Samastipur Lok Sabha Chunav Result 2019: लोक जनशक्ति पार्टी के राम चंद्र पासवान जीते

Lok Sabha Chunav Samastipur Result 2019: एलजेपी से रामचंद्र पासवान और कांग्रेस से डॉ. अशोक कुमार चुनावी रण में उतरे हैं. इस बार समस्तीपुर सीट से 11 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. यह संसदीय सीट अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित है.

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Samastipur Lok Sabha Election Result 2019 Samastipur Lok Sabha Election Result 2019

aajtak.in / पुनीत सैनी / रचित कुमार

  • नई दिल्ली,
  • 23 मई 2019,
  • अपडेटेड 3:50 PM IST

समस्तीपुर सीट पर लोक जनशक्ति पार्टी के उम्मीदवार राम चंद्र पासवान जीत गए हैं. पासवान ने 2,51,643 वोटों से जीत दर्ज की है. राम चंद्र पासवान को कुल 5,62,443 वोट हासिल हुए हैं. दूसरे नंबर पर कांग्रेस उम्मीदवार अशोक कुमार को 3,10,800 मत प्राप्त हुए हैं.

समस्तीपुर बिहार की हाई प्रोफाइल सीट है क्योंकि यहां से लोक जनशक्ति पार्टी के मुखिया रामविलास पासवान के भाई रामचंद्र पासवान सांसद हैं.

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कब और कितनी हुई वोटिंग

समस्तीपुर लोकसभा सीट पर 29 अप्रैल को चौथे चरण में वोट डाले गए थे. इस सीट पर 1677662 पंजीकृत मतदाता हैं, जिनमें से 1013044 ने वोट डाला. सीट पर कुल 60.74 प्रतिशत वोटिंग हुई.

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प्रमुख उम्मीदवार

एलजेपी से रामचंद्र पासवान और कांग्रेस से डॉ. अशोक कुमार चुनावी रण में उतरे थे. इस बार समस्तीपुर सीट से 11 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे थे. यह संसदीय सीट अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित है.

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2014 का चुनाव

साल 2014 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. अशोक कुमार को पराजित कर पासवान सांसद बने थे. रामचंद्र पासवान को 2 लाख 70 हजार 401 वोट मिले थे, जबकि अशोक कुमार को 2 लाख 63 हजार 529 वोट प्राप्त हुए थे. पासवान की शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो वो मैट्रिक पास हैं. पिछले चुनाव में पासवान काफी कम वोट के अंतर से जीते थे. पासवान को जहां 31.33 प्रतिशत वोट मिले, तो वहीं अशोक कुमार को 30.53 प्रतिशत वोट हासिल हुए. साल 2014 के चुनाव में एक दिलचस्प बात यह भी रही कि यहां वोटरों ने नोटा का बटन भरपूर दबाया.

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सामाजिक ताना-बाना

साल 1972 से पहले समस्तीपुर कोई अलग संसदीय क्षेत्र नहीं होता था. साल 1972 में दरभंगा से अलग होने के बाद समस्तीपुर जिला बना और इसी के साथ इसे संसदीय क्षेत्र घोषित किया गया. साल 2011 की जनगणना के मुताबिक समस्तीपुर जिले की कुल आबादी 42 लाख 54 हजार 782 है. इस जिले के साथ खास बात यह है कि संसदीय क्षेत्र घोषित होते ही इसे बिहार के अति पिछड़े इलाके का दर्जा दिया गया. लिहाजा भारत सरकार इस क्षेत्र को बैकवर्ड रीजन ग्रांट फंड प्रोग्राम (बीआरजीएफपी) के तहत उचित फंड जारी करती रही है.

सीट का इतिहास

इस संसदीय क्षेत्र का बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर से खास नाता है. 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर कर्पूरी ठाकुर यहां से चुनाव जीते थे. इस चुनाव में पूरे देश में कांग्रेस के खिलाफ माहौल व्याप्त था जिसका खामियाजा पार्टी को भी उठाना पड़ा और कांग्रेस यहां पहली बार हारी. कौन पार्टियां विजयी रहीं, तो यहां से 1980 में जनता पार्टी (एस), 1984 में कांग्रेस, 1989-1991-1996 में जनता दल जीत दर्ज करती रहीं जबकि 1998 में आरजेडी, 1999 में जेडीयू, 2004 में आरजेडी, 2009 में जेडीयू इस सीट से जीती. जेडीयू के महेश्वर हजारी 2009 में इस सीट से सांसद बने. उसके बाद यह सीट एलजेपी के नाम हो गई और रामचंद्र पासवान सांसद चुने गए.

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