लोकसभा चुनाव खत्म होने से पहले चुनाव आयोग में भी मतभेद सामने आ गए हैं. निर्वाचन आयुक्त अशोक लवासा ने पत्र लिखकर आचार संहिता तोड़ने संबंधी कई फैसलों पर असहमति जताई है. इस शिकायत पर हुए विवाद को मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने बेकार और गैर जरूरी बताया.
अरोड़ा ने शनिवार को कहा कि आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) पर अल्पमत का निर्णय रिकॉर्ड करने और निर्वाचन आयुक्त अशोक लवासा की तरफ से उन्हें भेजे गए पत्र को लेकर पैदा हुआ विवाद बेकार है और गैर जरूरी है. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर और इससे संबंधित मामलों पर चर्चा के लिए मंगलवार को निर्वाचन आयोग की एक बैठक बुलाई गई है.
मुख्य चुनाव आयुक्त ने विवाद को बताया बेकार
मुख्य चुनाव आयुक्त ने एक बयान में कहा, "मीडिया के एक वर्ग में आदर्श आचार संहिता से निपटने के संबंध में भारत निर्वाचन आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली के बारे में आज एक बेकार और गैर जरूरी विवाद की खबर आई है." बयान के अनुसार, "यह विवाद ऐसे समय में पैदा हुआ है, जब देशभर में सभी सीईओ (मुख्य चुनाव अधिकारी) और उनकी टीमें कल होने वाले सातवें और अंतिम चरण के मतदान और उसके बाद 23 मई की मतगणना के लिए अपनी तैयारी में जुटी हुई हैं."
सुनील अरोड़ ने कहा कि 14 मई को ईसी की पिछली बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया था कि लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान सामने आए मुद्दों से निपटने के लिए कुछ समूह गठित किए जाएंगे, जैसा कि 2014 के लोकसभा चुनाव बाद किया गया था. इन 13 मुद्दों में आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) भी शामिल था."
लवासा के पत्र को बताया आंतरिक मामला
सीईसी ने कहा है कि एमसीसी पर लवासा का पत्र चुनाव आयोग का एक आंतरिक मामला है. साथ ही उन्होंने ये भी कहा, "यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि यह ईसीआई का एक आंतरिक मामला है और इस संबंध में कयासबाजी और अनुमान से बचा जाना चाहिए." अरोड़ा ने कहा है कि अतीत में भी निर्वाचन आयोग के सदस्यों के बीच मतभेद रहे हैं, लेकिन वह मानते हैं कि बेकार का विवाद पैदा करने से बेहतर है कि शांत रहा जाए.उन्होंने ये भी कहा, "निर्वाचन आयोग के तीनों सदस्यों से एक-दूसरे का क्लोन या टेम्पलेट होने की अपेक्षा नहीं की जा सकती है. पहले भी कई बार मतभेद रहा है, जो हो सकता है और होना भी चाहिए"
उन्होंने कहा, "लेकिन ऐसे मतभेद ज्यादातर पदमुक्त होने तक ईसीआई के दायरे के अंदर ही रहे हैं. जब तक कि निर्वाचन आयुक्तों या मुख्य निर्वाचन अधिकारियों ने उसे किताबों में नहीं लिखा" अरोड़ा ने कहा कि जरूरत पड़ने पर वह किसी सार्वजनिक बहस से कभी पीछे नहीं भागे, लेकिन हर चीज का समय होता है. उन्होंने आगे कहा, "मैंने कुछ दिनों पूर्व एक प्रमुख दैनिक से कहा था कि मौन की भाषा हमेशा कठिन होती है, लेकिन निर्वाचन प्रक्रिया को देखने के लिए यह अधिक जरूरी है, मुकाहले इसके कि बेकार के विवाद पैदा किए जाएं"
अमित शाह और पीएम मोदी को क्लीनचिट मिलने के बाद विवाद
चुनाव आयोग में विवाद तब पैदा हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह के भाषणों पर क्लीन चिट दिए जाने पर निर्वाचन आयुक्त अशोक लवासा ने असहमति जताई. इसके बाद निर्वाचन आयुक्त अशोक लवासा ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर एमसीसी उल्लंघनों पर निर्णय करने के लिए आयोजित होने वाली पूर्ण आयोग की बैठकों से खुद को अलग कर लिया.
लवासा ने अपने पत्र में जोर देकर कहा है कि वह बैठक में तभी शामिल होंगे, जब उनके अल्पमत के निर्णयों को भी आयोग के निर्णयों में शामिल किया जाए. बता दें कि तीन सदस्यों वाले पूर्ण आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा और दो अन्य आयुक्त- अशोक लवासा और सुशील चंद्र शामिल हैं.
विपक्ष के निशाने पर चुनाव आयोग
इस विवाद पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भा आने लगीं. कांग्रेस ने आयोग पर निशाना साधते हुए इसे मोदी का पिट्ठू बताया. कांग्रेस ने कहा कि अशोक लवासा की चिट्ठी से साफ है कि सीईसी और उनके सहयोगी लवासा के बीच नरेंद्र मोदी और अमित शाह को लेकर जो अलग मत है, उसे रिकॉर्ड करने को तैयार नहीं हैं. पश्चिमी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी कहा कि चुनाव आयोग मोदी और शाह के इशारे पर काम कर रहा है.
aajtak.in