औरंगाबाद देश का ऐसा पर्यटक जिला है जिसके पास दो विश्व धरोहर स्मारक हैं. यह शहर अजंता और एलोरा के रूप में प्राचीनतम विरासत का गवाह है तो मध्यकालीन भारत की विरासत के रूप में दौलताबाद और बीबी-का-मकबरा के जरिए पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है.
महाराष्ट्र के पर्यटन और औद्योगिक नगरी के रूप में पहचाने जाने वाला औरंगाबाद जिला पश्चिम में नासिक, उत्तर में जलगांव, पूर्व में जालना और दक्षिण में अहमदनगर से घिरा हुआ है. मराठवाड़ा क्षेत्र के तहत औरंगाबाद प्रमुख पर्यटन स्थल है. गोदावरी, शिवाना और तापी जैसी नदियां इस शहर से होते हुए गुजरती है.
बड़ी कंपनियों के मैन्यूफैक्चरिंग प्लान्ट
जिले में बजाज, वीडियोकॉन, स्कोडा ऑटो, सीमेंस, क्रॉम्पटन, धूत ट्रांसमिशन, ऑडी, अंजता फॉर्मा, कोस्मो फिल्म्स और लोम्बॉर्गिनी जैसी बड़ी कंपनियों के मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट लगी हुई हैं.
2011 की जनगणना के अनुसार औरंगाबाद जिले की आबादी 3,701,282 है जिसमें 1,924,469 पुरुष और 1,776,813 महिलाएं हैं. जबकि 2001 की जनगणना के मुताबिक जिले की आबादी 2,897,013 थी. औरंगाबाद जिले की आबादी महाराष्ट्र की कुल आबादी का 3.29 फीसदी है. 2001 की तुलना में 2011 में 27.76 फीसदी आबादी बढ़ी. औरंगाबाद 9 तहसील आती हैं.
औरंगाबाद जिला 10,107 स्क्वायर किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है. लिंगानुपात के आधार पर प्रति हजार पुरुषों की तुलना में महिलाओं की संख्या 923 है. जिले की साक्षरता दर 79.02 फीसदी है जिसमें पुरुषों की साक्षरता दर 87.37 फीसदी है तो महिलाओं की साक्षरता 70.08 फीसदी है.
धर्म के आधार पर देखें तो औरंगाबाद में करीब 51.07 फीसदी आबादी हिंदुओं की है, जबकि 30.79 फीसदी आबादी मुस्लिमों की है. तीसरे नंबर पर बौद्ध धर्म के मानने वाले लोग रहते हैं. जिले में चौथे और पांचवें नंबर पर क्रमशः जैन (1.62 फीसदी) और ईसाई (0.86 फीसदी) समाज के लोग रहते हैं.
औरंगाबाद में कांटेदार जंग
विधानसभा के हिसाब से देखें तो औरंगाबाद संसदीय क्षेत्र में 6 विधानसभा सीटें आती हैं, जिन पर मराठा समुदाय का अच्छा खासा दबदबा है.
कन्नड़ और औरंगाबाद पश्चिम विधानसभा सीट पर शिवसेना का कब्जा है जबकि औरंगाबाद पूर्व और गंगापुर में बीजेपी का कब्जा है तो औरंगाबाद मध्य सीट ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन पार्टी (एआईएमआईएम) और वौजापुर सीट राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के खाते में है.
शिवसेना के गढ़ में AIMIM की जीत
औरंगाबाद लोकसभा सीट को शिवसेना का गढ़ माना जाता था, लेकिन इस बार उसे हार का मुंह देखना पड़ा. इस लोकसभा सीट पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के इम्तियाज जलील सैय्यद ने पुराने समीकरण को ध्वस्त करते हुए जीत हासिल कर ली.
सैय्यद ने 4 बार के सांसद और अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी शिवसेना के चंद्रकांत खैरे को बेहद कांटेदार मुकाबले में 4,492 वोटों से हराया. इस चुनाव में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के सैय्यद को 3,89,042 वोट मिले, जबकि शिवसेना के चंद्रकांत खैरे के खाते में 3,84,550 वोट आए.
2014 के लोकसभा चुनाव में शिवसेना के नेता चंद्रकांत खैरे ने कांग्रेस प्रत्याशी सुरेश नितिन पाटिल को हराया था. 1998 के लोकसभा चुनाव को छोड़ दिया जाए तो 1989 से 2014 तक शिवसेना औरंगाबाद लोकसभा सीट से लगातार चुनाव जीतने में सफल रही. औरंगाबाद लोकसभा सीट से चंद्रकांत खैरे लगातार चार लोकसभा चुनाव जीतने में कामयाब रहे थे. 1999 में वह पहली बार सांसद बने. इसके बाद 2004, 2009 और 2014 में भी सांसद चुने गए.
हरियाणा के साथ-साथ महाराष्ट्र में भी विधानसभा चुनाव कराए जा रहे हैं. दोनों ही राज्यों में 21 अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे जबकि 24 अक्टूबर को चुनाव के नतीजे आएंगे.
सुरेंद्र कुमार वर्मा