उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले की एक विधानसभा सीट है खैर विधानसभा सीट. खैर विधानसभा सीट से 2017 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उम्मीदवार को जीत मिली थी. खैर विधानसभा सीट अलीगढ़ जिले की आरक्षित सीट है. इस बार खैर विधानसभा सीट के लिए पहले चरण में यानी 10 फरवरी को मतदान होना है जिसके लिए सभी सियासी दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है. खैर सीट से बीजेपी ने अपने निवर्तमान विधायक को ही उम्मीदवार बनाया है. वहीं, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने एमबीबीएस की छात्रा चारू केन को टिकट दिया है.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
खैर विधानसभा सीट की राजनीतिक पृष्ठभूमि की बात करें तो ये विधानसभा सीट साल 1962 में अस्तित्व में आई थी. चैतन्य राज सिंह इस विधानसभा सीट से पहले विधायक निर्वाचित हुए. इस सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवारों को भी तीन दफे जीत मिली है. साल 1980 के बाद से कांग्रेस ये सीट जीत नहीं पाई है. यहां अधिकतर राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) और बसपा के उम्मीदवारों के बीच ही मुकाबला अधिक रहा है. इस सीट पर कभी सपा का खाता नहीं खुल सका है.
2017 का जनादेश
खैर विधानसभा सीट से साल 2017 के जनादेश की बात करें तो कुल 10 उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरे थे. बीजेपी की ओर से अनूप प्रधान, बसपा की ओर से राकेश मौर्य, आरएलडी की ओर से ओमपाल अपनी किस्मत आजमा रहे थे. चुनावी बाजी तब बीजेपी के हाथ लगी थी. बीजेपी के अनूप प्रधान ने बसपा के राकेश मौर्य को 70 हजार वोट से अधिक के अंतर से हरा दिया था. आरएलडी के ओमपाल तीसरे और सपा के उम्मीदवार को चौथे स्थान से संतोष करना पड़ा था.
सामाजिक ताना-बाना
खैर विधानसभा क्षेत्र में हर जाति वर्ग के लोग रहते हैं. इस विधानसभा सीट की गिनती अनुसूचित जाति बाहुल्य सीटों में की जाती है. इस विधानसभा क्षेत्र में अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाता भी विधानसभा चुनाव का परिणाम निर्धारित करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं.
विधायक का रिपोर्ट कार्ड
खैर विधानसभा सीट से विधायक अनूप का जन्म अलीगढ़ के ही गडराना गांव में हुआ था. 41 साल के अनूप ने सुभारती यूनिवर्सिटी से बीए तक की पढ़ाई की है. 2010 में ग्राम प्रधान निर्वाचित होकर सियासी सफर का आगाज करने वाले अनूप 2012 के विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे थे लेकिन तब उन्हें हार मिली थी. अनूप का दावा है कि उनके कार्यकाल में विधानसभा क्षेत्र रके हर इलाके का विकास हुआ है.
अकरम खान