समस्तीपुर सीट पर प्रत्याशियों की किस्मत EVM में बंद, 23 मई को जीत-हार का फैसला

बिहार की समस्तीपुर लोकसभा सीट पर 29 अप्रैल को चौथे चरण में वोट डाले गए. समस्तीपुर सीट पर एक बार फिर से कांग्रेस और एलजेपी के बीच सीधा मुकाबला है. यहां से 11 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं.

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एलजेपी प्रमुख रामविलास पासवान एलजेपी प्रमुख रामविलास पासवान

टीके श्रीवास्तव

  • नई दिल्ली,
  • 29 अप्रैल 2019,
  • अपडेटेड 10:02 AM IST

बिहार की समस्तीपुर लोकसभा सीट पर 29 अप्रैल को चौथे चरण में वोट डाले गए. यहां कुल 60.34 फीसदी मतदान रिकॉर्ड किया गया. इस चरण में 9 राज्यों की 71 लोकसभा सीटों पर वोटिंग हुई और कुल 64.85 फीसदी मतदान दर्ज किया गया. इस सीट पर लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है.

पिछले लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस ने इस सीट पर टक्कर दी थी. यहां से एलजेपी प्रमुख रामविलास पासवान के भाई रामचंद्र पासवान चुनाव मैदान में हैं, जबकि कांग्रेस से डॉक्टर अशोक कुमार चुनावी रण में उतरे हैं. इस बार समस्तीपुर सीट से 11 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. यह संसदीय सीट अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित है.

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चुनाव आयोग के मुताबिक यहां कुल मतदाताओं की संख्या 13 लाख 12 हजार 948 है. इनमें 7 लाख 02 हजार 480 पुरुष मतदाता और 6 लाख 10 हजार 468 महिला मतदाता हैं. लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) प्रमुख रामविलास पासवान के भाई रामचंद्र पासवान इस क्षेत्र से सांसद हैं. साल 2014 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. अशोक कुमार को पराजित कर पासवान सांसद बने थे.

रामचंद्र पासवान को 2 लाख 70 हजार 401 वोट मिले थे, जबकि अशोक कुमार को 2 लाख 63 हजार 529 वोट प्राप्त हुए थे. पासवान की शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो वो मैट्रिक पास हैं. पिछले चुनाव में पासवान काफी कम वोट के अंतर से जीते थे. पासवान को जहां 31.33 प्रतिशत वोट मिले, तो वहीं अशोक कुमार को 30.53 प्रतिशत वोट हासिल हुए.

साल 2014 के चुनाव में एक दिलचस्प बात यह भी रही कि यहां वोटरों ने नोटा का बटन भरपूर दबाया. कुल 3.38 प्रतिशत वोट के साथ कुल 29 हजार 211 नोटा दर्ज हुए. इस चुनाव में खास बात यह भी रही कि जेडीयू के ज्यादातर वोट एलजेपी को ट्रांसफर हुए, जबकि कांग्रेस को उसके कोर वोट प्राप्त हुए.

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साल 2009 के चुनाव में जेडीयू प्रत्याशी महेश्वर हजारी विजयी रहे. उन्होंने एलजेपी उम्मीदवार रामचंद्र पासवान को हराया. हजारी को कुल 2 लाख 59 हजार 458 वोट मिले, जबकि पासवान को 1 लाख 55 हजार 82 वोट हासिल हुए. इससे पहले 2004 के चुनाव में आरजेडी के आलोक कुमार मेहता ने जेडीयू प्रत्याशी रामचंद्र सिंह को हराया. इस चुनाव में मेहता को 4 लाख 37 हजार 457 वोट मिले, जबकि रामचंद्र सिंह को 3 लाख 10 हजार 674 वोट हासिल हुए.

संसदीय क्षेत्र का इतिहास

साल 1972 से पहले समस्तीपुर कोई अलग संसदीय क्षेत्र नहीं होता था. साल 1972 में दरभंगा से अलग होने के बाद समस्तीपुर जिला बना और इसी के साथ इसे संसदीय क्षेत्र घोषित किया गया. साल 2011 की जनगणना के मुताबिक समस्तीपुर जिले की कुल आबादी 42 लाख 54 हजार 782 है.

इस जिले के साथ खास बात यह है कि संसदीय क्षेत्र घोषित होते ही इसे बिहार के अति पिछड़े इलाके का दर्जा दिया गया. लिहाजा भारत सरकार इस क्षेत्र को बैकवर्ड रीजन ग्रांट फंड प्रोग्राम (बीआरजीएफपी) के तहत उचित फंड जारी करती रही है.

विधानसभा की कितनी सीटें

समस्तीपुर संसदीय क्षेत्र में छह विधानसभा सीटें हैं, जिनमें कुशेश्वर स्थान, वारिसनगर, हायाघाट, समस्तीपुर, कल्याणपुर और रोसड़ा विधानसभा सीटें शामिल हैं. आरक्षण की बात करें तो कुशेश्वर स्थान, कल्याणपुर और रोसड़ा विधानसभा सीटें एससी के लिए आरक्षित हैं.

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कर्पूरी ठाकुर और समस्तीपुर सीट

इस संसदीय क्षेत्र का बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर से खास नाता है. साल 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर कर्पूरी ठाकुर यहां से चुनाव जीते थे. इस चुनाव में पूरे देश में कांग्रेस के खिलाफ माहौल व्याप्त था, जिसका खामियाजा पार्टी को भी उठाना पड़ा और कांग्रेस यहां पहली बार हारी.

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