Barkhera Assembly Seat: वरुण गांधी की 'नाराजगी' पड़ेगी भारी, बीजेपी क्या बचा पाएगी अपनी सीट?

बरखेड़ा विधानसभा सीट पूरी तरह से ग्रामीण इलाकों की सीट है. इस विधानसभा क्षेत्र के लोग खेती-किसानी पर निर्भर हैं और धान, गेंहू, गन्ना यहां की मुख्य फसल है.

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 यूपी Assembly Election 2022 बरखेड़ा विधानसभा सीट यूपी Assembly Election 2022 बरखेड़ा विधानसभा सीट

सौरभ पांडे

  • पीलीभीत,
  • 12 दिसंबर 2021,
  • अपडेटेड 11:12 AM IST
  • बीजेपी के किशन लाल राजपूत हैं बरखेड़ा से विधायक
  • मेनका गांधी, वरुण गांधी का भी है अच्छा प्रभाव

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में बरखेड़ा विधानसभा सीट आती है. पूरी तरह से ग्रामीण परिवेश की इस विधानसभा सीट के तहत पीलीभीत, बीसलपुर,पूरनपुर के बीच का ग्रामीण क्षेत्र आता है. बरखेड़ा विधान सभा क्षेत्र में बरखेड़ा नगर पंचायत भी आती है. बरखेड़ा नाम को लेकर एक कहावत है कि बरगदों की श्रृंखला से घिरा हुआ नगर और राजा के रहने का स्थान काफी ऊंचा यानी खेड़ा होने के कारण इसका नाम बरखेड़ा पड़ा.

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बरखेड़ा विधानसभा सीट पूरी तरह से ग्रामीण इलाकों की सीट है. इस विधानसभा क्षेत्र के लोग खेती-किसानी पर निर्भर हैं और धान, गेंहू, गन्ना यहां की मुख्य फसल है. यहां बंगाली समुदाय के लोग भी अपनी कॉलोनी बनाकर रहते हैं. इन लोगों का मुख्य व्यवसाय बीड़ी बनाना और चटाई बनाना है. मुस्लिम आबादी लकड़ी के फर्नीचर बनाने के व्यवसाय से जुड़े हैं.

राजनीतिक पृष्ठभूमि

बरखेड़ा विधानसभा सीट साल 1967 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई. 1967 में इस सीट के लिए पहली दफा विधानसभा चुनाव हुआ और जनसंघ के किशोरी लाल जीते. जनसंघ के किशोरी लाल 1967 के साथ ही 1969 और 1974 में भी विजयी रहे. 1977 में किशोरी लाल ने जीत का चौका लगाया, लेकिन इस बार पार्टी थी जनता दल.

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बरखेड़ा विधानसभा सीट से 1980 में कांग्रेस (आई) के बाबू राम,1985, 1991 और 1993 में बीजेपी के किशन लाल, 1989 में निर्दलीय सन्नू लाल, 1996 और 2002 में सपा के पीतम राम, 2007 में बीजेपी के सुखलाल जीते. 2012 में इस विधानसभा सीट से फिर सपा के उम्मीदवार को विजय मिली. बरखेड़ा विधानसभा सीट से सपा के हेमराज वर्मा जीते और अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री भी बने.

2017 का जनादेश

बरखेड़ा विधानसभा सीट से 2017 में बीजेपी को जीत मिली. बीजेपी के टिकट पर उतरे किशन लाल राजपूत ने निवर्तमान विधायक सपा के हेमराज वर्मा को करीब 58 हजार वोट के बड़े अंतर से हरा दिया था. वह भी तब, जब 2012 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार रहे स्वामी प्रवक्तानंद ने बगावत कर राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) से चुनाव लड़ा था. बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के टिकट पर उतरे जिले के सबसे बड़े सर्जन डॉक्टर शैलेंद्र गंगवार तीसरे स्थान पर रहे थे.

सामाजिक ताना-बाना

बरखेड़ा विधानसभा सीट के सामाजिक समीकरणों की बात करें तो यहां मेनका गांधी और वरुण गांधी का दबदबा रहा है. सपा के कद्दावर नेता रहे हाजी रियाज क्षेत्र के मतदाताओं पर अच्छी पकड़ रखते थे. कोरोना काल में हाजी रियाज की मौत के बाद क्षेत्र में सपा का दबदबा कम हुआ है. बरखेड़ा सीट से चुनाव में जातिगत समीकरण अहम भूमिका निभाते हैं. इस विधानसभा क्षेत्र में लोधी, किसान, राजपूत मतदाताओं की बहुलता है. मुस्लिम, बंगाली, जाटव, कुर्मी और सिख मतदाता भी बरखेड़ा विधानसभा सीट का चुनाव परिणाम तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं.

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विधायक का रिपोर्ट कार्ड

बरखेड़ा विधानसभा सीट से विधायक 62 साल के किशन लाल राजपूत सरकारी मुलाजिम रह चुके हैं. ग्राम विकास अधिकारी के रूप में रायबरेली, बड़ौत, बरेली में तैनात रहे किशन लाल राजपूत 1981 से 2015 तक सरकारी सेवा में रहे. पीलीभीत जिले के ही जहानाबाद कस्बे के रहने वाले किशन लाल बरेली कॉलेज बरेली से बीएससी की पढ़ाई की. विधायक की दो बेटी और एक बेटा है. किशन लाल राजपूत की छवि साफ-सुथरे नेता की है. विधायक अपने कार्यकाल में जंगल में सोलर तार फेसिंग, यात्री शेड, श्मशान शेड, सीसी रोड, बारात घर के निर्माण और बरखेड़ा में मेडिकल कॉलेज की मंजूरी को अपनी उपलब्धि बताते हैं.

 

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