Bulandshahr Lok Sabha Chunav Result 2019: भाजपा प्रत्याशी भोला विजयी

Lok Sabha Chunav Bulandshahr Result 2019: बुलंदशहर से भाजपा प्रत्याशी भोला सिंह ने गठबंधन उम्मीदवार बसपा के योगेश वर्मा को 290057 मतों से हराया है.

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aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 23 मई 2019,
  • अपडेटेड 2:27 PM IST

17वीं लोकसभा चुनाव के तहत उत्तर प्रदेश की बुलंदशहर सीट से भाजपा प्रत्याशी भोला सिंह ने गठबंधन उम्मीदवार बसपा के योगेश वर्मा को 290057 मतों से हराया है. इस सीट पर बीजेपी, बसपा और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिला.

कब  और  कितनी  हुई  वोटिंग

बुलंदशहर सीट  पर  वोटिंग  दूसरे चरण  में  18 अप्रैल  को  हुई  थी,  इस सीट पर 62.73 फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार  का  इस्तेमाल  किया  था. इस सीट पर कुल 1782461 मतदाता हैं, जिसमें से 1118221 मतदाताओं ने अपने वोट डाले हैं.

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प्रमुख  उम्मीदवार

अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित बुलंदशहर सीट  पर  सत्तारूढ़  भारतीय  जनता  पार्टी के भोला सिंह चुनाव लड़ रहे  थे, जिनका मुख्य  मुकाबला बसपा के योगेश वर्मा से था. हालांकि इस सीट पर कांग्रेस से बंशी सिंह  चुनाव लड़ रहे थे. इस सीट पर कुल 13 प्रत्याशी मैदान में थे.

2014 का चुनाव

2014 के लोकसभा चुनाव में अमरोहा सीट पर 58.15 फीसदी वोटिंग हुई थी, जिसमें बीजेपी प्रत्याशी भोला सिंह को 59.83 फीसदी (6,04,449) वोट मिले थे और और उनके  निकटतम बसपा प्रत्याशी प्रदीप जाटव को 18.06 फीसदी (1,82,476)  मिले थे. इसके अलावा सपा से कमलेश बाल्मिकी को महज 12.74 फीसदी (1,28,737) वोट मिले थे. इस सीट पर बीजेपी के भोला सिंह ने 4,21,973 मतों से जीत दर्ज की थी.

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बुलंदशहर सीट का इतिहास

बुलंदशहर का संसदीय इतिहास 1952 से ही कायम है और 1952 से लेकर 1971 तक यहां हुए पांच चुनाव में कांग्रेस ने लगातार जीत दर्ज की, लेकिन उसके बाद यहां पर मतदाताओं ने लगातार हुए चुनावों में अलग-अलग पार्टियों को तवज्जो दी. 1977 में भारतीय लोक दल, 1980 में जनता दल ने यहां कांग्रेस को करारी मात दी थी. लेकिन 1984 में कांग्रेस वापसी करने में कामयाब रही.

हालांकि 1989 के बाद से कांग्रेस यहां पर वापसी के लिए संघर्ष कर रही है. 1989 चुनाव में जनता दल के जीत दर्ज करने के बाद 90 के दशक में राम लहर के दौर में 1991 से लेकर 2004 तक लगातार पांच बार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने चुनाव हासिल की. इस दौरान 1991 से 1999 तक बीजेपी के छतरपाल सिंह ने इस सीट पर अपना दबदबा बनाए रखा. 2004 में भी बीजेपी को यहां से जीत मिली थी. 2009 में यहां समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार कमलेश वाल्मिकी ने बड़ी जीत दर्ज की, लेकिन 2014 में देश में चली मोदी लहर का असर यहां भी दिखा और बीजेपी ने जीत हासिल की.

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