Dausa Lok Sabha Chunav Result 2019: बीजेपी उम्मीदवार जसकौर मीणा जीतीं

Lok Sabha Chunav Dausa Result 2019: दौसा संसदीय क्षेत्र पर बीजेपी उम्मीदवार जसकौर मीणा ने जीत दर्ज की है. 2019 के लोकसभा चुनाव में दौसा सीट पर 61.20 फीसदी मतदान दर्ज किया गया.

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Dausa Lok Sabha Election Result 2019 Dausa Lok Sabha Election Result 2019

aajtak.in / पुनीत सैनी / दिनेश अग्रहरि

  • नई दिल्ली,
  • 23 मई 2019,
  • अपडेटेड 9:21 PM IST

राजस्थान की दौसा लोकसभा सीट पर मतगणना की प्रक्रिया खत्म हो गई है. दौसा सीट पर बीजेपी उम्मीदवार जसकौर मीणा जीत गई हैं. जसकौर मीणा ने 78,444 वोटों से जीत दर्ज की है. मीणा को कुल 5,48,733 वोट हासिल हुए हैं. वहीं कांग्रेस की उम्मीदवार सविता मीणा को 4,70,289 मत प्राप्त हुए हैं.

यहां लोकसभा सीट पर पांचवें चरण के तहत 6 मई को वोट डाले गए. इस सीट पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच आमने-सामने का मुकाबला है. राजस्थान के डिप्टी सीएम सचिन पायलट की कर्मभूमि दौसा में कांग्रेस मजबूत रही है. लिहाजा इस सीट को कांग्रेस हर हाल में जीतना चाहती है, लेकिन 2014 में मोदी लहर में इस सीट पर बीजेपी के टिकट से हरीशचंद्र मीणा ने चुनाव जीतकर सबको चौंका दिया था. इस बार इस सीट पर 11 उम्मीदवार मैदान में हैं.

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सीट पर मतगणना के दौरान मिलने वाले रुझान और अंतिम परिणाम जानने के लिए इस पेज पर बने रहें और इसे रिफ्रेश करते रहें.

इस बार कितनी हुई वोटिंग

दौसा संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत विधानसभा की 8 सीटें हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव में दौसा सीट पर 61.20 फीसदी मतदान दर्ज किया गया.

प्रमुख उम्मीदवार

इस बार इस सीट पर 11 उम्मीदवार मैदान में थे. बीजेपी ने यहां से महिला उम्मीदवार जसकौर मीणा को टिकट दिया था. कांग्रेस की ओर से सविता मीणा मैदान में थीं. कांग्रेस-बीजेपी के अलावा इस सीट से बहुजन समाज पार्टी, अम्बेडकराइट पार्टी ऑफ इंडिया के उम्मीदवार भी मैदान में थे.

2014 का जनादेश

साल 2014 के लोकसभा चुनावों में दौसा सीट पर दिलचस्प मुकाबला देखने को मिला था. जब कांग्रेस के सांसद और मंत्री नमोनारायण मीणा के खिलाफ उन्हीं के भाई हरीशचंद्र मीणा भाजपा के उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे. वहीं इस सीट पर तीसरा कोण मीणा समुदाय के कद्दावर नेता किरोड़ी लाल मीणा थे. बीजेपी के टिकट पर हरीशचंद्र मीणा ने किरोड़ी लाल मीणा को 45,404 वोट से पराजित किया. जबकि कांग्रेस के नमोनारायण मीणा तीसरे स्थान पर रहे. इस चुनाव में हरीशचंद्र मीणा को 3,15,059, किरोणी लाल को 2,69,655, जबकि नमोनारायण मीणा को 1,81,272 वोट मिले थे.

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लेकिन आम चुनावों के बाद किरोड़ी लाल मीणा के बीजेपी में शामिल होकर राज्यसभा चले जाने से, हरीश चंद्र मीणा की पार्टी में अहमियत कम हो गई. और कांग्रेस पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाले बीजेपी सांसद हरीशचंद्र मीणा ने विधानसभा चुनावों के ठीक पहले बीजेपी का दामन छोड़ कांग्रेस में शामिल हो गए.

