कानपुर शहर में बीजेपी का दबदबा, क्या इस बार किला बचा पाएगी योगी सरकार

गंगा के दक्षिणी तट पर बसे कानपुर की प्रदेश की राजधानी लखनऊ से दूरी सिर्फ 80 किलोमीटर है इसलिए राजनीतिक दृष्टि से भी यह सभी राजनीतिक पार्टियों के लिए बेहद अहम है.

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कानपुर रेलवे स्टेशन कानपुर रेलवे स्टेशन

रंजय सिंह

  • कानपुर,
  • 03 जनवरी 2022,
  • अपडेटेड 8:22 PM IST
  • चमड़ा उद्योग के लिए पूरे देश में चर्चित है कानपुर
  • कानपुर में बीजेपी का दबदबा, चुनाव में किला बचाने की चुनौती

गंगा नदी के तट पर बसे कानपुर शहर को उत्तर प्रदेश के औद्योगिक नगरी के रूप में जाना जाता है. इस शहर में मुख्य रूप से चमड़ा उद्योग है. गंगा के दक्षिणी तट पर बसे कानपुर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से दूरी सिर्फ 80 किलोमीटर है इसलिए राजनीतिक दृष्टि से भी यह सभी राजनीतिक पार्टियों के लिए बेहद अहम है.

कानपुर की अनुमानित आबादी 2021 में लगभग  50 ,46 ,772 है जिसमे पुरुषों की संख्या  27 ,09 ,749 (अनुमानित) है जबकि महिलाओं की संख्या 23 ,35 ,023 (अनुमानित) है.

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अगर कापुर शहर के राजनीतिक पृष्ठभूमि को देखें तो इस जिले ने राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री तक का सफर तय किया है.

वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार के दो कैबिनेट मंत्री और एक राज्य मंत्री कानपुर से आते हैं. राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद का गांव पहले कानपुर में ही आता था. बाद में उनका गांव कानपुर देहात में शामिल हो गया. बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी कानपुर के डीएवी कालेज से पढ़ाई की थी.

कानपुर का इतिहास

जानकारों की मानें तो, इस शहर का नाम ही सोमवंशी राजपूतों के राजा कान्हा सोम पर पड़ा था. इनके वंशज कान्हावंशी कहलाए. कानपुर का मूल नाम 'कान्हपुर' था. इस नगर की उत्पत्ति को महाभारत काल के बड़े वीर कर्ण के नाम से भी जाना जाता है.

अवध के नवाबों के शासनकाल के अंतिम चरण में यह नगर पुराना कानपुर, पटकापुर, कुरसवां, जुही और सीमामऊ गांवों के मिलने से बना था. पड़ोस के प्रदेश के साथ इस नगर का शासन भी कन्नौज तथा कालपी के शासकों के हाथों में रहा. 1801 से अवध के नवाब अलमास और अन्य मुसलमान शासकों ने यहां शासन किया.

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1773 की संधि के बाद कानबुर अंग्रेजों के शासन के अधीन हो गया था. 1778 में यहां अंग्रेज छावनी बनी. गंगा के तट पर स्थित होने के कारण यहां यातायात और उद्योगों की सुविधा थी. अंग्रेजों ने यहां उद्योगों को विकसित किया जिससे यहां नगर विकास शुरू हुआ. सबसे पहले ईस्ट इंडिया कंपनी ने यहां नील का व्यवसाय शुरू किया था. 

1832 में ग्रैंड ट्रंक सड़क के बन जाने पर कानपुर इलाहाबाद से जुड़ गया. 1864 में इस शहर को लखनऊ, कालपी आदि मुख्य स्थानों से मार्गों द्वारा जोड़ दिया गया.

