उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले की पहचान योगीराज देवरहवा बाबा की तपोस्थली और बाबा राघव दास की कर्मस्थली के तौर पर रही है. देवरिया कभी गन्ना उत्पादन के लिहाज से महत्वपूर्ण स्थान रखता था. इसे चीनी का कटोरा कहा जाता था. यहां 14 चीनी मिल हुआ करती थी. कुशीनगर जिला बनने के बाद यहां छह चीनी मिल रह गई और शेष कुशीनगर जिले में चली गईं. छह मिलें भी या तो बंद हो गईं या बिक गईं. इस वजह से किसानों ने गन्ने की खेती से मुंह मोड़ लिया. आज केवल बजाज मिल प्रतापपुर ही चालू है.
देवरिया जिला रामचंद्र विद्यार्थी के नाम और जल जौहर से भी पहचान रखता है. आजादी की लड़ाई में कक्षा 5 के छात्र रामचंद्र विद्यार्थी मात्र 14 साल की उम्र में ही पुरानी कचहरी पर तिरंगा फहराते हुए अंग्रेजों की गोली से शहीद हो गए थे. जिले के पैना गांव की सैकड़ों महिलाओं ने अंग्रेजों से अपने सतीत्व की रक्षा के लिए सरयू नदी में जल समाधि ले ली थी जिसे इतिहास के पन्नो में जल-जौहर भी कहा जाता है. यह एक ऐतिहासिक,पौराणिक और धार्मिक स्थल है. सरयु नदी देवरिया जिले से गुजरती है.
देवरिया जिले के सिद्धपीठ में देवरही माता का मंदिर, अहिल्यापुर दुर्गा मंदिर, बाबा दुग्धेश्वरनाथ मंदिर, बाबा दीर्घेश्वर नाथ मंदिर, भगवान परशुराम का मंदिर है. देवरिया जिले के कई क्षेत्र सरयू नदी, राप्ती नदी, गोर्रा नदी और छोटी गंडक नदी के किनारे बसे हैं. बरहज कस्बे के जहाजघाट से जलमार्ग के जरिए ढाका तक व्यापार होता था. बरहज के बाबा राघव दास आश्रम में क्रांतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल की समाधि है. देवरिया जिला यूपी के बलिया, गोरखपुर, कुशीनगर और बिहार के सिवान, गोपालगंज जिले से सटा है.
कांग्रेस का गढ़ रहा है देवरिया
देवरिया जिला सन 1990 के पहले सोशलिस्ट और कांग्रेसियों का गढ़ रहा है. 1990 के बाद कांग्रेस का इस जिले से लगभग सफाया हो गया और अधिकांश विधानसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और समाजवादी पार्टी ही आमने-सामने रही हैं. देवरिया जिले में कुल सात विधानसभा सीटें हैं. 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी जिले की सात में से छह सीटों पर जीती थी. एक सीट सपा को मिली थी. कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का यहां से सफाया हो गया था. देवरिया जिले में लोकसभा की दो सीटें- देवरिया सदर और सलेमपुर हैं. दोनों सीट पर 2019 के चुनाव में बीजेपी जीती थी.
रूद्रपुर विधानसभा सीट पर बीजेपी काबिज
देवरिया जिले की रुद्रपुर विधानसभा सीट (Rudrapur Assembly) बीजेपी के कब्जे में है. इस विधानसभा क्षेत्र में तीन लाख से अधिक मतदाता हैं. यहां सर्वाधिक सवर्ण मतदाता हैं और इसके बाद नंबर आता है ओबीसी और अल्पसंख्यक मतदाताओं का. 1967 तक सुरक्षित रहा ये विधानसभा क्षेत्र राप्ती और गोरा नदी से घिरा है. 2012 में इस सीट से कांग्रेस के अखिलेश प्रताप सिंह और 2017 में बीजेपी के जयप्रकाश निषाद विधायक निर्वाचित हुए. जयप्रकाश निषाद योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार में मंत्री भी हैं. 1957 के बाद इस सीट से कोई भी लगातार दो बार चुनाव नहीं जीता है.
