यूपी की कुशीनगर लोकसभा सीट पर मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विजय कुमार दुबे, कांग्रेस के कुंवर रतनजीत प्रताप नारायण सिंह (आरपीएन सिंह) और समाजवादी पार्टी के एनपी कुशवाहा के बीच रहा. जिसमें बीजेपी के विजय कुमार दुबे ने बाजी मार ली. विजय कुमार दुबे को 5,97,039 यानी 56.69% वोट मिले. वहीं, सपा के एनपी कुशवाहा 259479 यानी 24.64% वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे. इसके अलावा तीसरे स्थान पर काबिज कुंवर रतनजीत को 146151 यानी 146151 13.88% वोट मिले.
इस सीट पर आखिरी चरण में वोटिंग हुई थी. इसमें 57.37 फीसदी मतदान हुआ था. कुशीनगर संसदीय सीट पर 14 उम्मीदवार मैदान में थे.
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2008 में नए लोकसभा के रूप में अस्तित्व में आने के बाद 2014 में कुशीनगर में दूसरा लोकसभा चुनाव कराया गया. इस चुनाव में 14 उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई, जिसमें भारतीय जनता पार्टी के राजेश पांडे उर्फ गुड्डू ने कांग्रेस के आरपीएन सिंह को हराया था. राजेश पांडे को 3,70,051 यानी 38.9% मत मिले जबकि आरपीएन सिंह को 284,511 (29.9%) मत मिले. राजेश ने यह चुनाव 85,540 (9.0%) मतों के अंतर से जीता.
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चुनाव में बसपा के संगम मिश्रा 14.0% वोट हासिल कर तीसरे स्थान पर रहे. सपा के राधेश्याम सिंह 11.7 फीसदी वोट के साथ चौथे स्थान पर रहे. आम आदमी पार्टी (आप) भी चुनाव मैदान में थी जिसे महज 3,802 यानी 0.4% वोट मिले और 10वें स्थान पर रही. 2014 के लोकसभा चुनाव के आधार पर देखा जाए तो यहां पर मतदाताओं की संख्या 16,80,992 थी, जिसमें पुरुषों की संख्या 9,30,637 और महिलाओं की संख्या 7,50,355 थी. तब चुनाव 9,50,445 (56.5%) वोट पड़े थे, जिसमें नोटा के खाते में 10,102 वोट पड़े.
महात्मा बुद्ध के महापरिनिर्वाण के कारण कुशीनगर शहर की अंतरराष्ट्रीय पहचान है और बौद्ध धर्म के मानने वालों के लिए इस स्थल का खास महत्व है. पहले पडरौना लेकिन अब कुशीनगर को लोकसभा सीट बना दिया गया.
2009 से अस्तित्व में आई सीट
कुशीनगर संसदीय सीट 2008 में उस समय अस्तित्व में आई जब 2002 में गठित परिसीमन आयोग की ओर से इस क्षेत्र को नए संसदीय सीट बनाए जाने के सुझाव को अमल में लाया गया. पहले यह संसदीय क्षेत्र पडरौना के नाम से जाना जाता था, लेकिन 2009 के लोकसभा चुनाव में कुशीनगर को संसदीय सीट का दर्जा मिल गया और यहां हुए पहले चुनाव में कांग्रेस ने अपना खाता खोला.
कांग्रेस के रतनजीत प्रताप नारायण सिंह (आरपीएन सिंह) ने 2009 में यहां पर जीत हासिल की थी. उन्होंने इस चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के स्वामी प्रसाद मौर्य को 21,094 मतों के अंतर से हरा दिया. बीजेपी के विजय दुबे तीसरे और सपा के ब्रह्मा शंकर त्रिपाठी चौथे स्थान पर रहे.
पहले यह सीट पडरौना लोकसभा सीट के नाम से जानी जाती थी. 2011 की जनगणना के मुताबिक कुशीनगर की आबादी 35.6 लाख (35,64,544) है और यह आबादी के लिहाज उत्तर प्रदेश का 21वां सबसे घनी आबादी वाला जिला है. जिले में 4 उपजिले हैं जिसमें पडरौना सबसे घनी आबादी वाला क्षेत्र है. जिले की आबादी 35.6 लाख है जिसमें पुरुषों की संख्या 51 फीसदी यानी 18.2 लाख है जबकि महिलाओं की संख्या 17.5 लाख यानी 49 फीसदी है.
जातिगत आधार पर देखा जाए तो सामान्य वर्ग की 82 फीसदी जनता यहां रहती है तो अनुसूचित जाति की 15 फीसदी और अनुसूचित जनजाति की 2 फीसदी आबादी यहां पर है. औसतन हर परिवार में यहां 6 लोग रहते हैं. कुशीनगर की 95 फीसदी आबादी ग्रामीण अंचल में रहती है.
धर्म के आधार पर देखा जाए तो यहां पर हिंदुओं की 82.28 फीसदी (29,28,462) आबादी है जबकि मुस्लिमों की 17.4 फीसदी (14,97,055) आबादी रहती है. लिंगानुपात के मामले में यहां अन्य पड़ोसी जिलों की तुलना में अच्छी नहीं है. एक हजार पुरुषों की तुलना में 961 महिलाएं हैं जिसमें अनुसूचित जनजाति में यह आंकड़ा प्रति हजार 958 है. साक्षरता दर के मामले में 65 फीसदी आबादी पढ़ी-लिखी है, जिसमें 78 फीसदी पुरुष और 52 फीसदी महिलाएं साक्षर हैं.
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