मनीष तिवारी बोले- चंडीगढ़ से टिकट न मिलने पर कोई मलाल नहीं, करूंगा बंसल का समर्थन

मनीष तिवारी ने कहा कि पवन बंसल उनके बड़े भाई जैसे हैं और वह चुनाव में उनकी हर संभव मदद करेंगे. उधर, चुनाव प्रचार से जुड़े एक सवाल के जवाब में पूर्व रेल मंत्री पवन बंसल ने कहा कि पंजाब सरकार में मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू और उनकी धर्मपत्नी नवजोत कौर सिद्धू से उनके कोई मतभेद नहीं हैं.

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मनीष तिवारी (तस्वीर- फेसबुक पेज) मनीष तिवारी (तस्वीर- फेसबुक पेज)

मनजीत सहगल

  • चंडीगढ़,
  • 18 अप्रैल 2019,
  • अपडेटेड 9:03 PM IST

पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा कि पार्टी से उनको चंडीगढ़ लोकसभा सीट से टिकट ना  दिए जाने का उनको कोई मलाल नहीं है. चंडीगढ़ में मनीष तिवारी और पवन बंसल एक ही मंच पर साथ दिखाई दिए और दोनों ने कहा उनके करीब आने का एक ही मकसद सिर्फ पार्टी को जिताना है.

मनीष तिवारी ने कहा कि पवन बंसल उनके बड़े भाई जैसे हैं और वह चुनाव में उनकी हर संभव मदद करेंगे. उधर, चुनाव प्रचार से जुड़े एक सवाल के जवाब में पूर्व रेल मंत्री पवन बंसल ने कहा कि पंजाब सरकार में मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू और उनकी धर्मपत्नी नवजोत कौर सिद्धू से उनका कोई मतभेद नहीं है.

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उन्होंने कहा कि वह पार्टी हाईकमान से आग्रह करके दोनों को चंडीगढ़ में चुनाव प्रचार करने के लिए निमंत्रण देंगे. गौरतलब है कि नवजोत कौर सिद्धू ने भी चंडीगढ़ से टिकट की मांग की थी. उधर, गुरुवार को चंडीगढ़ में तब राजनीतिक हलचल तेज हो गई जब बसपा नेता जन्नत जहां अपने पति और समर्थकों सहित कांग्रेस में शामिल हो गईं.

उनको कांग्रेस में शामिल करवाने के पीछे क्रिकेटर मोहम्मद अजहरुद्दीन का हाथ है जो चंडीगढ़ में मौजूद थे. जन्नत जहां पिछली बार बसपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ चुकी हैं. मोहम्मद अजहरुद्दीन ने मुस्लिम मतदाताओं को लेकर नवजोत सिंह सिद्धू द्वारा दिए गए विवादित बयान से किनारा करते हुए कहा कि यह बयान उनका निजी है और वह उस पर कुछ नहीं कहना चाहते.

मोहम्मद अजहरुद्दीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हुए कहा कि उनकी सरकार के दौरान देश काफी पीछे रह गया क्योंकि देश के गांवों को धर्म नहीं बल्कि बिजली और पानी जैसी आम जरूरत की चीजों की दरकार है. मोहम्मद अजहरुद्दीन ने कहा कि राजनीति और धर्म का घालमेल गणतंत्र के लिए सही नहीं है क्योंकि चुनाव में धर्म के इस्तेमाल से सही उम्मीदवार को चुनना मुश्किल हो जाता है.

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