चंडीगढ़ लोकसभा सीट पर आज रविवार (19 मई) को अंतिम चरण में वोटिंग कराई गई. इस संसदीय सीट से 36 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं. यहां से भारतीय जनता पार्टी ने किरण खेर को एक बार फिर से चुनाव मैदान में उतारा है, तो दूसरी ओर कांग्रेस ने पूर्व रेल मंत्री पवन कुमार बंसल पर दांव लगाया है.
लोकसभा चुनाव के सातवें और अंतिम चरण के तहत रविवार को चंडीगढ़ संसदीय सीट मतदान कराया गया जहां पर 70.62 फीसदी मतदान दर्ज किया गया. लोकसभा चुनाव के सातवें और अंतिम चरण के तहत 19 मई 2019 को 8 राज्यों (7 राज्य और 1 केंद्रशासित प्रदेश) की 59 सीटों पर मतदान कराया जा रहा है.
चंडीगढ़ सीट पर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला होने की बात कही जा रही है. इसके अलावा बहुजन समाज पार्टी के टिकट से प्रवीन कुमार, चंडीगढ़ की आवाज पार्टी से अविनाश सिंह शर्मा, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक से गुरमैल सिंह, हिंदुस्तान शक्ति सेना से जगदीश कुमार निदान, अखिल भारतीय अपना दल से ज्योति, राष्ट्रीय लोकस्वराज पार्टी से नवाज अली और सर्वजन सेवा पार्टी से भूपेंद्र कौर चुनाव मैदान में हैं.
चुनाव आयोग ने चंडीगढ़ में शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए सुरक्षा पुख्ता इंतजाम किए हैं. रविवार सुबह से ही लोग मतदान केंद्रों का रुख कर रहे हैं. चंडीगढ़ लोकसभा सीट वीआईपी सीटों में शुमार है. यहां पर बीजेपी और कांग्रेस का अच्छा खासा प्रभाव है. फिलहाल यहां से भारतीय जनता पार्टी (BJP) की किरण अनुपम खेर सांसद हैं. अभिनेता अनुपम खेर की पत्नी और अभिनेत्री किरण खेर पहली बार सांसद बनी है. उन्होंने कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व रेलमंत्री पवन कुमार बंसल को हराया था.
पिछले लोकसभा चुनाव में किरण खेर ने एक लाख 91 हजार 362 वोट यानी 31 फीसदी वोट हासिल किए थे. किरण खेर से पहले यहां से पवन कुमार बंसल कांग्रेस के सांसद रहे हैं. उन्होंने इस सीट से लगातार तीन बार जीत दर्ज की थी. बसंल से पहले यहां से बीजेपी के सतपाल जैन ने लगातार दो बार जीत दर्ज की थी.
चंडीगढ़ सीट की राजनीतिक पृष्ठभूमि
चंडीगढ़ लोकसभा सीट पर कांग्रेस और बीजेपी का मिलाजुला असर है. यहां की जनता बीजेपी को जिताती है या फिर कांग्रेस को. इस सीट पर पहली बार 1967 में लोकसभा चुनाव हुए थे और बीजेपी के चांद गोयल ने जीत दर्ज की थी. किरण खेर से पहले यहां से पवन कुमार बंसल कांग्रेस के सांसद रहे हैं. इस सीट से पवन कुमार बंसल 4 बार चुनाव जीत चुके हैं, जिसमें से उन्होंने तीन बार लगातार जीत दर्ज की है. बसंल से पहले यहां से बीजेपी के सतपाल जैन ने लगातार दो बार जीत दर्ज की थी. फिलहाल चंडीगढ़ में बीजेपी का दबदबा है.
यहां मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर भी बीजेपी से हैं. इसके अलावा लोकसभा चुनाव के बाद हुए म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के चुनाव में भी बीजेपी को यहां भारी जीत मिली. चंडीगढ़ का पूरा प्रशासन डायरेक्ट केंद्र सरकार के हाथ में होता है. पंजाब के राज्यपाल चंडीगढ़ के प्रशासक होते हैं, जो केंद्र सरकार की ओर से प्रशासन करते हैं. फिलहाल बीपी सिंह बदनौर यहां के प्रशासक हैं.
चंडीगढ़ सीट का सामाजिक तानाबाना
चंडीगढ़ शहर को प्राकृतिक सुंदरता का वरदान भी प्राप्त है, जिसके चलते इसको सिटी ब्यूटीफुल भी कहा जाता है. साथ ही यह प्रशासनिक दृष्टि से भी अग्रणी शहर है. यह एक प्लान्ड शहर है, जो पंजाब और हरियाणा दो राज्यों की राजधानी है. यहां पर पंजाब हरियाणा के विधानसभाओं और सचिवालयों के अलावा पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट भी हैं. इतिहास और विरासतों से रचा बसा चंडीगढ़ एक केंद्र शासित प्रदेश है. चंडीगढ़ शहर को फ्रांसीसी मॉडर्निस्ट आर्किटेक्ट ली कार्बूजियर ने डिजाइन किया था. इस शहर में पियरे जिएन्नरेट, मैथ्यु नोविकी और अल्बर्ट मेयर के भी अद्भुत वास्तु नमूने देखे जा सकते हैं.
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राम कृष्ण