देश में चुनाव का मौसम आ चुका है. इसी के साथ वह दौर भी लौट आया है जब राजनेताओं के बयानों और जुबानी हमलों में आए दिन इतिहास से जुड़े किसी न किसी कैरेक्टर का नाम सुनाई देगा. इसकी शुरुआत हुई है शिवसेना नेता संजय राउत के हालिया बयान से जिसमें उन्होंने क्रूर मुगल शासक औरंगजेब का जिक्र किया. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधने के लिए औरंगजेब का सहारा लिया. बीजेपी के किसी नेता से पहले ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) चीफ असदुद्दीन औवेसी ने ही उन पर पलटवार कर दिया. आने वाले दिनों में इतिहास से जुड़े इस तरह के और भी कई नाम सुनने को मिल सकते हैं. पिछले 2019 के लोकसभा चुनाव में भी औरंगजेब से लेकर दुर्योधन जैसे नाम रैलियों में सुनने को मिले थे.
ताजा मामला क्या है?
पहले जान लेते हैं कि ताजा मामला आखिर है क्या. शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने महाराष्ट्र में पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराष्ट्र में पैदा हुआ थे जबकि औरंगजेब गुजरात में पैदा हुआ था. गुजरात में जहां पीएम नरेंद्र मोदी का जन्म हुआ था, उसी के पास औरंगजेब पैदा हुआ था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संजय राउत के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि हमारे विरोधी कीर्तिमान बना रहे हैं. वे लगातार मुझे गालियां दे रहे हैं. आज ही उन्होंने मोदी को 104वीं गाली दी है. औरंगजेब कहकर नवाजा है. लेकिन देश ने अपना मन बना लिया है.
वहीं AIMIM चीफ असदुद्दीन औवेसी ने संजय राउत के बयान को लेकर उन पर निशाना साधते हुए कहा, 'संजय राउत 2014 में कुछ और बोलते थे. वो उस समय मोदी को हिंदू ह्रदय सम्राट बताते थे. लेकिन अब क्या बोल रहे हैं. मैं कोई बादशाह या मुगलों का प्रवक्ता नहीं हूं. अब कोई राजा नहीं है. संविधान के बाद सब बराबर हो गए हैं.' औरंगजेब का नाम पिछले चुनाव में भी सुनाई दिया था.
2019 के चुनाव में भी हुई थी औरंगजेब की एंट्री
पिछले लोकसभा चुनाव में भी नेताओं ने एक-दूसरे पर हमला बोलने के लिए औरंगजेब का नाम इस्तेमाल किया था. वाराणसी में कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने पीएम मोदी को 'औरंगजेब का आधुनिक अवतार' बताया था. उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि जिस व्यक्ति को यहां (वाराणसी) के लोगों ने चुना है- नरेंद्र मोदी- वह वास्तव में औरंगजेब का आधुनिक अवतार है.' 1658 से 1707 तक भारत के 15 करोड़ लोगों पर 49 साल राज करने वाला औरंगजेब बेहद क्रूर मुगल शासक था. अपने शासनकाल में उसने कई मंदिरों को तोड़ने के आदेश दिए.
'पाकिस्तान' पर भी जमकर हुई बयानबाजी
पिछले चुनाव में कई नेताओं ने अपनी रैलियों और जनसभाओं में पाकिस्तान का नाम लिया. भारतीय जनता पार्टी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष और वर्तमान गृहमंत्री अमित शाह ने मार्च 2019 में आगरा की एक रैली में भीड़ से पूछा, 'हमें आतंकवादियों को मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए या नहीं? पाकिस्तान के दांत खट्टे करने चाहिए या नहीं?' उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान ने उरी में हमला किया. पीएम मोदी ने सर्जिकल स्ट्राइक कर घर में घुसकर आतंकवादियों का सफाया किया. फिर भी वे नहीं सुधरे.'
उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान ने पुलवामा पर हमला किया. 40 जवान शहीद हो गए. सभी को लगता था कि फिर से सर्जिकल स्ट्राइक नहीं हो सकती. पाकिस्तान ने पूरी सीमा चाक-चौबंद कर दी. लेकिन पाकिस्तान वाले प्रधानमंत्री मोदी को जानते नहीं हैं. उन्होंने भूमि पर लश्कर खड़ा किया तो पीएम मोदी ने एयर स्ट्राइक कर आतंकवादियों के ठिकानों को ध्वस्त कर दिया.' उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी एक रैली में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाषण भारत में देते हैं और पसीना इस्लामाबाद में बैठे इमरान खान को आता है.
चर्चाओं में रहे पहले पीएम नेहरू
2014 में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद से देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं. बीजेपी लगातार उनकी आलोचना करती है और कांग्रेस बचाव में रहती है. 2019 के चुनाव में भी नेहरू का नाम जमकर इस्तेमाल हुआ था. अप्रैल 2019 में पीएम मोदी ने एक रैली में कहा, 'एक बार पंडित नेहरू कुंभ के मेले में प्रयागराज आए थे. तब अव्यवस्था के कारण कुंभ के मेले में भगदड़ मच गई. हजारों लोग मारे गए. लेकिन सरकार की इज्जत बचाने के लिए, पंडित नेहरू पर कोई दाग न लग जाए इसके लिए उस समय की मीडिया ने भी इस खबर को दिखाने की बहादुरी नहीं दिखाई.'
पीएम ने कहा, 'जिन परिवारों ने अपनों को खोया था उनके नामों का कहीं कोई जिक्र नहीं होने दिया गया. उन्हें एक रुपए भी नहीं दिया गया. यह सिर्फ भगदड़ नहीं थी. भगदड़ के बाद जो हुआ वह असंवेदनशीलता का एक जुर्म था. ऐसा पाप देश के पहले प्रधानमंत्री के कार्यकाल में हुआ है.'
पैराणिक कथाओं के नाम भी रहे चर्चा में
चुनाव के दौरान जुबानी हमले सिर्फ इतिहास के लोगों तक सीमित नहीं रहते. 2019 के लोकसभा चुनाव में हम इसका उदाहरण देख चुके हैं. बात औरंगजेब से शुरू हुई थी और महाभारत-रामायण के पात्रों पर जा पहुंची. पिछले चुनाव में प्रियंका गांधी ने एक रैली में पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा, 'मेरे परिवार के शहीद सदस्यों का अपमान करते हैं लेकिन आपकी जरूरतों की बात नहीं करते हैं. इस देश ने कभी अहंकार और घमंड को माफ नहीं किया है. ऐसा अहंकार दुर्योधन में भी था.'
उनको जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा, 'यह लोकतंत्र है. आपके कहने से कोई दुर्योधन नहीं बन जाता. मतगणना वाले दिन पता चल जाएगा कौन दुर्योधन है और कौन अर्जुन है.' इससे पहले नवंबर 2018 में सीपीआई-एम नेता सीताराम येचुरी ने भी पीएम मोदी और अमित शाह की तुलना दुर्योधन और दुश्शासन से की थी.
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