बीते महीने डायरेक्टर पायल कपाड़िया की फिल्म 'ऑल वी इमैजिन एज लाइट' ने कान्स फिल्म फेस्टिवल में अवॉर्ड जीता था जो पूरे देश के लिए गर्व की बात थी. फिल्म इंडस्ट्री से हर कोई पायल को बधाई दे रहा था. पर डायरेक्टर अनुराग कश्यप का इसपर कुछ और ही कहना है. अनुराग ने हाल ही में इंडिया टुडे संग बातचीत पर कहा कि पायल जिस तरह की फिल्ममेकर हैं, उनके लिए फिल्म इंडस्ट्री में सर्वाइव करना मुश्किल हो सकता है. सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री में ही क्या इंडिया में सर्वाइव करना उनके लिए मुश्किल है.
अनुराग ने ऐसा क्यों कहा?
डायरेक्टर ने कहा- कान्स में जो 4 फिल्में सिलेक्ट हुईं, उनका इंडिया से कुछ लेना-देना नहीं है. इंडिया को इसका क्रेडिट लेना बंद कर देना चाहिए. इस तरह की फिल्मों में जब तक इंटरनेशनल प्रोडक्शन इन्वॉल्व नहीं होता है, तब तक इन्हें इंटरनेशवल लेवल पर पहचान नहीं मिलती है.
"भारत ने पायल कपाड़िया को उनकी फिल्म पर मिलने वाली 30 फीसदी की छूट भी नहीं दी है. इसलिए हमें उनकी जीत को क्रेडिट देना बंद कर देना चाहिए. जिस तरह की फिल्में वो बनाती हैं, वो इस देश के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं. बिना फॉरेन सपोर्ट के बन ही नहीं सकती. हम लोगों ने 'लंचबॉक्स', 'मसान' और 'मॉनसून शूटटआउट' बनाई हैं. हम लोग ये फिल्म बिना किसी को-प्रोडक्शन के बना ही नहीं पाते."
फिल्म बिजनेस पर अनुराग ने कहा- इंडिया नंबर्स से ऑब्सेस्ड है. और इसी के बेसिस पर फिल्म को जज किया जाता है. क्रिएटिव इंसान भी इसी आंकड़े को देखता है. यहां पर फिल्में एक ही हिसाब से देखी जाती है कि पैसा कितने कमा रही है. पर आप और भी चीजों से पैसा कमा सकते हैं. तो यहां पायल कपाड़िया सर्वाइव ही नहीं कर सकती है, वो भी बतौर फिल्ममेकर. ये एक बहुत ही लंबी और सख्त रोड है, लोगों का यहां कोई नजरिया नहीं है. ये लोग सिर्फ बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों तक ही सीमित हैं.
इन चीजों को कैसे बदल सकते हैं?
अनुराग ने इस सवाल पर कहा- ट्रेड के लोग जब तक बिजनेस को कन्ट्रोल करके बैठे हैं, तब तक आपको फिल्म के आंकड़ों में काफी डिफरेंस देखने को मिलेगा. वो लोग एक ही टेबल पर बैठकर एक साथ तय नहीं करते हैं. हर किसी का अपना एक अलग नजरिया है. हम लोगों को एक ट्रांसपेरेंट सिस्टम की जरूरत है. चाइना में आप ऑनलाइन जा सकते हैं और देख सकते हैं कि एक फिल्म ने कितना बिजनेस किया वो भी शो बाय शो, सिनेमा बायसिनेमा और सीट बाय सीट. और इस तरह की ट्रांसपेरेंसी यहां इंडिया में मिसिंग है. हम लोगों की पॉपुलेशन 1.4 बिलियन है और 20 हजार स्क्रीन्स हैं. कैसे इंडिया में सिनेमा सर्वाइव कर सकता है. पहले NFDC (नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन) कुछ फिल्मों को सपोर्ट करता था. इसमें 'जाने भी दो यारो' शामिल रही. पर अब वो भी बंद हो गया है. सब दिखावा है. सब्सिडी भी सिर्फ वादे पर चलती है जो कभी पे नहीं की जाती.
"कान्स में शामिल होने वाली फिल्में सिर्फ और सिर्फ इंडियन पैसे से नहीं बनती हैं. संध्या सूरी की फिल्म 'संतोष' और करण कन्धारिया की फिल्म 'सिस्टर मिडनाइट' यूके के पैसों से बनी थीं. पायल कपाड़िया को फ्रांस का सपोर्ट है. सिर्फ इंडिया के पैसों पर एक भी फिल्म नहीं बनी है, इसलिए क्रेडिट लेना बंद करो."
वर्कफ्रंट की बात करें तो अनुराग कश्यप की वेब सीरीज 'बैड कॉप'जल्द ही हॉटस्टार पर रिलीज होने वाली है. इसमें गुल्शन देवय्या लीड रोल में नजर आने वाले हैं. आदित्य दत्त ने इसका डायरेक्शन संभाला है.
सना फरज़ीन