कभी रायगढ़ छत्रपति शिवाजी की राजधानी रही थी. रायगढ़ का किला काफी दुर्गम माना जाता है. रायगढ़ लोक सभा सीट (रायगड लोकसभा मतदारसंघ) पर शिवसेना का वर्चस्व है लेकिन विधानसभा सीटों पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) और पीजेंट एंड वर्कर्स पार्टी ऑफ इंडिया (PWPI) का दबदबा है. वर्तमान में रायगढ़ लोक सभा सीट से केंद्रीय मंत्री अनंत गीते सांसद हैं. 2019 के लोक सभा चुनावों में देखने वाली बात होगी कि जीत का ऊंट किस करवट बैठता है.
रायगढ़ लोक सभा सीट के अंतर्गत विधानसभा सीट का गणित
रायगढ़ लोक सभा सीट के अंतर्गत 6 विधानसभा सीट आती हैं. इस लोक सभा सीट पर पीडब्ल्यूपी और एनसीपी के विधायकों का कब्जा है. शिवसेना सिर्फ एक सीट पर है और बीजेपी, कांग्रेस यहां से गायब हैं. पेण और अलिबाग सीट से पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी ऑफ इंडिया (PWP),श्रीवर्धन, दापोली और गुहागर से एनसीपी, महाड से शिवसेना के विधायक हैं. गौरतलब है कि रायगढ़, छत्रपति शिवाजी की राजधानी रही है.
रायगढ़ लोक सभा सीट का इतिहास
विधानसभा में भले ही यहां से शिवसेना अल्पमत में हो लेकिन 2 बार से लोक सभा सीट शिवसेना के पास है. 2009 में शिवसेना के अनंत गीते ने कांग्रेस के एआर अंतुले को हराया था तो 2014 में एनसीपी के सुनील तत्कारे को नजदीकी मात दी थी. अनंत गीते ने अपना वर्चस्व कायम रखा.
2014 में लोक सभा सीट पर जीत का गणित
2014 के चुनावों में शिवसेना के अनंत गीते को 3,96,178 वोट मिले तो वहीं एनसीपी के सुनील तत्कारे को 3,94,068 वोट मिले. तीसरे स्थान पर PWPI के भाई रमेश कदम रहे जिन्हें 1,29,730 वोट मिले थे. चौथे स्थान पर हैरत अंगेज रूप से नोटा का स्थान रहा जिस पर 20,362 लोगों ने बटन दबाया. नोटा ने एनसीपी के हाथ से जीत छीन ली थी.
सांसद अनंत गीते के बारे में
10वीं तक पढ़ाई करने वाले अनंत गीते इस समय केंद्रीय भारी उद्योग और सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम विभाग के कैबिनेट मंत्री हैं. ये 6 बार सांसद रहे हैं. 11वीं से 14वीं लोक सभा तक ये रत्नागिरी से सांसद रहे, फिर 15वीं और 16वीं लोक सभा में ये रायगढ़ से सांसद बने. गीते ने राजनीतिक करियर 1985 में पार्षद के रूप में शुरू किया था और ठीक 11 साल बाद वे शिवसेना के टिकट पर रत्नागिरी लोक सभा सीट से सांसद चुने गए. पहली बार वे 2002 में वित्त राज्य मंत्री और फिर उन्हें प्रमोट कर कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया और उर्जा विभाग दिया गया था. 2014 में केंद्र में बीजेपी की सरकार आते ही वे फिर से कैबिनेट मिनिस्टर बने.
संसद में प्रदर्शन
अनंत गीते केंद्रीय मंत्री हैं. इसलिए न तो इनकी उपस्थिति का रिकॉर्ड रखा जाता है और न वे बहस में भाग लेते हैं. इस संसदीय क्षेत्र में 25 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान है. इसमें से इन्हें 20 करोड़ रुपये मिले हैं. ब्याज के साथ ये रकम 22.31 करोड़ रुपये होती है. इसमें से 19.93 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं जो 98.17 फीसदी है. 2.38 करोड़ रुपये अभी भी खर्च करने के लिए बचे हैं. अनंत गीते की संपत्ति 2014 में 4 करोड़ रुपये घोषित हुई थी.
श्याम सुंदर गोयल