बिहार की औरंगाबाद सीट पर इस बार लड़ाई भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) बनाम महागठबंधन की है. यानी सीधी लड़ाई बीजेपी के सुशील कुमार सिंह और महागठबंधन हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के उपेंद्र प्रसाद के बीच में हैं. औरंगाबाद में राजपूत वोटर्स हावी रहे हैं. इस सीट से 9 प्रत्याशी अपना भाग्य आजमाने उतर रहे हैं. बहुजन समाज पार्टी की ओर से नरेश यादव मैदान में हैं. पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया (डेमोक्रेटिक) से अविनाश कुमार मैदान में हैं. अखिल हिंद फॉर्वर्ड ब्लॉक (क्रांतिकारी) से डॉक्टर धर्मेंद्र कुमार से मैदान में हैं. स्वराज पार्टी (लोकतांत्रिक) से सोम प्रकाश चुनाव लड़ रहे हैं. निर्दलीय उम्मीदवारों में धीरेंद्र कुमार सिंह, योगेंद्र राम, संतोष कुमार सिन्हा मैदान में हैं.
इस क्षेत्र में राजपूत वोट ही निर्णायक होते हैं. राजस्थान के रजवाड़ो की तौर पर इस संसदीय सीट को बिहार का चित्तौड़गढ़ भी कहा जाता है. यहां का इतिहास रहा है कि सिर्फ राजपूत प्रत्याशियों की ही जीत मिली है. 1952 में हुए पहले चुनाव से लेकर 2014 के चुनाव तक हर बार राजपूत उम्मीदवार ही जीतते रहे हैं. औरंगाबाद संसदीय सीट पर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री सत्येंद्र नारायण सिंह और उनके परिवार का दबदबा रहा है. यह सीट कांग्रेस की परंपरागत सीट भी कही जाती रही है.
राज्य के पहले उप मुख्यमंत्री डॉ. अनुग्रह नारायण सिन्हा और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री सत्येंद्र नारायण सिंह औरंगाबाद से आते हैं. उनके परिवार का औरंगाबाद लोकसभा सीट पर दबदबा माना जाता है. निखिल कुमार और उनकी पत्नी श्यामा सिंह भी कांग्रेस की ओर से यहां से सांसद चुने गए. निखिल कुमार राज्यपाल भी बने.
औरंगाबाद संसदीय क्षेत्र के तहत विधानसभा की 6 सीटें आती हैं- कुटुम्बा, औरंगाबाद, रफीगंज, गुरुआ, इमामगंज और टिकारी. इनमें से दो सीटें कुटुम्बा और इमामगंज रिजर्व सीटें हैं. 2015 के बिहार विधानसभा चुनावों में इन 6 सीटों में से दो कांग्रेस, दो जेडीयू, 1 बीजेपी और एक सीट हम के खाते में गई. हिंदुस्तान अवाम मोर्चा के नेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी इमामगंज सीट से विधायक चुने गए.
आजादी के बाद सन 1952 के पहले चुनाव में यहां से सत्येंद्र नारायण सिंह सांसद चुने गए. उन्हें सात बार इस सीट से लोकसभा चुनावों में जीत मिली. उनके परिवार से 1999 में कांग्रेस की श्यामा सिंह, फिर 2004 में निखिल कुमार जीते. तीन चुनावों में ये सीट जनता दल के हाथ में गई. 1998 में समता पार्टी के सुशील कुमार सिंह इस सीट से जीतने में कामयाब रहे. 2009 के चुनाव में सुशील कुमार सिंह ने जेडीयू और 2014 में बीजेपी के टिकट पर इस सीट से जीत हासिल की.
औरंगाबाद लोकसभा सीट पर मतदाताओं की कुल संख्या 1,376,323 है जिनमें से पुरुष मतदाता 738,617 और महिला मतदाता 637,706 हैं.
2014 में हुए लोकसभा चुनाव में इस सीट से बीजेपी के सुशील कुमार सिंह जीते. वे जेडीयू से बीजेपी में आए थे. सुशील कुमार सिंह को 307941 वोट मिले और उन्होंने कांग्रेस के निखिल कुमार को हराया. निखिल कुमार को 241594 वोट मिले. जेडीयू के बागी कुमार वर्मा 136137 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे. 16वीं लोकसभा के दौरान सुशील कुमार सिंह ने 66 बहसों में हिस्सा लिया. 4 प्राइवेट मेंबर बिल वे संसद में लेकर आए. जनहित के विभिन्न मुद्दों पर 371 सवाल उन्होंने संसद के पटल पर पूछे.
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