गुजरात: मोदी के सिर सेहरा बांधने वाली वडोदरा की जनता क्या फिर देगी तोहफा

Vadodra Seat नरेंद्र मोदी द्वारा सीट खाली करने के बाद हुए उपचुनाव में इस सीट से बीजेपी की रंजनबेन भट्ट ने बाजी मारी थी. उनके सामने कांग्रेस के नरेंद्र रावत थे. रंजनबेन भट्ट वडोदरा शहर की उप महापौर रही हैं. जबकि नरेंद्र रावत वडोदरा कांग्रेस के अध्यक्ष रहे.

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Vadodra Seat Vadodra Seat

जावेद अख़्तर

  • नई दिल्ली,
  • 03 फरवरी 2019,
  • अपडेटेड 7:51 PM IST

2014 के लोकसभा चुनाव में वडोदरा देश का बड़ा सबसे बड़ा राजनीतिक केंद्र बनकर उभरा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात की वडोदरा और उत्तर प्रदेश की वाराणसी सीट से लोकसभा चुनाव लड़े. दोनों ही सीट से उन्होंने एकतरफा जीत हासिल की. हालांकि, बाद में पीएम मोदी ने अपने गृह राज्य की वडोदरा सीट छोड़कर वाराणसी को चुना और बाद में हुए उपचुनाव में बीजेपी की रंजन भट्ट ने बाजी मारी.

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राजनीतिक पृष्ठभूमि

वडोदरा सीट पहले बड़ौदा के नाम से रजिस्टर्ड थी और इस पर लंबे समय से बीजेपी का कब्जा रहा है. 2009 में वडोदरा सीट के नाम पर यहां चुनाव हुआ और बीजेपी के बालकृष्ण शुक्ला ने चुनाव जीता. उन्होंने कांग्रेस के दलीप सिंह गायकवाड़ को शिकस्त दी. इसके बाद 2014 में यहां से ऐतिहासिक चुनाव हुआ और नरेंद्र मोदी ने अपने जीवन का पहला लोकसभा चुनाव इस सीट से लड़ा.

बीजेपी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी को 2014 लोकसभा चुनाव का चेहरा बनाकर लड़ा. नरेंद्र मोदी ने पूरे देश में गुजरात के विकास मॉडल को रखा और जनता से विकास के नाम पर वोट मांगा. वडगाम में जन्मे मोदी ने वडोदरा सीट से अपना पहला लोकसभा चुनाव लड़ा और बड़ी जीत दर्ज की.

कांग्रेस ने उनके सामने वरिष्ठ नेता मधुसूदन मिस्त्री को मौका दिया था, लेकिन वह मोदी की लोकप्रियता के सामने कहीं नहीं टिक पाए. नरेंद्र मोदी को साढ़े आठ लाख से ज्यादा वोट मिले, जबकि मधुसूदन मिस्त्री पौने तीन लाख वोट ही पा सके. मोदी ने उन्हें 5 लाख 70 हजार 128 मतों से हराया.  

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सामाजिक-ताना बाना

वडोदरा लोकसभा क्षेत्र की आबादी 22,98,052 है. इसमें 19.85% आबादी ग्रामीण और 80.15% आबादी शहरी है. अनुसूचित जाति की आबादी 6.37 प्रतिशत और 6.17 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति की है. 2018 की वोटर लिस्ट के मुताबिक, यहां 17,516,37 वोटर हैं. करीब 10 फीसदी यहां मुस्लिम आबादी है.

वडोदरा गुजरात का ऐसा शहर है जहां हिंदी भाषियों का खासा प्रभाव है. खासकर यूपी मूल के लोगों का बड़ा प्रभाव है. इस क्षेत्र की दो विधानसभा सीट ऐसी हैं, जहां से यूपी मूल के नेता विधायक भी बनते रहे हैं. वडोदरा को संस्कृति शहर के तौर पर भी जाना जाता है. इसके अलावा यहां उद्योग भी बड़े पैमाने पर हैं. यहां गुजराती, उर्दू, हिंदी और मराठा भाषा का इस्तेमाल करने वाले लोग रहते हैं. वडोदरा क्रिकेट सितारों के लिए भी काफी मशहूर है. यहां से इरफान पठान, यूसुफ पठान, हार्दिक पंड्या, किरण मोरे, अंबति रायडू और जहीर खान जैसे बड़े क्रिकेट खिलाड़ियों का ताल्लुक वडोदरा से ही है.

वडोदरा लोकसभा सीट के तहत सावली, सयाजीगंज, मंजलपुर, वाघोडिया, अकोटा, रावपुरा और वडोदरा सिटी विधानसभा सीट आती हैं. वडोदरा सिटी सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. 2017 के विधानसभा चुनाव में सावली से बीजेपी, वाघोडिया से बीजेपी, वडोदरा सिटी से बीजेपी, अकोटा से बीजेपी, सयाजीगंज से बीजेपी, रावपुरा से बीजेपी, मंजलपुर से बीजेपी ने जीत दर्ज की थी. यानी सातों सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज की थी.

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2014 चुनाव का जनादेश

नरेंद्र मोदी, बीजेपी- 8,45,464 वोट (72.8%)

मधुसूदन मिस्त्री, कांग्रेस- 275,336 (23.7%)

2014 चुनाव का वोटिंग पैटर्न

कुल मतदाता-  16,38,321

पुरुष मतदाता-   8,49,077

महिला मतदाता-   7,89,244

मतदान-   11,61,577 (70.9%)

सांसद का रिपोर्ट कार्ड

नरेंद्र मोदी द्वारा सीट खाली करने के बाद हुए उपचुनाव में इस सीट से बीजेपी की रंजनबेन भट्ट ने बाजी मारी थी. उनके सामने कांग्रेस के नरेंद्र रावत थे. रंजनबेन भट्ट वडोदरा शहर की उप महापौर रही हैं. जबकि नरेंद्र रावत वडोदरा कांग्रेस के अध्यक्ष रहे.

लोकसभा में उपस्थिती की बात की जाए तो उनकी मौजूदगी 90 फीसदी रही है. बहस के मामले में उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है. उन्होंने 29 बार संसद की बहस में हिस्सा लिया. सवाल पूछने के मामले में उनका प्रदर्शन बेहतर रहा और उन्होंने कुल 397 सवाल पूछे.

सांसद निधि से खर्च के मामले में उनका प्रदर्शन अच्छा रहा है. उनकी निधि से जारी 24.83 करोड़ रुपये का वह लगभग 95 प्रतिशत विकास कार्यों पर खर्च करने में कामयाब रही हैं.

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