आएंगे. आप जानते हैं कि छोटे-मोटे फिल्ममेकर किसी फिल्म को बनाने के लिए कैसे पैसों का इंतजाम करते हैं. अगर ऐसा कानून आता है तो जरा सोचिए उन्हें कितना नुकसान होगा, वो बेचारे तो कहीं के नहीं रहेंगे.’
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हैं उम्मीदें
सरकार पर अपना विश्वास जाहिर कहते हुए अशोक पंडित कहते हैं कि ‘मुझे लगता है कि ये काम किसी नौकरशाह का है जिसने इस तरह का कानून बनाने की सोची है लेकिन मुझे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार पर पूरा भरोसा है. मुझे यकीन है कि सरकार हमारी परेशानी के बारे में जरुर सोचिए और सही फैसला लेगी.’
जयदीप शुक्ला