कानपुर का सामाजिक तानाबाना

कानपुर शहर में करीब 76 फीसदी हिंदू आबादी, 20 फीसदी मुस्लिम और चार फीसदी अन्य समुदाय के लोग रहते हैं. कानपुर में सिख समुदाय की आबादी करीब 2 फीसदी है. 2011 की जनगणना के अनुसार कानपुर शहर की कुल जनसंख्या  45,81,268 है.

वैसे तो कानपुर में कई बड़ी-बड़ी घटनाएं हुई. 1984 के दंगे में भी इस शहर ने बहुत कुछ देखा था लेकिन हाल ही में 10 जुलाई को हुए घटनाक्रम ने पूरे देश को हैरान कर दिया था. कानपुर देहात के बिकरु गांव में 8 पुलिसकर्मियों को कुख्यात अपराधी विकास दुबे ने मौत के घाट उतार दिया था.

कानपुर का राजनीतिक समीकरण

कानपुर में विधानसभा की कुल 10 सीटें हैं जो बिल्हौर, बिठूर, कल्यानपुर, महाराजपुर, घाटमपुर, छावनी, किदवई नगर, गोविन्द नगर, आर्य नगर और सीसामऊ है.

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इन दस सीटों में सात सीटों पर बीजेपी, दो सीटों पर समाजवादी पार्टी और एक सीट पर कांग्रेस का कब्जा है. बिल्हौर से बीजेपी भगवती सागर  कल्याणपुर से मंत्री नीलिमा कटियार  बिठूर से अभजीत सिंह सांगा किदवई नगर से महेश त्रिवेदी  घाटमपुर  से उपेंद्र पासवान महाराजपुर से कैबिनेट मंत्री सतीश महाना और गोविन्द नगर से सुरेंद्र मैथानी विधायक हैं जबकि सीसामऊ और आर्य नगर से सपा के इरफ़ान सोलंकी और अमिताभ वाजपेयी विधायक है . कैंट सीट से कांग्रेस के सुहैल अंसारी विधायक हैं.

गोविन्द नगर विधानसभा सीट से बीजेपी सांसद सत्यदेव पचौरी 2017 में विधान सभा में जीते थे लेकिन सांसद बनने पर यहां हुए उपचुनाव में बीजेपी से ही सुरेंद्र मैथानी चुनाव जीते हैं जबकि घाटमपुर से मंत्री कमल रानी वरुण की कोरोना से मौत के बाद उपेंद्र पासवान उपचुनाव जीते है.

समस्याएं और मुद्दे

कानपुर में लंबे समय से ट्रैफिक की समस्या चली आ रही है. कानपुर में रेलवे जंक्शन होने के कारण प्रतिदिन लाखों यात्रियों का स्टेशन से आना-जाना होता है. आसपास के कई जिलों के लिए यहां से ट्रेनें बदली जाती हैं इससे भी यातायात दबाव अधिक रहता है. 

कानपुर में घनी बस्तियों होने के कारण सड़कों की हालत अक्सर खराब रहती है. कानपुर में जलभराव को समस्या का मुख्य कारण माना जाता है. घनी आबादी होने की वजह से नाले और नालियों की स्थिति ठीक नहीं रहती है जिसके कारण शहर की मुख्य सड़कों पर भी जलभराव देखने को मिलता है.

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कानपुर में बेरोजगारी शहर का मुख्य मुद्दा है. बंद पड़ी मीलों के कारण लाखों लोग बेरोजगार हुए थे तब से लेकर आज तक कानपुर में बेरोजगारी एक मुख्य मुद्दा बन गया है. कानपुर कोलकाता के बाद भारत में कपड़े का सबसे बड़ा उत्पादक शहर था.  इन मिलों के बंद होने के बाद शहर ने अपनी मुख्य पहचान को खो दिया.

कानपुर लेदर इंडस्ट्री का प्रमुख केंद्र है लेकिन यहां गंगा की स्वच्छता के चलते अक्सर यहां की टेनरियों को बंद करना पड़ता है. कानपुर में गंगा प्रदूषण सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है.

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