सदर सीट से बीजेपी के सत्य प्रकाश विधायक
देवरिया सदर विधानसभा सीट (Deoria sadar Assembly) शहरी क्षेत्र की सीट मानी जाती है. इस विधानसभा सीट पर बसपा का खाता नहीं खुल सका है. यहां से 2017 में बीजेपी के जन्मेजय विधायक निर्वाचित हुए थे. 2020 के उपचुनाव में पार्टी के डॉक्टर सत्य प्रकाश मणि विधायकी जीते. ये सीट भी सवर्ण बाहुल्य सीट है. यहां ओबीसी मतदाता भी अच्छी तादाद में हैं. 2012 से बहबी ये सीट बीजेपी के कब्जे में है.
पथरदेवा से विधायक हैं मंत्री सूर्य प्रताप शाही
पथरदेवा विधानसभा क्षेत्र (pathardeva Assembly) 2012 के चुनाव से अस्तित्व में है. इस विधानसभा क्षेत्र में सवा तीन लाख से अधिक वोटर हैं. यहां मुस्लिम और ओबीसी मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं. 2012 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से सपा के शाकिर अली जीते थे तो 2017 में ये सीट बीजेपी के पास चली गई. सूबे की सरकार में कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रताप शही इसी विधानसभा सीट से विधायक हैं.
सवर्ण बाहुल्य है रामपुर कारखाना सीट
रामपुर कारखाना विधानसभा सीट (Rampurkarkhana Assembly) भी 2012 में अस्तित्व में आई थी. 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा की गजाला लारी इस विधानसभा सीट से विधायक निर्वाचित हुई थीं. 2017 में बीजेपी के कमलेश शुक्ला जीते. इस विधानसभा क्षेत्र में कुल करीब साढ़े तीन लाख मतदाता हैं जिनमें सवर्ण मतदाताओं की तादाद सबसे अधिक है.
भाटपाररानी में कभी नहीं खिला कमल
भाटपाररानी विधानसभा सीट (Bhatparrani Assembly) ओबीसी बाहुल्य सीट है. यहां कुर्मी वोटरों की संख्या अधिक है. आजादी के बाद से अब तक इस क्षेत्र से कभी बीजेपी के उम्मीदवार को जीत नहीं मिली है. यहां के मतदाता अक्सर लहर के विपरीत मतदान करते हैं. 1984 के चुनाव में इंदिरा लहर के बावजूद यहां से निर्दलीय कामेश्वर उपाध्याय जीते थे. 2017 में सपा के आशुतोष उपाध्याय ने बाजी मारी. जिला मुख्यालय से आवागमन का साधन न होना इस क्षेत्र का खास मुद्दा है.
सलेमपुर रहा है सोशलिस्टों का गढ़
सलेमपुर विधानसभा सीट (Salemur Assembly) कांग्रेस और सोशलिस्टों का गढ़ रही है. 1980 के चुनाव में बीजेपी ने देवरिया में पहली बार कोई सीट जीती थी और वो सीट सलेमपुर सीट ही थी. 2012 के परिसीमन में ये सीट सुरक्षित सीट कर दी गई. 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा के मनबोध प्रसाद यहां से जीते तो 2017 में बीजेपी के काली प्रसाद.
बरहज से बीजेपी के सुरेश तिवारी हैं विधायक
बरहज विधानसभा क्षेत्र (Barahaj Assembly) का बरहज कस्बा सरयू नदी के तट पर स्थित है. अंग्रेजों के जमाने में ये प्रमुख व्यापारिक केंद्र हुआ करता था. 2012 के चुनाव में यहां से सपा के प्रेम प्रकाश सिंह चुनाव जीते थे. 2017 में यहां से बीजेपी के सुरेश तिवारी विधायक बने. इस विधानसभा क्षेत्र में कुल तीन लाख से अधिक वोटर हैं.
राम प्रताप सिंह