सामाजिक ताना-बाना

दौसा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र संख्या 11 अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है. यह लोकसभा अलवर, दौसा और जयपुर जिले के कुछ हिस्सों को मिला कर बनाया गया है. 1991 में जिला बना दौसा राजस्थान के सबसे छोटे जिलों में से एक है. सामाजिक तौर पर दौसा राज्य की दो मार्शल कौम गुर्जर और मीणा के बीच राजनीतिक वर्चस्व का केंद्र रहा है.

राजस्थान की सियासत में एक आम धारणा है कि अगर किसी गुर्जर को महत्व दिया जाता है, तो मीणा समुदाय के नाराज होने का खतरा रहता है. वहीं किसी मीणा को महत्व मिलता है, तो गुर्जर नाराज हो जाते हैं. इन दोनों समुदायों के बीच आरक्षण का विवाद भी है. पिछली वसुंधरा सरकार के समय गुर्जरों ने आदिवासी का दर्जा हासिल करने के लिए आंदोलन किया था, जिसमें पुलिस की गोली से कई गुर्जर आंदोलनकारियों की मौत हुई थी. तभी से दोनों समुदायों के बीच रिश्ता तनावों से भरा रहा है.

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साल 2011 की जनगणना के मुताबिक की जनसंख्या 25,20, 397 है, जिसका 88.75 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण और 11.25 प्रतिशत हिस्सा शहरी है. जबकि कुल आबादी का 21.08 फीसदी अनुसूचित जाति और 25.96 फीसदी अनुसूचित जनजाति हैं.

सीट का इतिहास

दौसा संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत विधानसभा की 8 सीटें हैं. आजादी के बाद दौसा में हुए कुल 16 लोकसभा चुनाव और 1 उपचुनाव में 11 बार कांग्रेस का कब्जा रहा, जबकि 2 बार बीजेपी, 2 बार स्वतंत्र पार्टी, 1 बार भारतीय लोकदल और 1 बार निर्दलीय उम्मीदवार का कब्जा रहा. 1957 में इस सीट से कांग्रेस को कामयाबी मिली तो 1962, 1967 में स्वतंत्र पार्टी ने अपना परचम लहराया. 1971 में कांग्रेस, 1977 में भारतीय लोकदल, 1980, 1984 में कांग्रेस ने फिर वापसी की. 1989 में बीजेपी की जीत के बाद 1991 से 2004 तक लगातार 5 बार यह सीट कांग्रेस के पास रही.

कांग्रेस के दिवंगत नेता राजेश पायलट 1984, 1991, 1996, 1998 में यहां से सांसद रहे. राजेश पायलट के निधन के बाद साल 2000 में हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी रमा पायलट विजयी हुईं. जबकि साल 2004 के लोकसभा चुनाव में राजेश पायलट के पुत्र सचिन पायलट विजयी हुए. 2009 के परिसीमन में यह सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हो गई, 2009 के आम चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार किरोणी लाल मीणा यहां से चुनाव जीतकर सांसद बने. जबकि 2014 में बीजेपी के टिकट पर हरीश चंद्र मीणा यहां से विजयी हुए. फिलहाल बीजेपी सांसद हरीश चंद्र मीणा कांग्रेस में हैं और टोंक की देवली-उनियारा सीट से विधायक हैं.

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दौसा संसदीय सीट में आने वाली 8 विधानसभा सीटों में दौसा जिले की बांदिकुई, महुआ, सिकराय, दौसा, लालसोट विधानसभा, जयपुर जिले की बस्सी, चाकसू विधानसभा और अलवर जिले की थानागाजी विधानसभा शामिल हैं. हाल में हुए विधानसभा चुनावों में बांदिकुई, सिकराय, दौसा, लालसोट और चाकसू सीट पर कांग्रेस जीती. जबकि थानागाजी, बस्सी और महुआ सीट पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत का परचम लहराया. इस लिहाज से दौसा की 8 सीटों में 5 पर कांग्रेस का कब्जा है.

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