जानिए, शिवगंगा लोकसभा सीट का पूरा सियासी गणित

तमिलनाडु की शिवगंगा लोकसभा सीट अपने खनिज पदार्थों, बुनाई, मेटल आधारित उद्योगों के लिए  मशहूर है.तंजावुर सीट कांग्रेस का गढ़ रही है. 1967 में यहां से डीएमके ने जीत दर्ज की थी. यह सिलसिला 1971 में भी जारी रहा. 1977 में एआईएडीएमके ने सीट डीएमके से छीन ली थी. लेकिन इंदिरा की लहर में 1980 में कांग्रेस ने यहां से पहली बार जीत दर्ज की.

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शिवगंगा (फाइल फोटो) शिवगंगा (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 23 मार्च 2019,
  • अपडेटेड 5:20 PM IST

तमिलनाडु की शिवगंगा लोकसभा सीट अपने खनिज पदार्थों, बुनाई, मेटल आधारित उद्योगों के लिए  मशहूर है. जहां तक बात राजनीति की है, तो यह सीट कांग्रेसियों का गढ़ रही है. लेकिन 2014 के चुनाव में एआईएडीएमके ने उलटफेर करते हुए यहां से जीत हासिल की थी. एआईएडीएमके के पीआर सेंथिलनाथन यहां से सांसद हैं.

राजनैतिक पृष्ठभूमि

तंजावुर सीट कांग्रेस का गढ़ रही है. 1967 में यहां से डीएमके ने जीत दर्ज की थी. यह सिलसिला 1971 में भी जारी रहा. 1977 में एआईएडीएमके ने सीट डीएमके से छीन ली थी, लेकिन इंदिरा की लहर में 1980 में कांग्रेस ने यहां से पहली बार जीत दर्ज की. कांग्रेस के लिए जीत का यह सिलसिला 1984, 1989 से लेकर 1991 तक जारी रहा. लेकिन 1996 में तमिल मनीला कांग्रेस इस सीट पर कब्जा कर लिया.

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1998 में भी यह सीट तमिल मनीला कांग्रेस के पास रही, लेकिन 1999 में एक बार फिर यह सीट कांग्रेस के खाते में चली गई. कांग्रेस का इस सीट पर दबदबा 2004 और फिर 2009 में भी कायम रहा. लेकिन 2014 में एआईएडीएमके ने डीएमके से यह सीट छीन ली.

सामाजिक तानाबाना

तंजावुर सीट पर 1412373 मतदाता है. जिसमें पुरुषों का प्रतिशत 49.88 है बकि महिलाओं का प्रतिशत 50.12 है. प्रति एक हजार पुरुषों पर महिलाओं की तादाद 1005 है.

विधानसभा सीटों का समीकरण

तंजावुर लोकसभा सीट के तहत छह विधानसभा सीटें आती हैं. ये हैं- थिरूमायम, तिरुपट्टूर, कराईकुडी, अलंगुडी, मनमदुरई, शिवगंगा.  तीन विधानसभा सीटें डीएमके के पास हैं तो दो पर एआईएडीएमके का कब्जा है. एक सीट कांग्रेस के पास है.

2014 का जनादेश

2014 के लोकसभा चुनाव में एआईएडीएमके ने यहां से जीत दर्ज की थी. पीआर सेंथिलनाथन यहां से सांसद हैं. उन्हें 475993 वोट मिले थे. दूसरे नंबर पर डीएमके के दिग्गज नेता रा ध्रुवाई रहे. उन्हें 246608 वोट मिले थे.

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सांसद का रिपोर्ट कार्ड

के. परसुरामन यहां से पहली बार 2014 में लोकसभा सांसद बने. उनकी शैक्षणिक योग्यता स्नातक है. वे 16 वीं लोकसभा में विदेश मंत्रालय की स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य हैं. 6 फरवरी, 2019 के आंकड़ों के मुताबिक लोकसभा में उनकी उपस्थिति 68 फीसदी रही है. उन्होंने 46 बहसों में हिस्सा लेते हुए इस दौरान 513 प्रश्न पूछे. उन्होंने अपनी सांसद निधि से 89.9 फीसदी रकम अपने क्षेत्र के विकास पर खर्च की.

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